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किताबें, कला और नृत्य के साथ यह एनजीओ बच्चों की सशक्त और शिक्षित करती है

तर्कसंगत

March 27, 2019

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“शिक्षा जीवन के लिए तैयारी नहीं है, शिक्षा अपने आप में जीवन है” जॉन डेवी ने शिक्षा के महत्व में कहा था. हमें अपनी आंतरिक क्षमताओं का पता लगाने के लिये शिक्षा की जरुरत को कम नहीं आँका जा सकता है. दुर्भाग्य से हर एक बच्चे को यह लाभ प्राप्त नहीं है कि वे सम्पूर्ण विकास के लिये अपने आसपास बुनियादी चीज़ों का पता लगा सकें या उन्हें समझ सकें.

 

‘सिल्वर लाइनिंग एनजीओ’ कई कमजोर बच्चों को एक आशा की एक किरण दिखाती है जो बुनियादी शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना चाहते हैं. इसके लिये ये अपने सामाजिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई कराते हैं. देहरादून, उत्तराखंड की इस NGO ने कई बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कराने में मदद की है.

 

 

सिल्वर लाइनिंग की शुरुआत 2017 में एक Non Profitable Organization के रूप में शुरू हुई थी. कुछ बदलने का इरादा रखने वाले दो लोग कनिका विज़न और अजय सिंह, शिक्षा को गरीबों को सशक्त बनाने का एक शक्तिशाली साधन मानते हैं. शुरुआत में, उन्होंने बच्चों के छोटे समूह को पढ़ाने के साथ-साथ अन्य कौशल जैसे पेंटिंग, शिल्प और नृत्य को बढ़ावा दिया लेकिन बाद में उन्होंने महसूस किया कि कई बच्चे ऐसे रह गये हैं जो खुद को विकसित कर सकते हैं. जिसके बाद उन्होंने इस स्कूल की शुरुआत की.

 

कनिका ने तर्कसंगत को बताया “जब मैं अपनी छुट्टियों के दौरान देहरादून जाती था तो मेरे इलाके के कई बच्चे मेरे पास करियर की सलाह लेने आते थे. अपना कॉलेज पूरा करने के बाद मैंने अनौपचारिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और पाया कि उनमें विषय की बुनियादी समझ का अभाव है. इसके अलावा, मैंने पाया कि प्राथमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता को अक्सर हम अनदेखा कर देते हैं. इस मुद्दे को हल करने के लिए, हमने ‘काइट्स प्री-रेमेडियल स्कूल’ के नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया, जहाँ हम बच्चों के पूरे विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं.”

 

 

Kites Preparatory Remedial School उनकी परियोजनाओं में से है जिसमें वे झुग्गी के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यक जीवन कौशल भी सिखाते हैं. इस स्कूल में आने वाले बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हैं और 2 से 6 वर्ष की आयु के अंतर्गत आते हैं. बचपन के विकास कार्यक्रमों के महत्व पर जोर देते हुए यह स्कूल सीखने योग्य परिस्थितियों का निर्माण करता है जहाँ बच्चे तनाव-मुक्त पढ़ाई कर सकें और उन अनुभवों को भी प्राप्त कर सकें जो उनकी सोच को नया आकार देंगे. पिछले साल काइट्स प्री-रेमेडियल स्कूल को ‘बेस्ट प्री-स्कूल ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किया गया था.

तर्कसंगत के साथ इस परियोजना के बारे में कनिका ने बताया “इस परियोजना का Concept Based Classroom का परिणाम अभूतपूर्व था. उन्हें सिखाने के लिए रचनात्मक तरीकों का उपयोग करके हम उन्हें महत्वपूर्ण विषयों को मज़ेदार तरीके से समझाते हैं.”

वह आगे बताती हैं “सम्पूर्ण विकास के लिए extracurricular activities महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. हम नृत्य, पेंटिंग और अन्य प्रेरक सत्र में भी भाग लेते हैं ताकि केवल किताब पर ध्यान केंद्रित ना करके उनके व्यक्तित्व को भी आकार दे सकें. इसके साथ ही उनके माता-पिता भी उनकी शिक्षा के बारे में और जागरूक हो रहे हैं.”

 

 

शिक्षा प्रणाली को एकीकृत बनाने की दृष्टि से उन्होंने एक और पहल शुरू की है जिसका नाम है ‘उदान’. इस पहल के तहत, वे उन बच्चों को मुफ्त स्टेशनरी, किताबें और अन्य पढ़ाई का सामान प्रदान करते हैं जिनके पास ऐसे विशेषाधिकार नहीं हैं. इन पढ़ने वाले सामान की कीमत ज्यादा है जिससे आर्थिक रूप से कमजोर लोग इसे नहीं खरीद पाते हैं और स्कूल जाना बंद कर देते हैं. लेकिन ‘सिल्वर लाइनिंग एनजीओ’ आर्थिक रूप से पिछड़े और वंचित बच्चों के बचाव में आगे आया है ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े.

 

 

कनिका गर्व से बताती हैं “हमने जिन बच्चों के साथ शुरुआत की थी वे बढ़कर अब 150 हो चुके हैं. जब हमने एक छोटे समूह के साथ शुरुआत की तो हम बस किसी तरह पैसों को जुगाड़ कर पाते थे. लेकिन अब हम दोनों अपनी बचत को मिलाकर खर्च करते हैं जिससे बच्चों को उचित शिक्षा के लिए आवश्यक सभी चीजें मिल सकें. मुझे लगता है कि समाज में योगदान देना मेरी जिम्मेदारी है. दिन के अंत में उन बच्चों की मुस्कान और सकारात्मक प्रतिक्रिया देख हम दोनों उन समस्याओं को भूल जाते हैं जिनका हम सामना कर रहे हैं.”

 

 

हालांकि ऐसा माना जाता हैं कि जब लोग सामूहिक और रचनात्मक रूप से काम करते हैं जो समाज में परिवर्तन होता है. वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को सशक्त बनाने के उनके प्रयासों से समाज में परिवर्तन देखा जा सकता हैं. उनका प्रयास हर उस बच्चे को आशा की किरण देता है जिसके पास बुनियादी शिक्षा की कमी है. वे एक ऐसे समाज की कल्पना करते है जहां हर बच्चा एक सामान हो और स्कूल जाता हो.

 

तर्कसंगत, शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत के लिये ‘सिल्वर लाइनिंग एनजीओ’ को सलाम करता है.

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