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टूथपिक्स, बैंगल्स, चूड़ियाँ या मैच स्टिक्स; 22 साल का नौजवान कुछ भी बना सकता है

तर्कसंगत

March 28, 2019

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कला में हमें प्रेरित करके हमारा उत्थान करने की शक्ति होती है. 22 वर्षीय गट्टम वेंकटेश की कला बस यही कर रही है. वे कहते हैं ‘हर एक चीज़ के अंदर ईश्वर है.’ वेंकटेश नक्काशी करते हैं और छोटी-लघु कलाओं से लगभग कुछ भी बना सकते हैं जैसे पेंसिल, सीसा, चूड़ी, माचिस की तीली और क्या नहीं. मात्र 19 वर्ष की आयु में वेंकटेश ने अपनी प्रतिभा के दम पर गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है.

वेंकटेश कहते हैं कि कला की कोई सीमा नहीं होती है. वे मानते हैं कि बच्चों को कला से सिर्फ इसीलिए दूर नहीं रखना क्यूंकि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं, ये उनके साथ नाइंसाफी है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए, वह सरकारी स्कूल के बच्चों को कला और शिल्प सिखाते हैं. वह अपनी कक्षाओं और कला शिविर को नियमित अंतराल में आयोजित करते हैं जिससे अब तक लगभग 10,000 छात्रों की मदद हो चुकी है.

 

‘हर एक चीज़ के विवरण में ईश्वर है’

यह दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के तुरंत बाद था जब 14 साल के वेंकटेश ने लघु कला की दुनिया में अपनी शुरुआत की थी. उनकी पहली रचना भगवान गणेश की प्रतिमा थी जिसे उन्होंने कांच की चूड़ियों से बनाया था. वेंकटेश ने द लॉजिकल इंडियन को बताया “मेरे माता-पिता ने मुझमें एक ललक और जिज्ञासा को देखा और पूरा अपना पूरा साथ दिया. वे ही थे जिन्होंने मुझे इसे अच्छे ढंग से करने के लिए आगे प्रोत्साहित किया और अब आठ साल बाद भी मुझे अपने माता-पिता इतना ही सहयोग मिल रहा है.”

 

 

आमतौर पर यह माना जाता है कि कला और शिल्प का उपयोग और उपभोग केवल धनी ही किया करते हैं लेकिन वेंकटेश ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है. वह एक कृषि पृष्ठभूमि से आते हैं. उनका परिवार विशाखापत्तनम के चिनाडोडिगालु में रहता है. उनके पिता एक किसान हैं और माँ एक गृहिणी हैं. वेंकटेश Architecture की पढ़ाई कर रहे हैं और पांचवें वर्ष हैं.

 

 

वेंकटेश का एक मात्र उपकरण ‘सर्जिकल ब्लेड और सुई” हैं. उन्होंने शतरंज की बिसात, इमारतें, जहाज, नक्काशीदार नाम और बहुत कुछ डिजाइन किया है. 2017 में उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ जब उन्होंने मात्र 21 मिनट में टूथपिक (दांत में फंसी चीज़ो को निकालने वाली सींक) पर ‘एम्पायर एस्टेट बिल्डिंग’ को बनाया था.

 

इसके अलावा, वह 100 से ज्यादा पुरस्कार जीत चुके हैं. वेंकटेश ने बताया कि उनके जीवन का एक सबसे आकर्षित पल भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलना और अपनी कला का प्रदर्शन करना था.

 

कला हर किसी के लिए

वेंकटेश का मानना ​​है कि कला को कुछ लोगों तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि सभी को इसका आनंद लेने में सक्षम होना चाहिए. ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले वेंकटेश खुद गाँवो के सरकारी स्कूल के छात्रों को कला सीखाते हैं. “मैं इन स्कूलों के छात्रों को पढ़ाने और नयी नयी चीज़ें सीखाने के लिए हर कीमत पर समय निकालता हूं. मैंने अब तक लगभग 10,000 छात्रों को पढ़ाया है. लगभग 450-500 छात्र इससे प्रेरित हुये हैं जिन्होनें मेरी सिखाई बातों का उपयोग अपने स्कूल प्रोजेक्ट्स में किया है.”

 

 

वेंकटेश एक लंबे समय के लिए कला और शिल्प के काम को सभी के लिए सस्ता बनाना चाहते हैं. वह मानते हैं कि वह अपने शिल्प को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं और हर दिन प्रगति करने की उम्मीद करते हैं. “जो लोग कला को आगे बढ़ाने की इच्छा रखते हैं वे सिर्फ दृढ़ता, कड़ी मेहनत और एकाग्रता के साथ काम करते रहें. मैं हर किसी को सुझाव दूंगा कि वह हर दिन और हर दिन बेहतर होने के लिये काम करे.”

 

तर्कसंगत  वेंकटेश की सराहना करता है कि वह न केवल जुनून के साथ अपने शिल्प को आगे बढ़ा रहे है बल्कि उन छोटे बच्चों को भी आगे ले जा रहे हैं जिनके पास संसाधन नहीं है लेकिन प्रतिभा, योग्यता और कला के प्रति रुचि है.

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