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चीफ जस्टिस ने एक ही दिन में 700 लंबित मामलों पर कार्रवाई की; गलतियां ठीक करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया

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March 28, 2019

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26 मार्च को, भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति राजन गोगोई के सामने 750 मामले दर्ज किए गए थे. इन मामलों को न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ और जस्टिस दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था.

इतने सारे मामलों को सूचीबद्ध करने के पीछे का कारण बताते हुए, CJI ने कहा कि केस संख्या 12 से 751 सभी दोषपूर्ण थे. इनमें से कुछ मामले 2010 और 2011 के थे. वे दोषों के कारण लंबित थे. पीठ ने फैसला किया कि दो सप्ताह के समय में दोषों को ठीक नहीं किए जाने पर मामलों को बिना सूचना के खारिज कर दिया जाएगा.

 

पुराने केस धूल फांक रहे हैं

द हिंदू द्वारा रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट में कुछ केस नौ साल से लंबित हैं. वे सभी दोषपूर्ण हैं. याचिकाकर्ताओं ने दोषों को दूर नहीं किया है. ये मामले 2010, 2011, 2012 से लंबित हैं.”

पीठ ने याचिकाकर्ताओं और वकीलों को बताया कि लंबित मामलों को निपटाने के लिए उन्हें सिर्फ दो सप्ताह का समय मिलेगा. जब एक वकील ने हस्तक्षेप किया और कम से कम चार सप्ताह का समय मांगा, तो CJI ने दृढ़ता से कहा, “नहीं, बस दो सप्ताह.”

CJI के पद को ग्रहण हुए, न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा था कि वे मामलों के लंबित होने की समस्या से निपटने की कोशिश करेंगे, जो कि कोर्ट की छवि ख़राब कर रहा है और न्यायपालिका प्रणाली को अप्रासंगिक कर रहा है, जैसा कि बार और बेंच की रिपोर्ट में लिखा है.

 

लंबित मामले

सुप्रीम कोर्ट में मार्च 2019 तक 57,785 मामले लंबित हैं. इनमें से कम से कम 13,257 मामले या तो अधूरे हैं या तैयार मामले नहीं हैं.

देश में जजकी संख्या के अनुपात पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए, भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश, टीएस ठाकुर ने मई 2016 में कहा था कि भारत को लंबित कानूनी मामलों को निपटाने के लिए 70,000 से अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता है.

उड़ीसा उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, तब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों की कमी और नियुक्तियों में देरी पर चिंता व्यक्त की, जबकि न्याय लोगों का एक मौलिक अधिकार है और सरकार लोगों को इसे देने में देर करने का जोखिम नहीं उठा सकती. उन्होंने कहा कि सरकार को न्याय के देने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए.

 

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