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सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ‘राम की जन्मभूमि’ की स्क्रीनिंग रोकने की याचिका की सुनवाई ठुकराई

तर्कसंगत

March 29, 2019

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उच्चतम न्यायालय द्वारा आज  ‘राम की जन्मभूमि’ फिल्म की स्क्रीनिंग को रोकने की मांग करने वाली एक याचिका की 28 मार्च को आज सुनवाई रोक दी गई. यह फिल्म 29 मार्च को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है और याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत को बताया कि अब फिल्म की स्क्रीनिंग “माहौल को प्रभावित कर सकती है क्यूंकि मध्यस्थता की बातचीत चल रही है.”

 

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई

न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “मध्यस्थता और फिल्म के साथ क्या संबंध है … कोई भी फिल्म मध्यस्थता के रास्ते में नहीं आ सकती है … हम इतने निराशावादी नहीं हैं.” अदालत दो सप्ताह बाद याचिका पर सुनवाई करेगी.

‘राम की जन्मभूमि’ का निर्देशन सनोज मिश्रा ने किया है और यह विवादित राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मुद्दे पर आधारित है.

इसी तरह के एक और मामले की सुनवाई करते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 मार्च को कहा कि संविधान के तहत मिले बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए, लोगों को अधिक सहिष्णु होना होगा. यह बात फिल्म की रिलीज को रोकने की मांग करते हुए दायर एक अपील में आया जिसे याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने दायर किया था. टुसी खुद को मुग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र का वंशज बताता है.

शीर्ष अदालत ने अयोध्या मामले में 8 मार्च को 60 वर्षीय राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को हल करने के लिए एक औपचारिक मध्यस्थता का आदेश दिया था. भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि मामला “मन, हृदय और उपचार – यदि संभव हो”, और संपत्ति के बारे में नहीं था.

मध्यस्थता का संचालन तीन सदस्यीय पैनल द्वारा किया जाएगा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, जस्टिस एफएम कलीफुल्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर शामिल हैं. कार्यवाही को गोपनीय रखा जाएगा और मीडिया में कोई रिपोर्टिंग नहीं होगी.

निर्मोही अखाड़े को छोड़कर अधिकांश हिंदू धार्मिक निकायों ने मध्यस्थता के लिए जाने के सुझाव का विरोध किया है, मुस्लिम धार्मिक निकायों ने मध्यस्थता का समर्थन किया है.

मध्यस्थता के माध्यम से विवाद को हल करने के पहले के चार प्रयास निरर्थक हो चुके हैं.

 

अयोध्या विवाद

अयोध्या विवाद भारत में एक राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक-धार्मिक बहस है. यह उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भूमि के एक भूखंड पर केंद्रित है. भारत में रहने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे अयोध्या मुद्दे ककी जानकारी न हो कुछ न  भी मालूम हो तो इतना मालूम है ही कि जिस जगह को लेकर विवाद चल रहा है वो हिंदूओं के बीच राम का जन्मस्थान माना जाता है, और उसी जगह पर बाबरी मस्जिद का इतिहास भी रहा है, विवाद का मुख्य रूप या ककरण कह लीजिए यह है की मंदिर तोड़ कर किसी ज़माने में वहां मस्जिद बनी थी.

राम जन्मभूमि की बहस 6 दिसंबर, 1992 को शुरू हुई, जब एक भीड़ ने अयोध्या में विवादित 16 वीं सदी की बाबरी मस्जिद को राम का जन्मस्थान होने का दावा किया.उसके बाद भारत ने सबसे क्रूर हिंदू-मुस्लिम दंगों में से एक को अंजाम दिया गया, जिसमें कम से कम 2,000 लोग मारे गए और कई और विस्थापित हो गए.

 

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