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फैक्ट चेक: इसरो के पूर्व प्रमुख और डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख की “यूपीए की राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी” वाली टिप्पणी कितनी सही?

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Image Credits: Economic Times/ Zee News

April 1, 2019

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मिशन शक्ति जैसी सफलता के बाद 27 मार्च को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख  ने कहा कि “मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम की परियोजना 2009 में तैयार हो चुकी थी. तत्कालीन सरकार ने सहमति दी होती तो, हम अब तक मनुष्य को अंतरिक्ष में भेज चुके होते. उस समय स्वदेशी राकेट विकसित करने की एक अन्य परियोजना भी ठंडे बस्ते में डाल दी गयी थी. केवल मोदी जैसे नेता ही ऐसी परियोजनाओं का पालन करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखा सकते हैं.”

बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार उन्होंने आगे कहा कि देश में 2007 में यूपीए सरकार के तहत एंटी-सैटेलाइट मिसाइल की क्षमता थी, लेकिन “कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति” नहीं होने के कारण यह आगे नहीं बढ़ पायी थी.

नायर की टिप्पणी उस वक़्त आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय अभिभाषण में घोषणा की गयी कि भारत ने खुद को एक एंटी-सैटेलाइट हथियार, A-SAT के साथ एक सक्षम अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया है,  स्वदेश निर्मित ए-सैट ने एक Low Orbit Satellite को नष्ट कर दिया जो अंतरिक्ष में 300 किमी की ऊंचाई पर मंडरा रहा था. चीन, रूस और अमेरिका के बाद भारत अब यह चौथा देश बन गया है जिसने इस उपलब्धि को हासिल किया है.

 

इसरो के पूर्व मुख्य टिप्पणी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा सकता है?

इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि जी माधवन नायर, जिन्होंने 2003 से 2009 तक इसरो का नेतृत्व किया और भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के सचिव के रूप में कार्य किया, उन्होनें इस तरह के काम करने वाले देशो की निंदा की थी. जब चीन ने 2007 में एक मिसाइल लॉन्च करके एक पुराने मौसम उपग्रह को नष्ट कर दिया था, तब नायर ने कहा था कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ था और इससे बहुत मात्रा में अंतरिक्ष प्रदूषण होगा.

फिर उन्होंने कहा कि भारत के पास 2007 में एंटी-सैटेलाइट मिसाइल विकसित करने की तकनीक थी. जब चीन ने इस मिशन को पूरा किया, तो उन्होनें चीन के कृत्य की निंदा की और कहा कि किसी भी देश को हथियार बनाकर अंतरिक्ष को कूड़ेदान नहीं बनाना चाहिए.

नायर ने कहा था, “उन्हें (चीन) ऐसा नहीं करना चाहिए था. यह अंतरराष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ है … हम अंतरिक्ष का इस्तेमाल युद्ध के लिए नहीं कर सकते … एक उपग्रह को नष्ट करके, आप केवल मलबे बनाकर अंतरिक्ष को प्रदूषित करते हैं. आज लगभग 8,000 वस्तुएं अंतरिक्ष में हैं. एक उपग्रह को विस्फोट करके, आप कुछ और सौ (वस्तुएं) बनाते हैं. मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया.”

एक विदेशी कंपनी के साथ विवादास्पद उपग्रह सौदे की जांच के बाद, 2011-12 में, यूपीए सरकार ने अंतरिक्ष विभाग को नायर और तीन अन्य अंतरिक्ष अधिकारियों को कोई भी सरकारी नौकरी नहीं देने का निर्देश दिया था. 2016 में, सीबीआई ने नायर और तीन अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की, जिसमें कहा गया कि इस सौदे से सरकारी खजाने को 578 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हालाँकि, अभी तक कोई भी दोषी नहीं हुआ है और नायर ने कहा है कि वह किसी भी गलत काम में शामिल नहीं है.

दिलचस्प बात यह है कि 27 अक्टूबर 2018 को जी माधवन नायर केरल में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए.

 

इसके अलावा पूर्व डीआरडीओ प्रमुख सारस्वत के बयान पर यूपीए सरकार के समय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) रहे शिवशंकर मेनन ने एंटी-सैटेलाइट (ए-सैट) मिसाइल परीक्षण को लेकर हो रहे हंगामे के बीच महत्वपूर्ण जानकारी दी है. उन्होंने द वायर से बातचीत में उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनके मुताबिक मनमोहन सिंह सरकार ने रक्षा एवं अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) को ए-सैट परीक्षण करने की अनुमति नहीं दी थी. खबर के मुताबिक शिवशंकर मेनन ने कहा, ‘मैं पहली बार ऐसा सुन रहा हूं. (वीके) सारस्वत (पूर्व डीआरडीओ प्रमुख) ने कभी भी ए-सैट परीक्षण की अनुमति को लेकर मुझसे नहीं पूछा.’

शिवशंकर मेनन ने कहा कि सारस्वत ने ‘एक अनौपचारिक पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसकी अनुमति या मंजूरी कभी नहीं मांगी’. यह बात इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि 2012 में एक इंटरव्यू में वीके सारस्वत ने खुद बताया था कि पहले वे वास्तविक ए-सैट परीक्षण के पक्ष में क्यों नहीं थे.

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘हम अंतरिक्ष में हथियारों का प्रयोग नहीं करना चाहते, लेकिन इसकी तैयारी होनी चाहिए. क्योंकि ऐसा समय आ सकता है जब आपको इसकी जरूरत पड़े. आज मैं कह सकता हूं (ए-सैट हथियारों के लिए) सभी बिल्डिंग ब्लॉक तैयार हैं. इनमें थोड़ा और सुधार करने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन हम इलेक्ट्रॉनिक तरीके से इसे कर लेंगे. हम कोई वास्तविक परीक्षण (किसी उपग्रह को मिसाइल से उड़ाना) नहीं करेंगे, क्योंकि अंतरिक्ष में इसके अवशेष अन्य उपग्रहों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.’

गौरतलब है कि 2013 में डीआरडीओ प्रमुख के पद से रिटायर होने के बाद वीके सारस्वत को मोदी सरकार में नीति आयोग का सदस्य बनाया गया था. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ए-सैट परीक्षण करने की घोषणा के बाद वीके सारस्वत ने कहा था कि पिछली सरकार ने इस तरह के लाइव टेस्ट की इजाजत नहीं दी थी.

 

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