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समझौता एक्सप्रेस के अभियुक्त की रिहाई पर जज ने एनआईए को पर्याप्त सबूत न देने के लिए फटकार लगायी

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Image Credits: The Times Of India

April 1, 2019

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पंचकूला में 20 मार्च को एक विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अदालत ने 2007 के समझौता एक्सप्रेस मामले में सभी चार आरोपियों – स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी को बरी कर दिया. अदालत ने इस मामले को कई बार पहले टाल दिया था. इसने आज फैसला दे दिया. 2007 में हुए विस्फोट में 10 लोगों सहित 68 लोगों की मौत हो गई थी.

द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में बताय कि फैसला सुनाए जाने के कुछ ही दिन बाद लोगों ने अदालत के फैसले की आलोचना शुरू कर दी, पंचकुला की विशेष अदालत के न्यायाधीश, जिन्होंने निर्णय दिया, उन्होनें एनआईए को पर्याप्त सबूत पेश न कर पाने के कारण आड़े हाथों लिया और फटकार लगायी और विशेष एनआईए की लचर जांच प्रक्रिया को इसका ज़िम्मेदार ठहराया. अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा “सबसे अच्छा सबूत” को “रोक” दिया गया था और अदालत में सबूत के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया था.

उन्होंने आगे कहा कि कुछ गवाहों से तो पूछताछ भी नहीं की गई, जिन लोगों की पूछताछ की गयी , उन्हें अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं करने पर “होस्टाइल” करार दिया गया.

भारत-पाक समझौता एक्सप्रेस लाहौर और अटारी के बीच हर गुरुवार और सोमवार को चलती है. यह 29 किमी की दूरी को कवर करता है और ट्रेन के अंतर्राष्ट्रीय मार्ग में भारत में वाघा और अटारी के बीच 3.2 किमी की दूरी शामिल है. ट्रेन प्रत्येक बुधवार और रविवार को दिल्ली से संचालित होती है.

 

कौन हैं स्वामी असीमानंद?

पश्चिम बंगाल में जन्मे और भौतिकी में स्नातक, असीमानंद कम उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए. उन्होंने 1977 में प्रचारक के रूप में आरएसएस के लिए काम किया.

2006 और 2008 के बीच, बम हमलों की एक श्रृंखला ने भारत के चारों ओर नागरिक लक्ष्यों को मारा. ये हमले प्रकृति में सांप्रदायिक थे और असीमानंद पर इनमें से पांच हमलों की साजिश रचने का आरोप है. हमलों में सामूहिक रूप से 119 लोग मारे गए.

असीमानंद पर 2007 अजमेर शरीफ दरगाह विस्फोट, मक्का मस्जिद विस्फोट, 2006 मालेगांव विस्फोट और 2007 समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट की योजना बनाने का आरोप है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने असीमानंद को 19 नवंबर 2010 को मक्का मस्जिद बमबारी में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

असीमानंद ने 18 दिसंबर 2010 को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने कथित कृत्यों को कबूल किया. उन्होंने कहा कि वह और कुछ अन्य लोग विभिन्न मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर बम विस्फोट में शामिल थे क्योंकि वे हर इस्लामिक आतंकवादी अधिनियम का जवाब “बम के बदले बम” से देना चाहते थे. असीमानंद ने मजिस्ट्रेट को “आतंकवादी हमलों की एक श्रृंखला की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में स्वयं सहित कुछ हिंदुत्व नेताओं की भागीदारी” के बारे में बताया. बाद में, उन्होंने कहा कि ये बयान उनसे दबाव दे कर लिए गए थे.

 

समझौता एक्सप्रेस धमाका क्या है?

18 फरवरी 2007 को, एक विस्फोट ने समझौता एक्सप्रेस को हिला दिया, जिसमें 68 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. यह विस्फोट हरियाणा के पानीपत जिले में दीवाना रेलवे स्टेशन के पास हुआ, जब ट्रेन भारत-पाकिस्तान सीमा पर अटारी की ओर जा रही थी.

इस मामले को शुरू में फरवरी 2007 में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा उठाया गया था, लेकिन बाद में इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया था. शुरू की एक  जांच में निष्कर्ष निकाला गया था कि विस्फोट पाकिस्तानी नागरिकों को मारने के उद्देश्य से किया गया था.

अपनी चार्जशीट में एनआईए ने, नाबा कुमार सरकार उर्फ़ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, लोकेश शर्मा, संदीप डांगे, रामचंद्र कलसांगरा, राजिंदर चौधरी और कमल चौहान को आरोपी के रूप में बताया. जबकि मास्टरमाइंड में से एक, सुनील जोशी 2007 में मृत्यु हो गयी, रामचंद्र कलसांगरा और संदीप डांगे का आज तक पता नहीं लगाया जा सका. स्वामी असीमानंद जमानत पर बाहर हैं. एनआईए ने 290 गवाहों की जांच की और उनमें से 30 होस्टाइल हो गए.

 

 

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