पर्यावरण

पश्चिमी घाट पर 21 लाख पेड़ों को बचाने के लिये कर्नाटक के लोग कर रहे हैं आंदोलन

तर्कसंगत

April 1, 2019

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राजस्थान के बाद, कर्नाटक भारत का दूसरा सबसे सूखा राज्य है. कर्नाटक के उत्तरपूर्वी और मध्य भाग के बड़े हिस्से आधे सूखे हुये हैं. राज्य के 176 तालुकों में से 156 को 2018 में सूखा घोषित किया गया था.

पश्चिमी घाट, जो राज्य में पानी की सहायता करता है, से  65 नदियाँ निकलती हैं भीमा, कलसा भंडुरी, कावेरी, हेमवती, नेत्रवती कुछ ऐसी नदियाँ हैं, जिन्हें यहाँ के वनों से घिरी पहाड़ियों से निकलती है. इन नदियों ने उन लाखों लोगों का पोषण किया है जो अब पीढ़ियों से यहाँ रहते आये हैं. किसानों और शहरवासियों की आने वाली पीढ़ियों के रहने के लिये और हमारी अर्थव्यवस्था को बनाये रखने के लिये, इन पहाड़ियों के पेड़ों को सुरक्षित करना जरुरी है. हाईलेवल वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के पश्चिमी घाट में 20,668 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का क्षेत्र आता है.

लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि पश्चिमी घाट खतरे में है. पूरे कर्नाटक में लगभग 21 लाख पेड़ों को काटने की योजना बनाई जा रही है जिससे विभिन्न रेखीय और नई परियोजनाओं को पूरा किया जा सके. आम आदमी यह कल्पना भी नहीं कर सकता कि भविष्य ने उसके लिए क्या क्या तैयार रखा है.

नीति निर्माता शायद मानव जाति और पेड़ों के बीच गहरे संबंध को समझने में नाकाम रहे हैं. हालांकि समाज को लाभ देने के लिए सरकार लगातार कई परियोजनाओं को शुरू कर रही है लेकिन इस बात  को नजरअंदाज कर दिया गया है कि इतने बड़े पैमाने पर वनों और पेड़ो की कटाई से प्राकृतिक जल स्रोतों पर खतरा जायेगा और वे धीरे धीरे नष्ट हो जायेंगे.

इससे हमारे पर्यावरण पर होने वाले को जानकर, इसके खिलाफ लड़ने के लिए, संयुक्त संरक्षण आंदोलन, नामक एक जन आंदोलन किया जा रहा है जिसका उद्देश्य राज्य के जंगलों की सुरक्षा के लिए जागरूकता करना और लोगों को बिना पानी के एक भयानक भविष्य से बचाने का प्रयास करना है.

 

United Conservation Movement (संयुक्त संरक्षण आंदोलन)

 

इस महत्वपूर्ण विकास में, कर्नाटक के सभी क्षेत्रों के लोगों ने राज्य में होने वाले पानी के संकट को रोकने के लिए एकजुट मंच बनाने के लिए हाथ मिलाया है.

UCM ने एक प्रेस विज्ञप्ति में तर्कसंगत को बतायासंयुक्त संरक्षण आंदोलन का उद्देश्य केवल हमारे पेड़ों और जल स्रोतों को घुसपैठ, बड़ी परियोजनाओं से बचाने के लिए होगा जो हमारे पानी को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं. इसके अलावा, हम सरकार के साथ मिलकर भविष्य की योजनाओं में विकास के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करेंगे. UCM की नींवसेव बांदीपुरअभियान के दौरान राखी गई थी जो अब पश्चिमी घाटों की पवित्रता और संवेदनशीलता को बनाये रखने के लिए रैली कर रहा है.

 

 

पूरे राज्य के नागरिक 23 फरवरी को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में इकट्ठे हुये और UCM का समर्थन किया. प्रेस विज्ञप्ति में बताया गयानागरिकों के साथ, पर्यावरणविद ने कई पारिस्थितिक मुद्दों पर अपने विचारों को साझा किया और भविष्य के लिए पश्चिमी घाट के पेड़ों और पानी की रक्षा करने की योजना पर विचार किया.

 

प्रस्तावित परियोजनायें

सभी प्रस्तावित परियोजनाओं से कुल 21.55 लाख पेड़ प्रभावित होंगे. सिर्फ 5.5 लाख लोगों की आबादी के लिए, पांच राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण कोडागु जिले में होगा, जिससे नौ लाख से ज्यादा पेड़ों को पर ऐसे पड़ेगा. राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण, रेलवे लाइन, सिंचाई और पर्यटन परियोजनाओं के चलते, शिमोगा जिले में 7.23 लाख पेड़ प्रभावित होंगे. रेलवे लाइनों में 10 लाख से अधिक पेड़ों का योगदान है.

इनमें से कई परियोजनाएं महत्वपूर्ण हाथी गलियारों से गुजर रही हैं और राज्य के राष्ट्रीय खजाने जैसे कि कुद्रेमुख, मूकाम्बिका, शरवती और पुष्पगिरि जैसे वन्यजीव के रहने की जगह कम हो रही है. इन परियोजनाओं से लगभग 7.54 लाख पेड़ प्रभावित होंगे जिसमें शिमोगा चार लाख से अधिक पेड़ों के साथ सूची में सबसे ऊपर है.

 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

“वनों की कटाई से पहाड़ी जिलों में भूस्खलन और बाढ़ हो सकती है और जल्दी ही भविष्य में लंबे समय तक सूखा पड़ सकता है जिससे हमारी मिट्टी कमजोर हो जायेगी और पानी रोकने की क्षमता कम हो जायेगी. फसलों की कमी होगी और जानवरों के लड़ाई में बढ़ोत्तरी होगी.” इस ज्ञापन को मुख्यमंत्री  के साथ साझा किया गया है.

 

 

संयुक्त संरक्षण आंदोलन

कर्नाटक के पश्चिमी घाट के पास बेलगाम, कोडागु, शिमोगा, उत्तर कन्नड़ जिलों में रहने वाले लोगों के एक बड़े समूह की ओर से राज्य सरकार के मंत्रियों के ध्यान में लाने के लिए एक मेल भेजा गया जिसमें विभिन्न मुद्दों को उठाया गया और एक अपील भी की गई. इसमें लिखा है “हम कर्नाटक के जल और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करने वाली विभिन्न बड़े पैमाने की परियोजनाओं में 21 लाख से अधिक पेड़ों के विनाश और तबाही से चिंतित हैं. 4 राष्ट्रीय राजमार्गों की लेनिंग हमारे कृषि योग्य क्षेत्रों को विभाजित करने जा रही है और हमारे लिए इन राजमार्गों से गुजरना असंभव है. आपसे अनुरोध है कि संबंधित अधिकारियों को सरकार उचित स्तरों पर परिश्रमपूर्वक चर्चा करने की व्यवस्था करने का निर्देश दें, जिससे प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा और वृद्धि पर तत्काल विचार हो सके.”

 

UCM की अपील

यूसीएम ने अपील की है कि “बचाव के सिद्धांत” का पालन करते हुए, राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए पुराने पेड़ों को कटाने से बचाये जाना चाहिये उन्होंने अपील की है कि फ्लाईओवर के निर्माण को रोकने के लिए एक कानून बनाया जाए, जिससे अन्य पड़ोसी राज्यों को पानी बलि न देनी पड़े. वन्यजीव के रहने की जगहों और राष्ट्रीय उद्यानों से होते हुए राजमार्गों के चौड़ीकरण को रोका जाना चाहिये.

ज्ञापन में अपील के तौर पर कहा गया है “हम इन परियोजनाओं को पर्यावरणीय फायदे के रूप में स्वीकार करते हैं और सार्वजनिक रूप से विकास की रणनीति बनाते हैं. IUCN में सूचीबद्ध पेड़ प्रजातियों के संरक्षण को शामिल करने के लिए कर्नाटक वृक्ष अधिनियम को मजबूत किया जाये. कर्नाटक के सभी पहाड़ी जिलों में एक उच्च स्तर के संरक्षण का अलग कानून हो. विदेशों की भॉँति भूस्खलन वाली जगहों पर दो लेन वाले राजमार्ग बने. सभी पहाड़ी जिलों को पानी को बचाने और ज्यादा नुकसान से रोकने के लिये इन परियोजनाओं से बाहर रखा जाये.”

तर्कसंगत  संयुक्त संरक्षण आंदोलन के साथ खड़ा है और अधिकारियों से उनकी अपील को गंभीरता से लेने का अनुरोध करता है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ जीवन जी सकें.

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