पर्यावरण

चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन अभी भी निरंतर चालू है जिसकी वजह से वहाँ के घड़ियाल विलुप्त हो रहे हैं

तर्कसंगत

Image Credits: Wikipedia

April 2, 2019

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गर्मिया लगभग आ चुकी हैं, और जो लोग देश में नए स्थानों की खोज का आनंद लेते हैं उन्होंने घूमने जाने वाली जगहों और न घूमने जाने वाली जगहों के नाम की लिस्ट बनाना शरू भी कर दिया है. जबकि गोवा काफी लोगो के बीच सबसे पसंदीदा बना हुआ है, चंबल आमतौर पर “स्क्रेप्ड ऑफ/ न घूमने जाने वाली जगहों ” सूचियों में रखा जाता है.

और आप ध्यान दें, वह सभी लोग वन्यजीवों को देखने के इच्छुक नहीं हैं ऐसा नहीं है, लेकिन उन्हें दुःख है कि वह उस क्षेत्र के घड़ियाल को नहीं देख पाएंगे – वह जो उस क्षेत्र में मछली खाने वाला मगरमच्छ है. घड़ियाल असाधारण रूप से लुप्तप्राय हैं और असाधारण संरक्षण मूल्य के यूनिक मगरमच्छ प्रजातियाँ हैं. इसके अलावा, यह भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा दुर्लभ जीव है. और वह अब ज्यादा क्यों नहीं दिखते हैं? क्यूंकि, वह अब लुप्तप्राय जीव के श्रेणी में हैं, लेकिन अवैध खनन की प्रक्रिया में उनके प्राकृतिक आवास का क्षय उनके संकट का प्राथमिक स्रोत है. घड़ियाल के अलावा, इस क्षेत्र के अन्य वन्यजीव कछुए, मगरमच्छ और कई प्रजातियों के पक्षी हैं जैसे फ्लेमिंगो.

 

 

शीर्ष अदालत ने 13 साल पहले अवैध खनन पर रोक लगाई थी

क्षेत्र में अवैध रेत खनन कोई नई बात नहीं है. 2003 से क्षेत्र में अवैध खनन चालू था. हालांकि, इस दृष्टिकोण से क्षेत्र में अवैध खनन के मुद्दे पर, सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत खनन पर प्रतिबंध लगा दिया. हालांकि, प्रतिबंध के लगभग 13 साल बाद भी ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में अवैध खनन जारी है. वर्षों से, इन गतिविधियों को रोकने में नाकाम रहने वाले पुलिस के केस सामने आए हैं. इन अवैध खनन का संचालन करने वाले लोगों को “रेत माफिया” कहा जाता है, और वर्षों से, वह प्रशासन से कम ही डरते हैं. वन अधिकारियों और पुलिस पर हमला करने से माफियाओं ने खुद को कभी नहीं रोका है. इस प्रक्रिया में कई लोगों की जान चली गई है. 2012 में, एक आईपीएस अधिकारी की हत्या कर दी गई थी, जबकि कई अधिकारियों के साथ मारपीट भी की गई थी.

 

 

चुनाव के लिए खनन रुका

पर्यटकों में से एक ने तर्कसंगत को बताया, चम्बल नदी पर यात्रा करते समय नदी के किनारों पर अवैध खनन जिस हद तक हो रहा है वह बहुत घातक है. उन्होंने कहा, “बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ खोदने वालों को किनारे पर रखा गया है”. घड़ियालों के प्रजनन के मौसम के बारे में उन्होंने कहा कि, घड़ियालों में प्राकृतिक प्रजनन की कम दर होती है, और खनन होने के कारण उनके अंडों को नुकसान होता है. जिससे उनकी संख्या और कम होती जा रही है”

चल रहे अवैध खनन की पुष्टि करने के लिए, तर्कसंगत ने क्षेत्र के वन अधिकारी से संपर्क किया. अपना नाम न बताने के शर्त पर अधिकारी ने यह पुष्टि की, कि नदी से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों की तरफ से खनन चालू है. हालांकि, उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों के कारण दोनों तरफ अवैध खनन की गतिविधियां अभी रुक गई हैं.

खैर, यह बहुत संभावना है कि चुनाव संपन्न होने के बाद खनन को फिर से चालू किया जाएगा.

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