मेरी कहानी

मेरी कहानी: हर कोई आपसे खुश नहीं होगा, लेकिन एक दिन आएगा जब कोई आपके काम की कद्र करेगा

तर्कसंगत

April 2, 2019

SHARES

मेरा ज़िन्दगी गवर्नमेंट होस्पिटल के एक इंटर्न के रूप में एक ही ढ़र्रे पर चल रही थी जहाँ सोना, पढ़ाई, काम करना और अगले दिन उसी को दोहराना होता था. हमें लंबे ड्यूटी आवर्स, भारी भीड़, शिकायत करने वाले रिश्तेदार और यहां तक ​​कि स्थानीय राजनेता के हस्तक्षेप का भी सामना करना पड़ता था. लोग अक्सर गलत व्यवहार करते थे इसलिए यह बहुत निराशाजनक था.

लेकिन एक खास दिन ने मुझे हमेशा के लिए बदल दिया.

80 के उम्र के आसपास की एक महिला, हमारे व्यस्त इमरजेंसी रूम में एक खूनी कपड़ा लेकर आई थी, जो उसके हाथ में लिपटा था. मैं जल्दी से उनके पास गया, उनकी एक अंगुली को पूरी तरह से मसल गई थी और उसका उपचार मुमकिन नहीं था. मैंने कहा कि संक्रमण फैलने से रोकने के लिए हमें उनकी उंगली का हिस्सा हटाना पड़ेगा. उन्होंने केवल दर्द महसूस न हो ऐसा करने के लिए कहा. 

मेरे लिए एक मामूली प्रक्रिया, लेकिन उसके निम्नलिखित शब्दों ने मुझे हमेशा के लिए प्रेरित किया:

“बेटा भगवान सबको तुम्हारे जैसा डॉक्टर बनाये”, उन्होंने  मेरे सिर को धीरे से छूते हुए कहा.

और पांच साल पहले, के उस एक पल में मैं समझ गया.

हर कोई आपसे खुश नहीं होगा, लेकिन एक दिन आएगा जब कोई आपके काम की कद्र करेगा. वह मेरा दिन था.

 

कहानी: माशूक़ अली

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...