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सर्वेक्षण : शहरी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों का एक तिहाई भाग, राजनीतिक दृष्टिकोण के विरोध में किसी के साथ भी बातचीत नहीं करता

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Image Credits: Navodaya Times

April 2, 2019

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यदि आपको लगता है कि किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बातचीत करना जो विरोधी राजनीतिक दृष्टिकोण रखता है, व्यर्थ है, तो आपको पता होना चाहिए कि आप अकेले नहीं हैं. Scroll.in की रिपोर्ट के अनुसार हाल ही के एक सर्वेक्षण के अनुसार, यह पता चला है कि देश के शहरी हिस्सों में रहने वाले अधिकांश भारतीय, दुनिया में सबसे अधिक राजनीतिक रूप से विभाजित लोगों में से एक हैं.

दुनिया भर में, पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय बाजार अनुसंधान की कंपनी इप्सोस द्वारा बीबीसी के लिए किए गए सर्वेक्षण में बताया गया है कि लगभग 24% लोगों का मानना ​​है कि राजनीतिक विचारों का विरोध करने वाले के साथ बातचीत करने का फायदा नहीं. हालाँकि, भारत में यह आंकड़ा 35% पाया गया. सर्वेक्षण के अनुसार, 35% उत्तरदाताओं ने यह सहमति व्यक्त की, कि राजनीतिक विचारों का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति के साथ बातचीत नहीं करना पसंद करेंगे.

 

सर्वेक्षण

यह सर्वेक्षण ऑनलाइन पैनल के माध्यम से किया गया था, जिसमें 27 नवंबर से 7 दिसंबर तक 27 देशों के 20,000 लोग शामिल थे. इस सर्वेक्षण में भाग लेने वाले भारतीय ज्यादातर शहरी क्षेत्रों के थे. वह ज्यादातर शिक्षित और संपन्न थे, जैसा संगठन का कहना था. सर्वेक्षण में शहरी भारतीयों के बीच भी इसी तरह की संभावना पाई गई, जिसमें कहा गया था कि लगभग 44% भारतीयों का सर्वेक्षण जिसमे वह विभिन्न राजनीतिक विचार रखते हैतो ऐसे लोग, लोगों की परवाह नहीं करते है”. यह वैश्विक औसत 31% से अधिक है जो इस बात को मानते हैं. एक और चौंकाने वाली बात जिसमे उन्होंने कहा कि 43% भारतीयों का मानना ​​है कि उनके राजनीतिक विरोधी, देश के भविष्य की परवाह नहीं करते हैं, जो विश्व स्तर पर 28% उत्तरदाताओं के विपरीत था. भारत तुर्की के बाद दूसरा स्थान रखता है जिसने 46% उत्तरदाताओं को अपने बयानों से सहमत देखा.

 

सोशल मीडिया ने सभी तरह की रूकावटे दूर कर दी

हालांकि, यह जानकर हैरानी होती है कि भारतीयों के साथ अन्य लोगों की तुलना में अलग-अलग विचारों वाले लोगों के जुड़ने की संभावना अधिक थी. सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लगभग 56% लोगों ने कहा कि वह कम से कम सप्ताह में एक बार राजनीतिक विचारों का विरोध करने वाले लोगों के साथ बातचीत करते हैं. विश्व स्तर पर 35% लोग ऐसा करते हैं. निस्संदेह, सोशल मीडिया इस देश के नागरिकों द्वारा आवाज उठाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक रहा है. सर्वेक्षण में पाया गया कि 63% भारतीय उत्तरदाताओं ने कहा कि सोशल मीडिया जनता और सत्ता के लोगों के बीच बाधाओं को तोड़ने में मदद कर रहा है. जब विश्व स्तर पर तुलना की जाती है, तो यह आंकड़ा 44% था.

आम चुनाव के साथ, यह काफी उम्मीद है कि राजनीतिक ध्रुवीकरण अधिक सक्रिय हो जाएगा.

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