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अब से भारतीय सेना के विदेशी मिशनों में महिला अधिकारीयों को भी शामिल किया जायेगा

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Image Credits: India Today(Representational)

April 2, 2019

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भारत ने पहली बार अपने विदेशी मिशन में महिला अधिकारियों को पोस्ट करने का फैसला किया है. तीनों सेवाओं को उन महिला अधिकारियों की पहचान करने के लिए कहा गया है, जो इन पदों पर काम कर सकती हैं. सरकार ने यह फैसला साल के शुरुआत में लिया था. यह कदम रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लिया गया है.

 

यह मौका ख़ास है

सूत्रों के अनुसार, फर्स्ट वीमेन ऑफिसर्स अगले “रोटेशन” पर बाहर जाने में सक्षम होंगी. हाल के वर्षों में, भारत की रक्षा और सुरक्षा में वृद्धि के साथ, इस तरह के नियम से सेना की नौकरी ने बहुत अधिक महत्व प्राप्त कर लिया है. प्रमुख देशों के साथ, भारत की राजनयिक भागीदारी में यह रक्षा कूटनीति का हिस्सा है.

रक्षा कूटनीति से काफी हद तक नौसेना को संरक्षण मिला है, हालांकि, मोदी सरकार में यह और भी अधिक व्यापक रूप से लिया गया है. भारत के रक्षा निर्यात के लिए, यह कदम नए बाजारों को खोलने की क्षमता भी रखता है.

 

रक्षा मंत्रालय द्वारा इस महीने की शुरुआत में घोषणा की गई थी कि भारतीय सेना की दस शाखाओं में महिलाओं को स्थायी कमीशन मिल सकता है. शाखाओं में सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कॉर्प, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स और इंटेलिजेंस शामिल हैं. महिलाएँ अब सभी भारतीय वायुसेना शाखाओं में भी सेवा दे सकती हैं, जिनमें लड़ाकू पायलट भी शामिल हैं. नेवी द्वारा महिलाओं के लिए नॉन-सी गोइंग स्पेशलाइजेशन खोले गए हैं. इस महीने की शुरुआत में, रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि महिला नाविकों को समुद्री यात्रा की भूमिकाओं में भविष्य के लिए नए “प्रशिक्षण जहाजों” से प्रशिक्षित किया जाएगा.

समय के साथ, देश में महिलाएं कई क्षेत्रों में पुरुषों की तुलना में या अक्सर बेहतर साबित हुई हैं. भारत में कई प्रतिष्ठित राजनयिक, राजदूत और यहां तक कि विदेशी सचिव भी रहे हैं, लेकिन रक्षा के क्षेत्र का पद हमेशा से पुरुष प्रधान रहा है. यह कदम देश में समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.

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