पर्यावरण

क्रेयॉन का एक बॉक्स पर्यावरण और संतुलित विकास के बारे में आपको बहुत कुछ सिखा सकता है

तर्कसंगत

Image Credits: The Indian School(Representational)

April 3, 2019

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टिकाऊ जीवन के बारे में पर्याप्त बातचीत हुई है. हमने अपनी विकसित होती जरूरतों के अनुरूप समय के साथ बहुत कुछ विकसित किया है. प्रगति की सड़क पर बहुत सारे संसाधनों का उपयोग किया जाता है. हालांकि, संसाधन सीमित हैं. दिन-प्रतिदिन हमारी जरूरतों में वृद्धि के साथ, जिस दर पर हम संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं, उसमें वृद्धि भी हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी कमी हो रही है.

अगर हम इस रास्ते पर चलते रहें, तो यह कहना बहुत दूर नहीं होगा कि हम अपने सभी संसाधनों को समाप्त कर सकते हैं. हमारी आने वाली पीढ़ियां तब कैसे रहेंगी? इस मोड़ पर, हमें अपने कार्यों पर पुनर्विचार करना चाहिए और टिकाऊ जीवन को अपनाना चाहिए.

एक स्कूल शिक्षक ने अपने छात्रों को यही बताने के लिए एक आदर्श उदाहरण का उपयोग किया:

एक दिन, एक स्कूल शिक्षक ने अपने स्कूल के छात्रों को एक छोटी सी एक्टिविटी के लिए बुलाया. इन छात्रों को तब दो समूहों में विभाजित किया गया. एक समूह में 12 वर्ष और उससे अधिक आयु के छात्र शामिल थे. अन्य समूहों में प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे थे.

सबसे पहले, बड़े बच्चों के समूह को शिक्षक द्वारा बुलाया गया. उन्होने उन्हें जो कुछ भी महसूस कर रहे हो, उसका चित्र बनाने के लिए कहा. उन्हें ड्राइंग शीट और आकर्षक रंगों का संग्रह प्रदान किया गया. बच्चे तुरंत ही काम पर लग गए. लेकिन इससे पहले कि वे शुरू करते, शिक्षक ने उनके सामने एक छोटी सी पर महत्वपूर्ण शर्त रखी. उन्हें बताया गया था कि वे जितने रंगों का उपयोग करना चाहते थे, कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इस तथ्य को ध्यान में रखना चाहिए कि जो भी रंग वे उपयोग करते हैं, अगले समूह द्वारा उपयोग नहीं किया जा सकता है. इसलिए, उन्हें अत्यंत संयम से उपयोग करना होगा.

शुरुआत में, बच्चों ने सावधानीपूर्वक, रंगों का उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से किया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, सावधानी नहीं बरती गयी. वे जितने हो सके उतने रंग का उपयोग कर सुंदर चित्र बनाने का प्रयत्न करने लगे. अंत में, समूह का प्रत्येक बच्चा सुंदर, रंगीन चित्र के साथ आया.

इसके बाद अगले समूह की बारी आई. छोटे उम्र वाले छात्र और भी उत्साहित थे. उन्होंने भी बचे हुए रंगों से अपनी योग्यता दिखने की कोशिश की. हालांकि, परिणाम वैसा नहीं था जैसा वे चाहते थे. तस्वीरों में सिर्फ भूरा, काला और ग्रे था. वे बेजान और सुस्त लग रहे थे. ऐसा इसलिए था क्योंकि सभी चमकीले रंगों का उपयोग दूसरे समूह द्वारा पहले ही कर लिया गया था.

इस एक्टिविटी के बाद शिक्षक ने छात्रों को संबोधित किया. उन्होने कहा, “रंग पृथ्वी पर हमारे पास मौजूद संसाधन हैं. यह हमें इस धरती पर जीवित रखने के लिए पर्याप्त है, लेकिन फिर भी, हम मनुष्य लालची हो जाते हैं और उनका अत्यधिक उपयोग करते हैं, यह समझकर नहीं कि हमारी बाद की पीढ़ी के पास कुछ नहीं होगा यदि हम इतने ही लापरवाह हो गये तो”

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