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स्मार्ट सिटी के लिए स्मार्ट एलोकेशन नहीं है ? वचन दिए गए 500 करोड़ के मुकाबले शहरों को एवरेज 125 करोड़ मिले हैं  

तर्कसंगत

Image Credits: Competitiveness/Hindustan Times

April 3, 2019

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एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि केंद्र सरकार द्वारा अपने स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत चुने गए शहरों को केवल 13,846.2 करोड़ रुपये दिए थे. दिसंबर 2018 तक यह औसत 125 करोड़ रुपये प्रति शहर है. इस जवाब को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने प्रदान किया है.

एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने द हिंदू को बताया कि वेबसाइट के अनुसार, स्मार्ट सिटीज मिशन के लिए परियोजना की कुल लागत 2,03,172 करोड़ रुपये थी. उन्होंने कहा कि इसकी मौजूदा गति को देखते हुए इस परियोजना को वास्तविकता से बनने में कई दशक लग सकते हैं.



110 शहरों के लिए एलोकेशन और ब्रेक अप

कार्यकर्ता पीपी कपूर द्वारा 29 नवंबर, 2018 को आरटीआई दायर की गई थी. मंत्रालय के उत्तर के अनुसार, सरकार को परियोजना के तहत पांच वर्षों में प्रति शहर लगभग 500 करोड़ रुपये अलॉट करने थे. इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार समान अमाउंट अलॉट करे वैसा एक्सपेक्टेड था.

विशेष रूप से, इन शहरों में से लगभग एक-तिहाई को प्रत्येक को 100 करोड़ रुपये से कम अलॉट किये गए हैं, जबकि इन 11 शहरों में प्रत्येक को केवल 2 करोड़ रुपये मिले हैं. पश्चिम बंगाल में दुर्गापुर, हल्दिया, बिधाननगर; उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद, आगरा और रामपुर; तमिलनाडु में डिंडीगुल; मेघालय में शिलांग; और  महाराष्ट्र में अमरावती और ग्रेटर मुंबई , उन शहरों में से थे जिन्हें प्रत्येक को सिर्फ 2 करोड़ रुपये मिले थे.

मंत्रालय के स्मार्ट सिटी-डिवीजन 1 ने कहा कि 2016 में परियोजना के लिए लगभग 60 शहरों को चुना गया था, 2017 में 30 और 2018 में 10. लेकिन विभाग ने अपने जवाब में 110 शहरों के लिए ब्रेक-अप प्रदान किया.

“परियोजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा अब तक अलॉटेड कुल धन अनुमानित लागत का लगभग 7% है. इसलिए, यह भाजपा का एक और झूठा वादा है, जो सच्चाई से बहुत दूर है.” कपूर ने कहा.



स्मार्ट सिटी क्या है?

पहला सवाल यह है कि ‘स्मार्ट सिटी’ का क्या मतलब है. जवाब है, स्मार्ट शहर की कोई सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत परिभाषा नहीं है. इसका मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग चीजें हैं. इसलिए, स्मार्ट सिटी का कन्सेप्ट शहर और देश, विकास के स्तर, परिवर्तन और सुधार, संसाधनों और शहर के निवासियों की आकांक्षाओं के आधार पर बदलती है. एक स्मार्ट शहर का भारत में यूरोप की तुलना में एक अलग अर्थ होगा. भारत में भी, स्मार्ट सिटी को परिभाषित करने का कोई एक तरीका नहीं है.

मिशन में शहरों का मार्गदर्शन करने के लिए कुछ निश्चित सीमाओं की आवश्यकता होती है. भारत में किसी भी शहर के निवासी की कल्पना में, एक स्मार्ट शहर की तस्वीर में बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं की इच्छा सूची होती है जो उसकी आकांक्षा के स्तर का वर्णन करती है. नागरिकों की आकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने के लिए, शहरी नियोजक आदर्श रूप से संपूर्ण शहरी इको-सिस्टम को विकसित करने का लक्ष्य रखते हैं, जिसका प्रतिनिधित्व व्यापक विकास-संस्थागत, भौतिक, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के चार स्तंभों द्वारा किया जाता है. यह एक दीर्घकालिक लक्ष्य हो सकता है और शहर ऐसे व्यापक बुनियादी ढांचे को विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं, जो ‘स्मार्टनेस’ की परतों को जोड़ते हैं.

स्मार्ट सिटीज मिशन के दृष्टिकोण में, उद्देश्य उन शहरों को बढ़ावा देना है जो कोर बुनियादी ढांचा प्रदान करते हैं और अपने नागरिकों को एक स्वच्छ और टिकाऊ वातावरण और ’स्मार्ट’ समाधानों के उपयोग के लिए जीवन की एक सभ्य गुणवत्ता प्रदान करते हैं. स्थायी और समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है और विचार है कि कॉम्पैक्ट क्षेत्रों को देखें, एक प्रतिकृति मॉडल बनाएं जो अन्य महत्वाकांक्षी शहरों के लिए एक प्रकाश स्तंभ के रूप में कार्य करेगा.

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