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रिपोर्ट : वित्तीय वर्ष 2018-19 में 14 साल में सबसे खराब फ्रेश इन्वेस्टमेंट प्रपोजल रहा

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Image Credits: ABP

April 4, 2019

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सीएमआईई द्वारा 1 अप्रैल को जारी किए गए एक नए डेटा से पता चलता है कि फ्रेश इन्वेस्टमेंट प्रपोजल में एक नया बदलाव आया है. वित्त वर्ष 2018-19 में देश में मुश्किल से 9.5 ट्रिलियन का निवेश हुआ है. यह 2004-05 के बाद से एक वर्ष में अब तक का सबसे कम इन्वेस्टमेंट प्रपोजल है.

 

चिंताजनक आंकड़े

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले हफ्तों में 9.5 ट्रिलियन रुपये के अनुमान को संशोधित किया जाएगा, हालांकि, वर्ष 2018-2019 में नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश संघर्ष कर रहा है. यह गिरावट का सिलसिला 2015-16 में शुरू हुआ जो लगातार चौथे वर्ष 2018 -2019 में भी खराब प्रदर्शन कर रहा है.

2006-07 से 2010-2011 की अवधि के दौरान, देश के फ्रेश इन्वेस्टमेंट प्रपोजल ने औसत ताजा निवेश को बढ़ाकर 25 ट्रिलियन रुपये प्रति वर्ष कर दिया था. इसके तुरंत बाद, फ्रेश इन्वेस्टमेंट प्रपोजल 2013-14 तक 10 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया. 2014 में मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद परिदृश्य बदल गए. वित्तीय वर्ष 2014-2015 में, निवेश प्रस्ताव काफी कम समय में 21 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया.

हालांकि, अगले वित्त वर्ष 2015-2016 में निवेश प्रस्तावों में 1 ट्रिलियन रुपये की गिरावट फिर से आई. फ्रेश इन्वेस्टमेंट प्रपोजल में यह अचानक वृद्धि थोड़े समय के लिए ही थी.

 

निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को नुकसान उठाना पड़ा

दो अवधियों (2006-11 और 2014-16) में निवेश की तुलना करने पर, निवेश में निजी क्षेत्र की भूमिका नोट की जा सकती है. उदाहरण के लिए, 2014-2016 में 47% की तुलना में फ्रेश इन्वेस्टमेंट प्रपोजल में निजी क्षेत्र की औसत हिस्सेदारी 2006 -11 में 62% थी. इस आंकड़े के माध्यम से, एक व्यक्ति आसानी से यह समझ सकता है कि निजी क्षेत्र और सरकारी क्षेत्र कभी साथ साथ नहीं बढ़े. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि 2018-19 में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 67.5% के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई, लेकिन निजी क्षेत्र के निवेश प्रस्तावों में से एक/पांचवां का हिस्सा लगभग अवरुद्ध है.

यद्यपि सार्वजनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी निजी की तुलना में अधिक है, 2018-19 में नए निवेश प्रस्तावों का कम मूल्य ध्यान देने योग्य है. वर्ष 2018-2019 के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र ने 3 ट्रिलियन रुपये की परियोजनाओं की घोषणा की. सरकार (सार्वजनिक क्षेत्र) के प्रस्तावों में गिरावट ने बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों पर बुरा असर डाला है. पिछले दो वर्षों में सर्विस सेक्टर गंभीर रूप से 51% से गिरकर 2018-19 में 39% हो गया है, जिससे सड़क क्षेत्र में निवेश के प्रस्ताव घट गए हैं. रेलवे क्षेत्र भी खराब निवेश के चंगुल से बाहर नहीं निकल सका है.

 

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