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यह विंग कमांडर और उनकी टीम, सोशल मैसेज के साथ पुणे की दीवारों को रंग रहे हैं

तर्कसंगत

April 4, 2019

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2 अक्टूबर 2014 को, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की आह्वान/शुरुवात किया. पुणे के विंग कमांडर(रिटायर्ड/सेवा निर्वृत) पुनीत शर्मा, जो 14 जून, 1989 को एयरफोर्स में शामिल हुये थे, उनका मानना है कि इस तरह की पहल तभी सफल होगी जब सभी नागरिकों की इसमें सक्रिय भागीदारी होगी.

स्वच्छ भारत अभियान, नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू करने वाला एक अभियान है, जिसका उद्देश्य साल 2014 से साल 2019 के बीच शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देश की सड़कों, गलियों और बुनियादी ढांचे को साफ करना है.

9 अक्टूबर, 2014 की रात में, पुनीत ने एक फेसबुक स्टेटस/पोस्ट अपडेट किया, जिसके माध्यम उन्होंने अपने दोस्तों से आग्रह/निवेदन किया कि वह उनके साथ इस अभियान में जुड़े और पुणे को एक स्वच्छ, हरियाली और बेहतर शहर बनाने के लिए मिलकर साथ में प्रयास करते है.

19 अक्टूबर 2014 को, अभियान पर पुनीत का फेसबुक पेज अस्तित्व में आया और उन्होंने, पहले और बाद की तस्वीरों के साथ कहानियों बनाते हुए पोस्ट करना शुरू कर दिया’. उन्होंने गलती करने वाले व्यक्तियों को खोजना शुरू कर दिया और फिर उन्हें समझने का प्रयास किया. आने वाले अगले कई रविवार को, उन्होंने विक्रेताओं और यात्रियों को समान रूप से जागरूक करने के कई प्रयास किए. उन्होंने सभी प्रमुख स्टेशनों और बस स्टॉप का भी दौरा किया.

 

स्वच्छ पुणे – स्वच्छ भारत (SPSB)

प्रारंभ में, शहर की विभिन्न पहाड़ियों पर सभी सफाई गतिविधियों में प्लास्टिक के कचरे को बोरों में भर कर, उन्होंने पॉली ईंधन में परिवर्तित करने के लिए रुद्र एनवायरनमेंटल सलूशन को देना शुरू कर दिया. उन्हें देखकर, कई मॉर्निंग वॉकर्स ने इन गतिविधियों में योगदान देने के लिए उनके साथ काम करना शुरू कर दिया.

पहाड़ियों, पार्कों और नहरों की सफाई के साथ जो शुरू हुआ, वह अब बहुत बड़ी परियोजना में बदल गया है. शहर की सफाई के अलावा, समूह अब पुणे भर में, अलग अलग जगह की दीवारों पर चित्रों के माध्यम से विभिन्न संदेशों को फैलाने का प्रयास कर रहा है.

स्वच्छ पुणे – स्वच्छ भारत सिर्फ एक स्वच्छ शहर के बारे में नहीं है, बल्कि एक अधिक सुंदर, ज्यादा खुशहाल शहर के बारे में है.

 

दीवारों पर चित्रकारी

पुनीत शर्मा के नेतृत्व में, उनकी टीम शहर की दीवारों पर पेंटिंग करती है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है. अब साथ में, पेशेवर और गैर-पेशेवर लोगो ने आगे आकर विमन नगर हवाई अड्डे की दीवारों, मगरपट्टा फ्लाईओवर, पुणे स्टेशन, शिवाजीनगर स्टेशन, और कल्याणी नगर की दीवारों जैसे स्थानों में पूर्ण बदलाव कर दिया था.

वालंटियर्स में से, अश्विनी जगताप ने तर्कसंगत के साथ बातचीत में कहा, “पेंटिंग कार्य के अलावा, हम वृक्षारोपण और सफाई अभियान चलाते हैं. हमने हजारों गणेश मूर्तियों को जल में विसर्जित न करके, उन्हें रीसाइक्लिंग के लिए भेजा. हमने हाल ही में आशा स्कूल की दीवारों को चित्रित किया है, जिसमें स्कूल में एक इनडोर स्विमिंग पूल की दीवारें भी शामिल हैं. हम जो कुछ भी करते हैं उसके लिए पैसे नहीं लेते हैं. हमारा मानना ​​है कि किसी को तो शुरुआत करनी ही होगी. किसी को तो पहला कदम उठाना ही होगा. तो, वह शुरुवात हम ही क्यों नहीं कर देते है?

 

 

चित्र, हालांकि, रैंडम/बिखरे विचार वाले चित्र नहीं हैं. यह सभी मजबूत सामाजिक संदेश देते हैं. वह दूसरों के बीच बाल श्रम, प्रदूषण, महिला सशक्तिकरण के बारे में संदेश देते हैं.

हम वीकेंड्स/साप्ताहिक छुट्टियों में काम करते हैं, लेकिन हमारा काम पूरी तरह से स्वैच्छिक है. किसी को कभी काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है. हम अपने चित्रों के माध्यम से जागरूकता को बढ़ावा देते हैं. मैं उन चित्रकारों में से खुद एक हूं, लेकिन मैं इसे केवल इसलिए करता हूं क्योंकि यह मेरे लिए एक शौक है. अक्षय सूर्यवंशी ने कहा, “मैं एक पेशेवर चित्रकार नहीं हूं, वह एक आईटी कंपनी में काम करते है. सभी वालंटियर्स अलग-अलग क्षेत्र से आते हैं और उनके पास विभिन्न कार्य-क्षेत्र का अनुभव होता हैं. लेकिन सामाजिक कार्य होने की वजह से, यह सभी को एक-दूसरे के साथ जोड़कर रखता है.

प्रवीण पंडित राव चंदन, वह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम करते है, उन्हें पेंटिंग/चित्रकारी बचपन से ही बहुत पसंद थी, लेकिन वह इसे एक पेशे के रूप में जारी नहीं रख पाये. उन्होंने कहा, “मुझे पेंटिंग करना बहुत पसंद है, और यह मेरे लिये एक बोनस की तरह है, जब मुझे अपने काम के माध्यम से महत्वपूर्ण संदेश फैलाने का अवसर मिलता है. पुणे स्टेशन, विशेष रूप से, एक ऐसी जगह थी जो हमेशा राहगीरों से भरी हुई रहती थी. लोग दीवारों पर थूकते थे. लेकिन जब से हमने दीवारों को चित्रित कर दिया है, इस तरह की गतिविधियों में काफी कमी आई है.जो की एक पेंटिंग की ताकत है जिसकी वजह से यह संभव हुआ है. एक पेंटिंग एक हजार शब्दों बयां करती है”.

 

 

निलांजना रॉय पेशे से एक टेक्नीकल कम्यूनिकेटर है और जुनून से एक कलाकार हैं. सप्ताह के दिनों /वर्किंग-डेज में, वह एक प्रतिष्ठित बैंक के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर में काम करती है, और वीकेंड्स/छुट्टी के दिनों में वह एक स्ट्रीट चित्रकार होती है.

SPSB समूह की क्रिएटिव टीम में एक वालंटियर के रूप में, नीलांजना डिजाइनर टीम के साथ काम करती है, ताकि वह उस विषय की योजना बना सके और उस संदेश की परिकल्पना कर सके, जिसे उनके समूह के प्रमुख विंग कमांडर पुनीत शर्मा द्वारा चुने गए किसी भी स्थान पर चित्रित करने की आवश्यकता होती है.

स्वच्छ पुणे में मेरी भागीदारी – एक वालंटियर के रूप में स्वच्छ भारत समूह की पहल में जुड़ना, मेरे लिये एक संयोग के साथ शुरू हुआ, लेकिन बाद में मैंने इसे अपनी पसंद से जारी रखा. मैंने पुणे मेगा कैनवस प्रोजेक्ट के पहले दिन में भाग लिया – एक ऐसी पहल जिसमें विमन नगर एयरपोर्ट रोड के पर 1.5 किमी की दीवार पर चित्रकारी करना शामिल था – काम पर कलाकारों की मदद करने की उम्मीद से और उनके साथ काम वाले एक साथी की भांति मैंने उस प्रोजेक्ट को ख़त्म किया. उन्होंने आगे बताया, कि तबसे यह हमारी टीम हमेशा एकत्रित हो जाती है, जब भी पुणे के कुछ सुनसान कोने को रोशन करने के लिए हमारे पास बुलावा आता है और हम अपने कार्य के द्वारा एक सार्थक और रंगीन संदेश देने की कोशिश करते है.”

एक पेंटिंग प्रोजेक्ट के लिए दृष्टिकोण की योजना बनाने से लेकर, रेखा चित्र बनाने में, बड़ी संख्या में वालंटियर्स शामिल होते हैं, जिसमे युवा और उत्सुक वालंटियर्स को रंग बनाने से लेकर, उनका काम निर्धारित करने के लिए और उनके द्वारा निभाने वाली जिम्मेदारियों को तैयार करना पड़ता है.

नीलांजना ने आगे कहा, “जब कोई समाज को कुछ वापस दे सकता है, जिसे वह पूरी लगन से ईमानदारी के साथ करता है, तो समाज के लिये इससे ज्यादा और क्या हो सकता है?” यह एक उपहार के रूप में कुछ भी नहीं है जो समाज को वापस देता है और इसके परिणाम बेहद संतोषजनक है. जब शहर ही आपका कैनवास हो, तो गैलरी की आवश्यकता किसे है? एक कलाकार को तो बस रंग करने के लिए एक दीवार दें दीजिये और उन्होंने इस पर ज़ोर देते हुए कहा कि वह शहर को अच्छे से रंग देगी.”

 

 

विंग कमांडर पुनीत शर्मा, जो समूह का नेतृत्व करते हैं, उन सभी के लिए एक प्रेरणा है.

पुनीत शर्मा हमारे लिये एक रोल मॉडल हैं और उनकी मिलिट्री बैकग्राउंड और उनके केंद्रित उद्देश्यों के साथ, हम सभी विभिन्न समुदायों, संस्कृतियों से होने के बावजूद भी एक साथ बंधे हुए हैं, जो समाज के लिए कुछ अच्छा करने के लिए, एक ही मकसद के साथ हैं. आशुतोष सदानंद दीक्षित ने कहा, जो की एक टेलीकॉम सेवा उद्योग में एक प्रोडक्शन मैनेजमेंट टीम को लीड करती है, “चूंकि विभिन्न आयु वर्ग के लोग और अलग-अलग पेशे के लोग एक साथ आते हैं, तो हमें बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है, और जिससे हम एक बेहतर इंसान बनते हैं.”

 

क्या कहना है टीम लीडर पुनीत शर्मा का

पुनीत शर्मा, इस प्रमुख पहल के पीछे, जो की सभी के लिए एक रोल मॉडल है, वह कहते है हमें यह विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है कि हम एक सामाजिक कारण के लिए काम कर रहे हैं, समाज के अधिक अच्छे के लिए, न केवल सम्मान या अपनी संतुष्टि अर्जित करने के लिए. रविवार की सुबह जल्दी उठना, निश्चित रूप से आसान नहीं है, जो हम में से ज्यादातर लोग सोते हुए खर्च करते हैं, और उसी जगह पर हम जैसे लोग, इस तरह के बड़े पैमाने पर प्रयास करने के लिए एक साथ आते हैं.

 

 

तर्कसंगत से बात करते हुए, पुनीत शर्मा ने कहा, “विशेष रूप से सरकारी संपत्तियों की सभी दीवारें अनदेखा कर दी गयी हैं. अगर बात प्रमुख समस्या की, की जाये तो वह है पान के दाग और अवैध पोस्टर हैं . अपने प्रयास में, हमने पुणे में कई सार्वजनिक स्थानों पर एक खूबसूरत मेकओवर देने की कोशिश की है, चाहे वह वर्ली कला, मगरपट्टा फ्लाईओवर हो या आरटीओ भवन या शहर में कोई बस स्टॉप हो. इसने हमें लोगों को फिर से कूड़ा फ़ैलाने से रोकने में मदद की है. इन आयोजनों ने हमारी सभी आयु समूहों के साथ भाग लेने में मदद की है, जिससे स्वच्छ भारत के उद्देश्य के प्रति सभी का झुकाव बढ़ रहा है.”

किसी के जीवन में समय सबसे ज्यादा कीमती चीज है. इस तरह से एक मूल्यवान कारण के लिए निस्वार्थ भाव से समय देना, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. यह कई लोगों के लिए बहुत मुश्किल है लेकिन हमारी टीम के लिए, कुछ भी असंभव नहीं है. बिना रुके हुए साढ़े चार साल लगातार तक काम किया है जो हमारी टीम की ताकत के बारे में अच्छे से बतलाता है.

तर्कसंगत ने पुनीत शर्मा और उनकी टीम को, एक सराहनीय कारण के लिए निरंतर निस्वार्थ प्रयास के लिए उन सभी लोगो की प्रशंसा करता है.

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