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केरल के इस सरकारी अस्पताल में, रंग बिरंगे दीवारें, टेलीविजन और प्लेरूम जैसी सुविधाये हैं

तर्कसंगत

April 8, 2019

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सरकारी अस्पतालों के बारे में सोचते ही आपके दिमाग में क्या आता है? अस्पताल की सभी संभावनाओं को देखे अगर, तो हमें उसका खराब बुनियादी ढाँचा और सुस्त वातावरण के बारे में में ही दिखता हैं. कन्नूर की सामाजिक स्वास्थ्य प्रणाली, इस धारणा को बदलने के लिए काम कर रही है.

मार्च की शुरुआत में, कन्नूर में एक नए चिल्ड्रन वार्ड का उद्घाटन किया गया था. यह समझना कि अस्पताल में अगर कोई भी किसी को देखने आता है. तो बच्चो के लिये अनुभव यह सुखद नहीं होता है, हम इसे जहाँ तक संभव है, आरामदायक बनाने का एक छोटा सा प्रयास कर रहे है.

 

बच्चों का नया वार्ड

कन्नूर के सरकारी जिला अस्पताल में बच्चों का नया वार्ड, जिला पंचायत की मदद से अस्पताल अधिकारियों की पहल के तहत विकसित किया गया था. कन्नूर के जिला कलेक्टर ने उद्घाटन किए गए नये वार्ड की तस्वीरें पोस्ट करते हुए कहा, “आशा कम से कम है, कि बच्चे इसका उपयोग करेंगे” लेकिन इससे संबंधित अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करता हूँ.

 

 

अस्पताल के अधीक्षक और प्रशासक डॉ. राजीवन ने अपने चार अन्य डॉक्टरों की टीम के साथ यह संभव किया. तर्कसंगत से बात करते हुए, डॉ. राजीवन ने कहा, “50-बेड वाला एक वार्ड भी विकसित किया गया है. मैंने इस अस्पताल में लगभग आठ महीने पहले शामिल हुआ था. हम हर महीने लगभग 350-400 प्रसव करते हैं और एक बार में लगभग 60-70 बच्चे भर्ती होते हैं. हमेशा से ही जगह की कमी थी. तो मेरी टीम और मैंने देखा कि एक खाली क्षेत्र पड़ा था, तो हमने इसका उपयोग करने का फैसला किया.

 

 

नए चिल्ड्रन वार्डस की दीवारें, सुंदर चित्रों और मलयालम वर्णमाला और अंकों से सजी हैं. रंगीन दीवारों के अलावा इस वार्ड में गंभीर माहौल, जो एक अस्पताल की विशेषता है, से बच्चों का ध्यान हटाने  के लिए टेलीविजन और प्लेरूम जैसी सुविधाएं हैं.

“हमारे पास एक प्लेरूम है जहां हमारे पास कई खिलौने, एक बालग्रह और यहां तक कि भव्य कुर्सियां हैं. इसके अलावा, वार्ड में चार-बेड वाला अलग क्षेत्र है, सात-बेड वाला डायरायरेओल रोग क्षेत्र भी है”. डॉक्टरों की टीम वास्तव में वह लोग हैं, जिन्होंने अपनी जेब से पैसे का योगदान दिया और इस वार्ड के लिये एक 20,000 रु वाला टेलीविजन भी खरीदा. नवीनीकरण की कुल लागत 6 लाख रुपये आयी थी.

 

 

डॉ. राजीवन ने कहा,पहले बच्चे बहुत डरते थे और हमेशा घर जाने को लेकर रोते थे. हम बस चाहते थे कि उनका ध्यान इस चीज से हट जाये. अब, यह बच्चे बहुत खुश हैं क्योंकि उन्हें अब यह नहीं लगता कि वह अस्पताल में है और वह किसी कारणवश उनके साथ ऐसा हो रहा है”.

दिलचस्प बात यह है कि जिला पंचायत ने भी काफी दिलचस्पी दिखाई. डॉ. राजीवन ने कहा, जब सुधार हो रहा था, तब जिला पंचायत के अध्यक्ष नियमित रूप से वार्ड का दौरा करते थे.

चिल्ड्रन वार्ड के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश, जो कोर टीम का हिस्सा भी हैं, ने कहा, “हमारे पास बच्चों के वार्ड के लिए विस्तृत योजनाएँ भी हैं. जैसे अभी बच्चों के वार्ड में आईसीयू नहीं है. हम जल्द से जल्द आईसीयू बनाने की योजना बना रहे हैं”.

 

 

प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र से पारिवारिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र

 

केरल सरकार ने ‘नव केरल मिशन’ शुरू किया है. इस मिशन के तहत, राज्य सरकार ने आर्द्रम नाम से शुरू प्रोजेक्ट द्वारा, लोगों के लिए सस्ती और व्यापक स्वास्थ्य उपचार की नीव रखी है.

आर्द्रम के तहत, कई प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र (PHC) को परिवार स्वास्थ्य सेवा केंद्र (FHC) में बदला जा चुका है. अकेले कन्नूर जिले में पहले चरण में 11 PHC को FHC में बदल दिया गया है. दूसरे चरण में लगभग 50 और पीएचसी का चयन किया गया है. इस चरण में, 16 पहले ही रूपांतरित हो चुके हैं, जबकि अन्य 34 के लिए प्रक्रिया अभी भी चल रही है.

 

 

नोडल अधिकारी, आर्द्रम के प्रभारी डॉ. ई. मोहनन ने तर्कसंगत को बताया, “इस परिवर्तन के माध्यम से, हम एक प्रमुख ढांचागत प्रगति को लेकर आये है. इसमें प्रत्येक HC के बदलाव के लिये तीन डॉक्टर, चार स्टाफ नर्स, दो फार्मासिस्ट और एक लैब टेकनीशियन शामिल हैं. हमारा मुख्य उद्देश्य हमारे मरीजों को एक बेहतर अनुभव देना है. हमने अवलोकन कक्ष भी बनाये हैं, जहाँ गंभीर रोग वाले मरीजों का इलाज किया जाता है.

केरल, और कन्नूर जिला, विशेष रूप से, स्वास्थ्य सेवा के मामले में सुधार के लिये देश के बाकी हिस्सों को एक रास्ता दिखा रहे हैं. तर्कसंगत, इस तरह की विभिन्न पहलों के लिए इसमें संबंधित सभी अधिकारियों के द्वारा किये गये उनके कार्यो की सराहना करता है.

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