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बिहार: मगध विश्वविद्यालय में एक साल से अधिक से कोई परीक्षा आयोजित नहीं की गयी, 4 लाख छात्रों का भविष्य अन्धकार में

तर्कसंगत

April 8, 2019

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2016-2019 बैच के मगध विश्वविद्यालय, बिहार के छात्र समय पर परीक्षा न होने से क़ाफी परेशान हैं. जनवरी 2018 के बाद जब बैच ने अपनी प्रथम वर्ष की परीक्षा दी, वह भी देरी से ही हुई थी, उसके बाद अब तक कोई परीक्षा आयोजित नहीं की गई है.

यही नहीं, 2017-2020 के बाद के बैच के लिए एक भी परीक्षा अभी तक आयोजित नहीं की गई है. परीक्षा में देरी ने चार लाख छात्रों के भविष्य को बुरी तरह प्रभावित किया है.

 

“युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़”

प्रभावित छात्रों में से एक अभिषेक कुमार गुप्ता कहते हैं, ‘अगर चीजें इसी तरह जारी रहती हैं, तो हम पांच से छह साल में अपना तीन साल का कोर्स पूरा कर सकते हैं.’ गुप्ता ने तर्कसंगत को बताया कि 2016 बैच के छात्रों को जुलाई 2019 तक अपना स्नातक पूरा करना था लेकिन वर्तमान स्थिति के साथ, यह दिख नहीं रहा है.

मगध विश्वविद्यालय UGC द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय है. यह विश्वविद्यालय वर्तमान में बिहार सरकार द्वारा शासित है. लगभग 44 घटक महाविद्यालयों, 24 स्नातकोत्तर विभागों और 85 संबद्ध महाविद्यालयों के साथ, मगध विश्वविद्यालय बिहार का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है.

2019 बैच के बच्चों के लिए भी अभी तक प्रथम वर्ष की परीक्षा नहीं हुई है.

गुप्ता ने कहा, कि वो यूपीएससी की परीक्षा देना चाहते हैं, और वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि, इस बार बिना उनके किसी दोष के,वे इस वर्ष यूपीएससी परीक्षा नहीं दे पाएंगे. वह इस वजह से काफ़ी दुखी हैं. और ऐसे भी नहीं कि वह अकेले हैं. उनका कहना है कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण बहुत सारे छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है.

 

 

लम्बी और लगातार देरी

परीक्षा में लंबे समय तक देरी के खिलाफ विरोध शुरू होना चाहिए, हालांकि, 2016 बैच के दूसरे वर्ष की परीक्षा में फिर से देरी होने के बाद इसे गति मिली है. परीक्षा 19 मार्च को एक बार विलंबित होने के बाद, फिर से देरी हुई, जिसके लिए घोषणा एक दिन पहले, यानी 18 मार्च को की गई थी. छात्रों को तब बताया गया था कि परीक्षा अब चुनावों के बाद ही आयोजित की जाएगी.

गुप्ता ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मगध यूनिवर्सिटी लेट एग्जामिनेशन आंदोलन (MULEA) अभियान शुरू किया है. इस अभियान को अब अलग-अलग प्लेटफार्मों पर अन्य पीड़ित छात्रों के बीच समर्थन मिला है. छात्र अब इस मुद्दे को व्यक्त करते हुए अपने वीडियो भेज रहे हैं.

यही नहीं, गुप्ता के नेतृत्व में छात्रों के समूह ने उचित कार्रवाई करने के लिए बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राज्य मानवाधिकार आयोग को भी पत्र लिखे हैं. उन्हें अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

 

 

 

 

खबर लिखने तक उनकी टिप्पणियों के लिए विश्वविद्यालय के अधिकारियों तक नहीं पहुंचा जा सका.

 

तर्कसंगत का तर्क 

बिहार में शिक्षा की खराब स्थिति कई कारणों से बदनाम है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों की दया पर छोड़े गए लगभग 4 लाख छात्रों की स्थिति यही साबित करती है. लगता है कि लाखों छात्रों का भविष्य अंधकार में है. तर्कसंगत को उम्मीद है कि अधिकारी मामले पर जल्द ही ध्यान देंगे और पीड़ित छात्रों की परीक्षा समय पर करवा कर उन्हें राहत और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा सुदृढ़ करेंगे.

 

 

 

 

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