सप्रेक

यह मेरा कोलकाता, एक प्रोजेक्ट, जिसमे City of Joy नाम से मशहूर शहर को साफ़ सुथरा बनाया जा रहा है

तर्कसंगत

April 8, 2019

SHARES

समाज की भलाई के लिए काम करने वाले गैर-लाभकारी संगठन (NGO) बहुत सारे हैं, लेकिन यह वह काम कर रहा है, जो बाकी NGO नहीं कर रहे है, इस वजह से इसे एक विशेष NGO का दर्जा दिया जा रहा है. ये मेरा इंडिया (YMI)’ एक ऐसा गैर-लाभकारी, सामाजिक परिवर्तन निर्माता और स्वैच्छिक नागरिक समूह है, जिसने दुनिया की बेहतरी के लिए, उसे बदलने के लिए अद्भुत, अनूठी पहल के कारण अपना नाम बना रहा है.

YMI समाज के कमजोर वर्गों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मानवीय, शैक्षिक, स्वास्थ्य देखभाल, पर्यावरण और अन्य गतिविधियों में सुधार के लिये लगी हुई है. YMI, सभी तरह की रूकावटो को दूर करने के लिए तैयार है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उस समस्या को दूर करने की आवश्यकता है की नहीं, चाहे वह शिक्षा या पर्यावरण के क्षेत्र में ही क्यों न हो. YMI के संचालक यह सुनिश्चित करेंगे कि “एक दिन भारत सुनहरे पक्षी की तरह फिर से उड़ान भरें”.

YMI द्वारा तीन परियोजनाएं की गयी हैं – विद्यानीराधि – शिक्षा प्रदान करना, प्रकृति – एक पर्यावरण के अनुकूल वातावरण बनाना और स्वास्थ – समग्र रूप से स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना, और  स्वदेशी – कौशल विकास पर आधारित स्व-स्थायी परियोंजना.

 

शुरुआत और इसका उद्देश्य

तर्कसंगत के साथ बातचीत में, YMI की डिजिटल मीडिया प्रमुख, निधि पोद्दार ने कहा, कि “सभी संगठनों के लिए एक पारस्परिक सामाजिक माहौल के निर्माण की दिशा में काम करने और शहर के बेहतर भविष्य को विकसित करने के लिए एक सामूहिक सामाजिक शक्ति प्रदान करेगा. यह मेरा कोलकाता’, YMI द्वारा निर्मित और MASH परियोजना द्वारा सह-होस्ट(सह-संचालित) किया गया, इसे हमारे सिटी ऑफ़ जॉय को पुनर्जीवित, पुनः स्थापित करने और पुनर्निर्माण करने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था.”

 

 

30 जनवरी को राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस वाले दिन “यह मेरा कोलकाता” अभियान का शुभारंभ हुआ. लॉन्च का कार्यक्रम कोलकाता के उत्तरी पार्क, एल्गिन रोड में, कोलकाता के भवानीपुर के वार्ड पार्षद आशिम बोस के साथ आयोजित किया गया था, जिसमें उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था. उन्होंने कोलकाता के पहले सामाजिक अखबार साथका भी अनावरण किया, जो एक दो सप्ताह वाला तीन-भाषी अखबार है, जो आम नागरिक की आवाज़ के रूप में कार्य करता है. इस कार्यक्रम को शानदार बनाने के लिये “यह मेरा कोलकाता” की टीम और सहयोगी संगठनों के सहयोग से मुमकिन हुआ.

निधि ने कहा,लॉन्च के साथ, हमने, पास के स्कूलों के छात्रों की मदद से पार्क को पूरा मेकओवर दिया. शुरू करने के लिए, हमने पार्क को साफ किया और उसे साफ़-सुथरा कर दिया गया. टीम ने सामाजिक मुद्दों पर अच्छे संदेश और चित्रों के साथ दीवारों को भी चित्रित किया. आशीष बोस और टीम ने पार्क में वृक्षारोपण का काम भी किया”.

यह मेरा कोलकाता 2 अक्टूबर, 2019 जो महात्मा गांधी के जन्मदिन का प्रतीक है. तब तक इसे चमत्कारिक परिणाम के लिये जारी रखा जायेगा और यह सुनिश्चित किया जायेगा कि शहर में स्वच्छता हो.

आठ महीने के इस अभियान का उद्देश्य कोलकाता और उसके नागरिकों के वातावरण में वास्तविक बदलाव लाना है. निधी ने कहा, टीम हर महीने एक सामाजिक मुद्दे की दिशा में काम करेगी और अपना सारा समय उस केन्द्रित करेगी और बदलाव लाने के लिए प्रयास करेगी.

आठ पहलों में सैनिटरी नैपकिन प्लांट और वेंडिंग मशीन इंस्टॉलेशन, स्लम वेलफेयर एंड अपलिफ्टमेंट, वायु प्रदूषण और इसका न्यूनीकरण, प्लास्टिक का प्रभावी इस्तेमाल, इसके रिसाइकलिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट, स्कूलों और दूसरे शिक्षण संस्थानों की स्थापना, ट्री प्लांटेशन, पुनर्निर्माण और पब्लिक की जगहों को जैसे कि बस स्टैंड और गंगा नदी के तट पर मैराथन – एक अभियान गंगा के लिए जैसी उपयोगिता को रेनोवेट करना शामिल है.

लॉन्च के मौके पर, यह मेरा इंडिया की संस्थापक, स्मिता अग्रवाल ने कहा, “ज्यादा हाथ ज्यादा बेहतर काम करते हैं और ज्यादा खुशी, मुस्कुराहट और प्रकाश और इस दुनिया को हमारे लिए, इस परियोजना के माध्यम से हमारे लिए एक बेहतर जगह बना रहे हैं. ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे है”.

 

 

MASH परियोजना के सिटी मैनेजर श्री श्रेयस बाजोरिया ने आगे बात करते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य है कि कई कॉलेज और स्कूलों के साथ-साथ अन्य स्वैच्छिक संगठनों जैसे कि रोटारैक्ट, रोटरी और यूथ संगठनों को जमीनी स्तर से सभी संबंधित प्राधिकरणों की भागीदारी को शामिल करना”.

तर्कसंगत समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के अपने प्रयास के लिए यह मेरा इंडिया की टीम की सराहना करता है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...