सचेत

“हम अनुरोध नहीं कर रहे हैं, हम मांग कर रहे हैं”: सफाई कर्मचारियों ने अपना घोषणापत्र जारी किया

तर्कसंगत

Image Credits: BezwadaWilson/Twitter/ Wikimedia

April 9, 2019

SHARES

4 अप्रैल को, ’जय भीमके नारों के बीच, सैकड़ों सफाई कर्मचारी इंडियन सोशल इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली में इकट्ठे हो गये.

पहली बार, सफाई कर्मचरी आन्दोलन (SKA) के तहत सफाई कर्मचारियों ने, मैनुअल स्कैवेंजिंग को ख़त्म करने के लिए, एक घोषणापत्र जारी किया. जिसमें उन्होंने स्वच्छता और गैर-सफाई कर्मचारियों को एक गरिमामय जीवन का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट मांगों को रेखांकित किया गया है.

SKA एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन है, जो अब सालों से, काम करने की बेहतर स्थिति और सफाई कर्मकारियों के लिए सम्मानजनक जीवन की माँग कर रहा है. यह इतिहास में पहली बार बताया गया है कि सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों की सूची को प्रस्तुत किया है.

 

गरिमापूर्ण जीवन की माँग

SKA के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन ने न्यूज़क्लिक को बताया, “हम ऐसी सरकार नहीं चाहते हैं जो हमारी परवाह ही नही करती. यह हमारी मांगें हैं, और हम सत्ता में बैठे लोगों से उनसे मिलने का अनुरोध नहीं कर रहे हैं, हम उन्हें आदेश दे रहे हैं.

 

घोषणा पत्र सभी दलों को भेजा जाएगा जो सत्ता में आने की होड़ में हैं. यह श्रमिकों द्वारा उनकी मुक्ति, अक्सर जान की बाज़ी लगाने व्यवसाय (जोख़िम वाले व्यवसाय), उनके पुनर्वास, उसके बाद, उनके आश्रितों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार के अवसरों के लिए विशिष्ट मांगों की रूपरेखा तैयार करता है.

इस घोषणापत्र के लिए, SKA ने 10 राज्यों में बैठकें और परामर्शी सर्वेक्षण किए. कह एक अलग मंत्रालय की मांग कर रहे हैं जो विशेष रूप से उनसे संबंधित मुद्दों से निपटेगा; इस क्षेत्र के लिए बजट का 1% आवंटित किए जाये; बढ़ा हुआ मुआवजा, सरकारी नौकरी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक पहुंच.

 

घोषणापत्र ने आरएल –21 करके एक जीवन कार्ड के लिए भी एक अधिकार का प्रस्ताव दिया है. इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के नाम पर रखा गया है. यह कार्ड शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार तक की सुविधाये मुफ्त में प्रदान करेगा. यदि किसी श्रमिक के पास यह कार्ड है, तो कोई अन्य दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा.

SKA के राज्य-स्तरीय संयोजक उषा ने द हिंदू को बताया कि केवल पैसे से क्षतिपूर्ति का भुगतान करना पर्याप्त नहीं है और वह अब सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा,”वह यह है जो समुदाय में वास्तविक परिवर्तन लाएगा. घोषणापत्र में मैनुअल स्कैवेंजिंर श्रमिक के घर की कम से कम एक महिला को सरकारी नौकरी भी दिया जाना चाहिये. उन्होंने आगे कहा, “जब एक महिला के पास स्थायी सरकारी रोजगार होता है, तो वह न केवल खुद को बल्कि अपने पूरे परिवार और समुदाय को सशक्त बनाएगी”.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...