पर्यावरण

एक स्कूल ने रीसायकल कर के 6 साल में बनाई 7.8 लाख कागज की शीट

तर्कसंगत

April 9, 2019

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कागज की बर्बादी लंबे समय से दुनिया भर में एक गंभीर समस्या बन गई है. कॉरपोरेट्स, NGO और यहां तक ​​कि व्यक्तिगत रूप से लोग भी पेड़ों को बचाने और कागज को रीसायकल करने का प्रयास कर रहे हैं. भले ही दुनिया का ज्यादातर भाग कंप्यूटर और लैपटॉप में परिवर्तित हो चूका है लेकिन दैनिक जीवन में कागज का उपयोग करना समाप्त नहीं हुआ है. भारत के स्कूल और कॉलेजों में छात्र कागज पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं.

 

हरियाली का रास्ता

बेंगलुरु में स्थित एक निजी स्कूल ने वास्तव में स्कूल परिसर में एक पेपर रीसाइक्लिंग इकाई स्थापित करके एक चमकदार उदाहरण स्थापित किया है जो पिछले छह वर्षों में रीसाइक्लिंग से लगभग 7 लाख, 80 हजार कागज की शीट का उत्पादन कर चुका है. बेंगलुरु के उपनगरों में स्थित विद्याशिलप अकादमी ने 2012 में यह पहल शुरू की थी. स्कूल केवल पांच लोगों के साथ, पांच यूनिट बिजली और 350 लीटर पानी का उपयोग करके प्रतिदिन 600 पेपर शीट का उत्पादन करता है. स्कूल हर दिन लगभग 35 किलोग्राम कच्चे माल को रीसायकल करता है. जो पेपर बेकार हो जाता है उसे परिसर में रखे बड़े कूड़ेदानों में इकठ्ठा किया जाता है.

 

 

स्कूल की प्रधानाध्यपक कलाई सेल्वी ने तर्कसंगत से बात करते हुये बताया “स्कूल में अक्सर नोटबुक, वर्कशीट, प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक्स और खाने के समान जैसे कचरे की एक बड़ी मात्रा होती हैं. हमारे शोध से पता चला है कि स्कूल कचरे में 24% रीसायकल पेपर है और 50% खाने का समान और अन्य नॉन रीसायकल कागज है पर उससे खाद बनाया जा सकता है.”

 

बच्चों को रीसाइक्लिंग का महत्व सिखाना

उन्होंने बताया “हम अपने बच्चों को एक सुनहरे भविष्य के लिये रीसाइक्लिंग के महत्व के बारे में शिक्षित करते हैं. शिल्पियों की फुर्तीली उंगलियों ने कागज से अति सुंदर आभूषण बनाये हैं. सौंदर्यपूर्ण और घर की आंतरिक सजावट के लिये चीज़ें बनाना रचनात्मक अभिव्यक्ति और महत्वपूर्ण सोच को व्यक्त करते हैं. हमारे कचरे के डिब्बे ने प्लास्टिक कवर को अखबारों से बदल दिया है. परिसर में उपयोग होने वाला कागज हमारी रीसायकल इकाई से ही प्राप्त किया जाता है. वास्तव में स्कूल समाचार पत्र, वार्षिक रिपोर्ट कार्ड रीसायकल कागज से घर में बनाये जाते हैं.”

 

 

छात्रों ने आभूषणों के बक्से, कॉर्पोरेट सेट, जर्नल डायरी, लिफाफे और उपहार बैग जैसी चीज़ों का उपयोग करके दिलचस्प कागज के टुकड़े बनाये हैं जिसे बेगुर के सरकारी हाईस्कूल को दान कर दान कर दिया था.” हमने अब तक इस पहल के माध्यम से 14 सरकारी स्कूलों की मदद की है. हम कला विभाग की कागज पूर्ति में आत्मनिर्भर हो गये हैं . हमारे स्टाफ और छात्रों को रीसायकल कागज का उपयोग करने के लिए पूरे वर्ष प्रोत्साहित किया जाता है. विद्याशिल्प उन कुछ स्कूलों में से एक है जिन्होंने इस तरह की नेक पहल की शुरुआत की है.

स्कूल को उसके प्रयासों के लिए मान्यता दी गई है और दक्षिण भारत में Behetar India अभियान के तहत सबसे आगे है. तर्कसंगत स्कूल के अधिकारियों का आशा की एक किरण बनने और दुनिया को थोड़ा सा हरा-भरा बनाने में सहयोग करने पर सराहना करता है.

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