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वीडियोकॉन केस: प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा दिवालिएपन की मिसाल बन सकता है

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Image Credits: India Today

April 9, 2019

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वेणुगोपाल धूत के स्वामित्व वाला वीडियोकॉन समूह सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों को मिलाकर 90,000 करोड़ रुपये का कर्ज़दार है. एनडीटीवी के अनुसार भारतीय बैंकिंग इतिहास में वीडियोकॉन सबसे बड़ा कॉर्पोरेट दिवालियापन का मामला बन सकता है.

 

कंपनी का दिवालियापन

वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (VIL) और Videocon Telecommunication Ltd (VTL) का संयुक्त रूप से 59,451.87 करोड़ रुपये और 26,673.81 करोड़ रुपये बकाया है, जो भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्षता में भारतीय बैंकों का 88,125.68 करोड़ रुपये है. इसके अलावा अन्य 731 लेनदारों ने 3,111.80 करोड़ रुपये (VIL) और 1,267 करोड़ रुपये (VTL) का दावा किया है और इस तरह कुल राशि 90,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है.

वीडियोकॉन समूह के प्रमोटर, जिनमें वेणुगोपाल धूत, प्रदीपकुमार धूत और राजकुमार धूत शामिल हैं, जिन्होंने वीआईएल द्वारा प्राप्त / सुनिश्चित विभिन्न सुविधाओं के लिए 57,823.24 करोड़ रुपये का दावा किया है उसका मूल्यांकन किया जा रहा है.

वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशन द्वारा वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज से 1,786.95 करोड़ रुपये की राशि का दावा किया जा रहा है. इन सभी आंकड़ों को कंपनी के रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) द्वारा कंपनी की वेबसाइट पर नवंबर 2018 से जनवरी 2019 के बीच दिखाया गया है.

 

सबसे बड़ा निजी क्षेत्र दिवालियापन?

NDTV ने बताया कि उद्योग के विभिन्न स्रोतों के अनुसार ऋण समाधान के लिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 में आने के बाद यह भारत में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा दिवालियापन होगा. 2018 में अपने ऋणों का भुगतान करने में विफल रहने के बाद, एसबीआई ने कंपनी को नेशनल कंपनी ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) को भेज दिया. IBC नियमों के आधार पर, कंपनी के निदेशक मंडल को निलंबित कर दिया गया था और इसके दैनिक संचालन के प्रबंधन के लिए एक रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) को नियुक्त किया गया था.

वीआईएल पर 54 लेनदारों का बकाया है, जिनमें से SBI ने सबसे अधिक 11,175 करोड़ रुपये का बकाया है. 59,451.87 करोड़ रुपये के मुकाबले, कंपनी ने 57,443.62 करोड़ रुपये स्वीकार किए हैं, जबकि 1,149 करोड़ रुपये को खारिज कर दिया है और शेष 782.24 करोड़ रुपये का सत्यापन किया जा रहा है।

दूसरी ओर, वीटीएल, पर 34 उधारदाताओं का बकाया है, जिसमें एसबीआई ने सबसे ज़्यादा 4,605.15 करोड़ रुपये दिए हैं. आईसीआईसीआई बैंक ने वीआईएल पर 3,318.08 करोड़ रुपये और वीटीएल पर 1,439 करोड़ रुपये का दावा किया है.

 

इसके पहले क्या हुआ था?

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार CBI ने 24 जनवरी, 2019 को ICICI-Videocon धोखाधड़ी मामले में ICICI की एमडी और सीईओ चंदा कोचर, दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत के खिलाफ मामला दर्ज किया. सीबीआई ने चंदा कोचर को “वीडियोकॉन ग्रुप को बेईमानी से मंजूरी देने” के लिए आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप में केस किया.

अक्टूबर 2018 को ICICI बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद से इस्तीफा देने वाली कोचर पर CBI की प्राथमिकी में उनके पति दीपक कोचर के माध्यम से वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के एमडी वीएन धूत को 300 करोड़ रुपये का ऋण दिए जाने का आरोप लगाया गया था.

आईसीआईसीआई-वीडियोकॉन ऋण धोखाधड़ी मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने के अलावा, जांच एजेंसी ने कई स्थानों पर छापे भी मारे. वीडियोकॉन के इन मुंबई कार्यालयों में से दीपक कोचर की न्यूपॉवर रिन्यूएबल्स और सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड शीर्ष सूची में थे.

जांच एजेंसी ने एफआईआर में कई अज्ञात लोक सेवकों का भी उल्लेख किया है. सीबीआई ने आगे उल्लेख किया कि पूर्व अध्यक्ष केवी कामथ (न्यू डेवलपमेंट बैंक के वर्तमान अध्यक्ष), संदीप बक्शी (वर्तमान आईसीआईसीआई बैंक एमडी), सोनजॉय चटर्जी (सीईओ, गोल्डमैन सैक्स इंडिया), ज़रीन दारूवाला (सीईओ, स्टैंडर्ड चार्टर्ड इंडिया) जैसे वरिष्ठ बैंक अधिकारी, राजीव सभरवाल (सीईओ, टाटा कैपिटल), होमी खुसरोखान, और के. रामकुमार भी मामले से संबंधित हो सकते हैं, क्योंकि वे उस समिति में थे, जिसने 1,575 करोड़ रुपये के ऋण की मंजूरी दी थी.

 

 

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