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25 साल से कम उम्र  में चुनाव लड़ना चाहते हैं? यह संगठन करेगा आपकी मदद

तर्कसंगत

April 10, 2019

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भारत की आबादी की औसत उम्र 27 साल है जबकि संसद के लोगो की औसत उम्र 58 वर्ष है. यहाँ साफ पता चलता है कि 25 साल से कम उम्र के 670 मिलियन आबादी वाले देश को उनकी उम्र से दोगुने से अधिक उम्र के लोगों द्वारा चलाया जा रहा है. राजनीतिक के ऐसे पहलू ने ही सुधांशु कौशिक को उम्मीदवारी की औसत उम्र कम करने और राजनीती को सुलभ सुगम बनाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया.

सरकार हर स्तर पर युवा सशक्तीकरण का वादा करती है, लेकिन सही सशक्तीकरण तभी होगा जब उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व होगा.

 

कौशिक द्वारा चलाया जाने वाला एक गैर-पक्षपाती, गैर-लाभकारी संगठन “Young India Foundation” (YIF) राजनीति में 21 से 25 वर्ष की आयु के लोगों को शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है.

 

यंग इंडिया फाउंडेशन

YIF के संस्थापक सुधांशु कौशिक ने द लॉजिकल इंडियन को बताया “पिछली बार 1989 में युवाओं को राजनीति में सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई की गई थी जब मतदान की उम्र 21 से 18 की गई थी. हम चाहते हैं कि बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए सरकार को उम्मीदवारी की आयु को कम करना चाहिये.”

 

 

YIF नामांकन भरना, अभियान को डिजाइन करना, कानूनी सहायता, विश्लेषण-प्रबंधन और चुनाव घोषणा पत्र को तैयार करना जैसी नि:शुल्क सेवायें प्रदान करता है. YIF अपने उम्मीदवारों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने में मदद करता है.

 

 

कौशिक बताते हैं “जब हम राजनीति के बारे में सोचते हैं तो हम सिर्फ दो बातें जानते हैं सांसद और विधायक. हम अक्सर शासन के स्तर की अनदेखी करते हैंजबकि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए अच्छा शासन होना जरुरी है. YIF विशेष रूप से उन उम्मीदवारों की तलाश करता है जिन्होंने अपनी क्षमता में सार्वजनिक सेवा की है लेकिन चुनाव लड़ने के लिए संसाधनों की कमी है. हम राजनीतिक संरक्षण वाले या सिस्टम से आने वाले उम्मीदवारों की तलाश में नहीं हैं. इसके बजाय, हम ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जो राजनीतिक स्पेक्ट्रम से बाहर हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से सेवा करने की इच्छा और क्षमता रखते हैं.”

 

सभी के लिए सुलभ राजनीति

वे बताते हैं “हमारे पास जम्मू और कश्मीर से 23 साल की एक उम्मीदवार आबिदा थीं. वह बारी दरहाल पंचायत की सरपंच बनने के लिए प्रचार कर रही थीं. उन्होंने अपने गृह नगर में बदलाव करने के लिए नर्सिंग की पढ़ाई छोड़ दी. वह वहां की एक उमीदवार के खिलाफ थी जो लंबे समय से चुनाव जीत रही थी. विजेता जिसे 570 वोट मिले थे उन्हें कुल 534 वोट मिले. हालांकि वह हार गई लेकिन एक रूढ़िवादी परिवार से किसी के लिये पहली बार चुनाव लड़ना और इतने कम अंतर से हारकर यह साबित कर दिया कि यह असंभव नहीं था.”

कौशिक का कहना है कि YIF की प्रमुख ताकत यह है कि यह उम्मीदवारों के लिए व्यापक दावों पर नहीं बल्कि नागरिकों के सामने आने वाले मुद्दों पर घोषणा पत्र तैयार करता है. “हमारी उम्मीदवार स्नेहा हरियाणा के सोनीपत से चुनाव लड़ रही हैं. उसके अभियान के लिये, हमारी टीम उसके वार्ड और शहर का सर्वेक्षण करने की प्रक्रिया में है और लोगों से उनकी समस्याओं के बारे में बात कर रहें हैं. उदाहरण के लिये, सोनीपत में एक अस्पताल है जिसे घरों से जोड़ने का कोई उचित रास्ता नहीं है और यह 15 साल से एक जैसा ही है. हमने उस अस्पताल और वार्ड के आखिरी घर के बीच पक्की सड़क बनाने के लिये घोषणा पत्र का गठन किया हैं. इसलिये हम विकास लाने जैसे व्यापक दावे करने के बारे में बात नहीं करते हैं लेकिन हम विशिष्ट समस्याओं का समाधान करते हैं.”

 

 

कौशिक ने बताया “YIF आम युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिये हर संभव प्रयास करता है. फतेहपुर से पंच की सीट जीतने वाले उम्मीदवार जगबीर ने चुनाव प्रचार के दौरान, 11वीं कक्षा की एक लड़की द्वारा गाये गये गाने को प्रचार गीत बनाया था. मैं युवाओं के अधिकारों पर उच्च-विद्यालय में TED Talk दे रहा था. एक युवा लड़की ने उठकर कहा कि वह YIF की ओर अपना योगदान देना चाहती है. मुझे यकीन नहीं था कि एक 16 वर्षीय लड़की ऐसा बोलेगी. लेकिन 10 दिन बाद, मुझे हिंदी गीत के साथ एक मेल आया जिसका हमने जगबीर के अभियान में उपयोग किया.”

 

तर्कसंगत का तर्क 

हम दुनिया में सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक हैं. देश के युवाओं से ज्यादा उनकी परेशानी को कोई नहीं समझा सकता है? हाल ही के दिनों में, राजनीति में युवाओं की दिलचस्पी बढ़ी है. बहुत से लोग चुनाव लड़ना चाहते हैं और ठोस बदलाव लाना चाहते हैं लेकिन वे ऐसा करने के लिये सही तरीका नहीं जानते. Young India Foudation युवा को एकत्रित करने और उन्हें चुनाव लड़ने के लिये प्रेरित करने का एक बड़ा काम कर रहा है.

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