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उचित आहार के अभाव, अनाज की कम खपत के कारण भारत में सैकड़ों मौतें हो रही: लैंसेट रिपोर्ट

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प्रतीकात्मक तस्वीर

April 11, 2019

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आहार संबंधी ख़राब आदतें और भोजन विकल्प भारत में हर साल सैकड़ों लोगों की मौत का कारण बन रहा है. लैंसेट के एक नए अध्ययन में पाया गया कि विश्व स्तर पर, पांच लोगों में से एक (11 मिलियन के बराबर) अपनी प्लेटों पर भोजन और पोषक तत्वों की सही मात्रा की कमी के कारण मर जाते हैं. यह ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिसर्च के हिस्से के रूप में किया गया था.

 

रिपोर्ट क्या कहती है?

रिपोर्ट ने 195 देशों में 1990 से 2017 तक 15 आहार कारकों में खपत के रुझान को ट्रैक किया. इससे यह पता चला कि दुनिया के लगभग सभी क्षेत्र, अपने आहार पैटर्न को बदलने से लाभान्वित हो सकते हैं. अध्ययन में कहा गया है कि विश्व स्तर पर हर पांच में से एक मौत, खराब आहार से जुड़ी हुई है, जो दुनिया भर के लोगों में लम्बे समय तक रहने वाली या जानलेवा बीमारियों की श्रेणी को बढ़ावा दे रही है. यह संख्या, कथित तौर पर तम्बाकू धूम्रपान के कारण होने वाली मौतों की संख्या से अधिक है.

मौतों के कारणों में हृदय रोग से 10 मिलियन मौतें, टाइप 2 डायबिटीज/मधुमेह से लगभग 339,000 मौतें, और 913,000 कैंसर से होने वाली मौतें शामिल हैं. 1990 में इस प्रकार की मौतों में आठ मिलियन की वृद्धि हुई है. मौतों में बड़े पैमाने पर वृद्धि को, जनसंख्या और आबादी की उम्र बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

हालांकि, यह जंक फूड का सेवन करने से नहीं है, बल्कि उन स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्यायों के मुद्दों का कारण बन रहा है. जो स्वास्थ्य और भोजन में, अधिक मात्रा में पौष्टिकता की कमी के कारण हो रही है. इस अध्ययन में कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज/मधुमेह जैसे कुछ घातक और गैर-संक्रामक बीमारियों में वृद्धि के पीछे खराब आहार की आदतों का कारण भी बताया गया है.

2017 में, डाइट/खानपान जिसमे बहुत निम्न स्तर वाले आहार जैसे कि साबुत अनाज, फल, नट्स और बीज की तुलना अधिक ट्रांस फैट और शर्करा युक्त पेय युक्त डाइट/खानपान से की जाये तो इन मौतों की संख्या काफी ज्यादा है. खाद्यान्न की मात्रा, जो प्रतिदिन 125 ग्राम से कम थी, जिसमे भारत, अमेरिका, ब्राजील, पाकिस्तान, नाइजीरिया, रूस, मिस्र, जर्मनी, ईरान, और तुर्की जैसे कई देशों में मृत्यु और बीमारी के लिए उनका खानपान ही जानलेवा कारकों को बढ़ावा देती है. बांग्लादेश में, फलों का कम सेवन (एक दिन में 250 ग्राम से कम) प्रमुख खानपान की जानलेवा समस्या थी. 2017 में, भारत में म्रत्यु दर 100,000 लोगो में 310 मौतों के साथ 118 वें स्थान पर रहा, जबकि आहार से संबंधित मौतों की सबसे कम दर वाले देश इज़राइल, फ्रांस, स्पेन, जापान और अंडोरा के नाम भी शामिल थे.

 

तर्कसंगत का तर्क 

अध्ययन के निष्कर्ष के अनुसार, खानपान में सुधार के लिये विश्व स्तर पर ज्यादा प्रयास करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर किया गया हैं. यह खाद्य के विभिन्न वर्गों की प्रणाली और नीतियों के सहयोग से किया जा सकता है. वाशिंगटन विश्वविद्यालय के क्रिस्टोफर मुर्रे ने कहा, “पिछले दो दशकों से सोडियम, चीनी, और वसा नीतिगत बहस का केंद्र बिंदु रहा हैं, हमारे आकलन से पता चलता है कि प्रमुख खानपान की समस्या सोडियम का अधिक सेवन, या स्वस्थ खाद्य पदार्थों का कम सेवन है, जैसे साबुत अनाज, फल, नट्स, बीज, और सब्जियाँ.

इस समस्या से निपटने के लिए सभी सरकारों और नीति निर्माताओं को एक साथ आना होगा.

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