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महाराष्ट्र: मासिकधर्म के कारण काम पर असर पड़ने पर महिलाएं गर्भाशय का त्याग कर रहीं हैं, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने संज्ञान लिया

तर्कसंगत

April 15, 2019

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बीड जिले के अधिकारियों को महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग (MSCW) द्वारा एक समाचार रिपोर्ट की पर जांच करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि मासिकधर्म के कारण काम में रुकावट और जुर्माने से बचने के लिए, महिलाएं अपनी गर्भाशय को ऑपरेशन द्वारा शरीर से निकलवा दे रहीं हैं.

इससे पहले, महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को इस समाचार रिपोर्ट के बारे में नोटिस जारी किया गया था. इस पर शोक व्यक्त करते हुए, MSCW ने बुधवार, 10 अप्रैल को, बीड के जिला कलेक्टर को सच्चाई का पता लगाने और कड़ाई से काम करने के लिए एक नोटिस जारी किया था.

द वायर के अनुसार, महाराष्ट्र के बीड जिले में कई महिलाओं की हिस्टेरेक्टॉमी प्रक्रिया हुई. खबरों के अनुसार, इस गांवों में यह चलन है कि महिलाओं को दो या तीन बच्चों के बाद उनके गर्भाशय को निकलवा दिया जाता है, क्योंकि मासिक धर्म के कारण उन्हें जुर्माना और काम में रुकावट होती है.

महिलाएं हिस्टेरेक्टॉमी क्यों करवाती हैं?

Shethepeople.tv के अनुसार, अक्टूबर से मार्च के महीने में पश्चिमी महाराष्ट्र में गन्ने की कटाई का मौसम होता है, तब कई सारे गन्ना काटने वाले लोग इस क्षेत्र में जाते हैं. अगर क्षेत्र में सूखा ज़्यादा हो तो प्रवास दोगुना हो.जाता है. ठेकेदारों को महिलाओं के मासिक धर्म के साथ समस्या है क्योंकि यह काम में बाधा डालता है. गन्ना काटने के काम में अपने पीरियड्स के कारण छुट्टियां मांगने वाली महिलाओं को जुर्माना देना पड़ता है. इन नकारात्मक परिणामों से गुजरने के बजाय, महिलाएं अपने गर्भाशय को निकालना बेहतर समझती हैं.

ठेकेदारों ने कहा कि वे महिलाओं को हिस्टेरेक्टॉमी से गुजरने के लिए मजबूर नहीं करते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से महिलाओं की पसंद है. महिलाओं ने दावा किया कि वे इस प्रक्रिया से केवल इस कारण से गुज़रती हैं क्योंकि पीरियड्स के कारण वो पैसे को खोने का जोखिम नहीं उठा सकती हैं. महिलाओं को एडवांस के तौर पर सर्जरी के लिए पैसे मुहैया कराए जाते हैं, जो बाद में उनके वेतन से वसूला जाता है. हिस्टेरेक्टॉमी का अक्सर महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, जो अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ-साथ हार्मोनल असंतुलन और वजन घटाने के रूप में दीखता है.

“हम समाचार रिपोर्ट के माध्यम से इसकी सुचना मिली और हम इससे काफी परेशान हैं. हमने जिला कलेक्टर से कहा है कि वे इस पर गौर करें और जल्द से जल्द एक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें,” MSCW के एक अधिकारी ने कहा.

मंगलवार, 9 अप्रैल को, महाराष्ट्र के मुख्य सचिव यू.पी.एस मदन को एनसीडब्ल्यू की चेयरपर्सन द्वारा मामले में हस्तक्षेप करने, कानूनी कार्रवाई शुरू करने और भविष्य में इस तरह के अत्याचार न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी किया.

NCW ने कहा कि वह इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि इन महिलाओं पर इस तरह के अत्याचार से गुज़ारना पड़ रहा है.

 

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