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पिछले 30 दिनों में एक सर्वे के मुताबिक फेसबुक, व्हाट्सएप के जरिये 2 में से 1 भारतीय को फेक न्यूज मिलती है

Kumar Vibhanshu

Image Credits: Asian Age/Morung Express

April 15, 2019

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आम चुनावों से पहले, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से फर्जी खबरें फैलाने वालों ने बहुत तेजी पकड़ ली है, एक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि पिछले 30 दिनों में दो में से एक व्यक्ति ने फर्जी खबर प्राप्त की है. यह तब चला, जब फेसबुक ने दावा किया है कि वह भारत में प्रति दिन 10 लाख फर्जी अकाउंट को हटा रहा है.

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी खबरों का सर्कुलेशन इन दिनों जमकर हो रहा है, लेकिन कई बार यह सामाजिक समन्वय और शांति के लिए खतरा बन जाता है. चुनाव, एक विचारों की जंग है और राजनीतिक दल लगातार उस धारणा के निर्माण की तलाश में हैं.

 

#DontBeFool सर्वेक्षण

सोशल मीडिया मैटर्स एंड इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेंस, पॉलिसीज़ एंड पॉलिटिक्स (IGPP) के सर्वेक्षण के अनुसार, 53% से अधिक लोगों ने फेसबुक और व्हाट्सएप पर “आगामी चुनावों के कारण” फर्जी समाचार प्राप्त करने का दावा किया है.

सर्वेक्षण में उल्लेख किया गया है कि चूंकि लगभग आधे-अरब मतदाताओं की फेसबुक और व्हाट्सएप तक पहुंच है, इसलिए फर्जी खबरों का चुनाव पर भारी प्रभाव पड़ सकता है. सर्वेक्षण के अनुसार, 62% लोगों का मानना ​​है कि नकली समाचार आगामी चुनावों को प्रभावित करेंगे.

फेसबुक और व्हाट्सएप गलत सूचना प्रसारित करने के लिए सबसे बड़ा मंच हैं. सर्वेक्षण में कहा गया है कि 96 प्रतिशत sample population को व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी खबरें मिलीं. जिस आयु समूह ने बातचीत का नेतृत्व किया है, वह नमूना आबादी का 54 प्रतिशत हिस्सा है और उनकी उम्र 18-25 वर्ष के बीच है. सर्वेक्षण में बताया गया इसमें 56 प्रतिशत पुरुष, 43 प्रतिशत महिला और 1 प्रतिशत ट्रांसजेंडर द्वारा पूर्ण किया गया है. दिलचस्प बात यह है कि लगभग 41% उत्तरदाताओं ने Google पर प्राप्त सूचना की प्रामाणिकता की खोज करने की कोशिश की. 54% उत्तरदाताओं ने कहा कि वह कभी भी नकली खबर से प्रभावित नहीं हुए हैं, 43% लोगों ने दावा किया कि वह जानते हैं कि उन्हें किसने गुमराह किया.

#DontBeAFool” शीर्षक वाले सर्वेक्षण में लगभग 700 उपयोगकर्ताओं को शामिल किया गया, जिसमे 56 फीसदी पुरुष, 43 फीसदी महिला और 1 फीसदी ट्रांसजेंडर थे.

 

फेसबुक और व्हाट्सएप द्वारा की गई कार्रवाई

फेसबुक ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए 18 महीने से अधिक समय से काम कर रहे हैं कि भारतीय चुनाव निष्पक्ष हो, और विदेशी और घरेलू दोनों तरह के हस्तक्षेप से मुक्त हों. कथित तौर पर, फेसबुक ने पिछले हफ्ते भारत में विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 700 पेज, ग्रुप और एकाउंट्स को हटा दिया था, जो कि “समन्वित अमानवीय व्यवहार” और स्पैम को फर्जी खबर फैलाने के लिए उपयोग करते थे.

अनूप मिश्रा, सोशल मीडिया विशेषज्ञ ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से 87,000 से अधिक ग्रुप वर्तमान में व्हाट्सएप पर सक्रिय हैं. विभिन्न सरकारी नीतियों से संबंधित नकली आँकड़ों से लेकर क्षेत्रीय हिंसा को बढ़ावा देने वाली ख़बरों तक, राजनीतिक ख़बरों में हेरफेर, सरकारी घोटाले, ऐतिहासिक मिथक, देशभक्ति और हिंदू राष्ट्रवाद का प्रचार.

 

तर्कसंगत का तर्क 

गलत सूचनाओं और फर्जी खबरों के इस युग में, हमें बेहद सतर्क रहना चाहिए. हर खबर को सत्यापित करना एक महत्वपूर्ण कदम होगा.

नकली समाचार बनाना या साझा करना कभी भी उचित नहीं है. हमारे पास इंटरनेट पर पोस्ट की जाने वाली हर चीज को सत्यापित करने की जिम्मेदारी है. यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारी राष्ट्रीय डिबेट, स्वस्थ और सुविज्ञ है, हमें सतर्क रहना होगा और अपने स्तर से ऐसे फेक न्यूज़ को रोकना होगा.  

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