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दो ब्रेन डेड मरीजों के अंग दान से 12 मरीज़ों को बचाया जा सका

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April 16, 2019

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दो ब्रेन डेड रोगियों से प्राप्त ऑर्गन्स ने 3 अप्रैल को 12 लोगों की जान बचाई क्योंकि जिन लोगों को ब्रेन-डेड घोषित किया गया उनके परिवारों ने उनके अंगों को दान करने का फैसला किया था .

 

क्या हुआ था?

टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि ब्रेन-डेड मरीजों में से एक 16 साल की लड़की थी, जिसे ब्रेन हैमरेज हुआ था और दूसरा 50 साल का व्यक्ति था, जो एक जानलेवा सड़क दुर्घटना में घायल हो चूका था.

16 साल की बच्ची को बन्नेरघट्टा रोड पर फोर्टिस अस्पताल लाया गया था और सबसे पहले उसे सिरदर्द और उल्टियाँ शुरू हो गयी थे, जब तक इसको सही किया जाता तब तक वह एक अपरिवर्तनीय स्थिति में जा चुकी थी जिससे उसकी मृत्यु हो गयी. उसकी एक किडनी और लिवर को अस्पताल में ही जरूरतमंद मरीजों को दिया गया था और उसके हृदय के वाल्व, कॉर्निया और दूसरी किडनी को दूसरे अस्पतालों में भेजा गया था.

एक दूसरे मरीज के साथ जैसा बताया गया की 30 मार्च को शादी से लौटते समय उसकी दुर्घटना हो गयी थी. उसे 3 अप्रैल को ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया था, और उसके अंगों को पुनः प्राप्त कर विभिन्न अस्पतालों में भेज दिया गया था.

3 अप्रैल को, मुंबई में एक 47 वर्षीय महिला, ब्रेन-डेड वाले मरीज के परिवार ने लीवर फेलियर के मरीज की जान बचाने के लिए उसके अंगों को दान कर दिया. इसके साथ, मुंबई ने इस साल अकेले 31 कैडवर दान रिकॉर्ड किए हैं.

 

भारत में दान प्रक्रिया

हमारे देश में, अंग दान दान प्रपत्र पर हस्ताक्षर करके किया जा सकता है, इसे स्वेच्छा से जीवित दान कहा जाता है. यदि रोगी को मस्तिष्क-मृत घोषित किया जाता है, तो परिवार कॉल करके बताता है, जिसे मृतक दान कहा जाता है.

कथित तौर पर, दान किए गए अंगों के जीवनकाल पर कुछ प्रतिबंध भी हैं. उदाहरण के लिए, हृदय को केवल छह घंटे, लीवर को 24 घंटे के लिए, किडनी को 72 घंटे तक और फेफड़े को छह घंटे तक ही रखा जा सकता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, जब तक मरीज को ब्रेन डेड घोषित नहीं किया जाता है और तब तक रासायनिक समाधानों के तहत उसे रखा जाता है, तब तक शरीर से जितनी जल्दी हो सके अंग हटा दिए जाने चाहिए. टाइम्स नाउ के अनुसार, विभिन्न वेबसाइटें हैं जिनके माध्यम से ऑर्गन डोनेशन के लिए आप ऑनलाइन फॉर्म भर सकते है, जैसे की organindia.org, donatelifeindia.org आदि.
विशेषज्ञों की राय है कि भारत में अंग दान के लिए जिन स्वस्थ अंगों से दूसरो की मदद की जा सकती है, मगर वह सभी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बर्बाद हो जाते हैं. इसके अतिरिक्त, देश में किसी भी केंद्रीकृत रजिस्ट्री की कमी के कारण, संभावित समय के दौरान संभावित दाताओं और प्राप्तकर्ताओं के रिकॉर्ड नहीं मिल सकते हैं. हालांकि, विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण जैसे प्रयासों ने आसान अंग परिवहन की सुविधा प्रदान की है जिसने हाल के दिनों में जीवन को सफलतापूर्वक बचाया है.

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