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किशोरचंद्र वांगखेम : “लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है”

तर्कसंगत

April 17, 2019

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“दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में रहने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए वाणी की स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है”, यह बात पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम ने कही जो 10 अप्रैल 2019 को जेल से रिहा हुए थे, जो उन्हे मणिपुर के सीएम  और पीएम मोदी की आलोचना करने पर हुई थी. 39 वर्षीय मणिपुर के पत्रकार को भाजपा, आरएसएस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की आलोचना करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया था. वांग्मेचा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के लिए स्मारक  के खिलाफ की रैली अपना विरोध व्यक्त कर रहे थे. उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई का योगदान राज्य से असंबंधित है .

उन्होंने कहा, “मणिपुर के स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान मत करो,” उन्होंने इस तरह की रैली के लिए सीएम को “मोदी एंड हिंदुत्व की कठपुतली” भी कहा. मणिपुर के उच्च न्यायालय ने उनके गिरफ़्तारी के  आदेश को रद्द कर दिया और उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया.

तर्कसंगत ने किशोरचंद्र वांग्केम और उनकी पत्नी रंजीता एलंगबाम के साथ बात की.

क्या आपको लगता है कि देश में बोलने की आज़ादी को खतरा है?

मेरा मानना ​​है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सत्ता में आने के बाद, वहाँ बहुत सी घटनाएं हुई हैं जहाँ पार्टी ने नागरिकों की आवाज़ को दबाया है. भारतीय संविधान में बोलने की आज़ादी सम्मिलित किया गया है जिसका मतलब है कि आप इससे किसी को वंचित महीन कर सकते. वर्तमान सरकार ने मीडिया हाउसों को पहले भी उनका काम करने से रोका है. इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है और यह बहुत गलत है.

आपके अनुसार बोलने की आज़ादी को बनाये रखने में मीडिया की भूमिका क्या है?

प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है. हालाँकि, हम एक ऐसे युग में रह रहे हैं जहाँ सरकार मीडिया हाउस को संभाल रही है. इसने उन विशेष मीडिया हाउसों को सरकार के गलत कामों के लिए अंधा बना दिया है और इस पर कभी भी रिपोर्ट नहीं दी है, इस प्रकार यह अपना एकमात्र उद्देश्य पूरा करने में विफल रहा है. सरकार को हमेशा ठीक से काम करने के लिए आलोचना का स्वागत करना चाहिए. यदि कोई मीडिया वर्तमान सरकार की अक्षमता के लिए आलोचना कर रहा है, तो यह सरकार का कर्तव्य है कि वह इस घटना को बेहतर ढंग से देखे और मीडिया को “पक्षपाती” कहने के बजाय इसे ठीक करने का प्रयास करे.

आपने रानी लक्ष्मीबाई की जयंती मनाने के लिए भाजपा की आलोचना की, उस पर कोई टिप्पणी?

पहले  लोगों को यह समझने की जरूरत है कि मैं अलगाववादी नहीं हूं. मैं एक भारतीय नागरिक हूं और अपने देश से सच्चा प्यार करता हूं. यह तथ्य है कि मैंने रानी लक्ष्मीबाई की जयंती मनाने के लिए भाजपा की निंदा की है, राज्य सरकार (भाजपा) अपने राज्य के स्वतंत्रता सेनानियों को नहीं मना रही है. मुझे लगता है कि सबसे पहले हमें अपने स्वयं के स्वतंत्रता सेनानियों को महत्व देने की आवश्यकता है जिन्होंने राज्य को स्वतंत्रता प्राप्त करने में मदद करने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया है. आरएसएस के मार्गदर्शन में भाजपा प्रत्येक राज्य में अपनी विचारधारा का प्रसार  कर रही है. सरकार को एक क्षेत्र के इतिहास का ज्ञान होना चाहिए. यदि यही बात जारी रही, तो पूर्वोत्तर राज्यों का इतिहास धीरे-धीरे मिट जाएगा. क्या इसका मतलब यह है कि मैं लक्ष्मीबाई के बलिदान की प्रशंसा या सराहना नहीं करता? बेशक, मेरे मन में उसके लिए बहुत सम्मान है.

केंद्रीय सरकार द्वारा आप पर एनएसए लगाया गया था. क्या आपको लगता है कि आजकल एनएसए को गलत तरीके से उपयोग किया जाता है?

एनएसए निश्चित रूप से मुझ पर गलत तरीके से लगाया गया था. जब मैं जेल में था तब मैंने भी उन खबरों से सुना था कि कथित रूप से गायों को मारने के आरोप में लोगों पर एनएसए लगाया गया था. मैं समझता हूं कि एनएसए तब लगाया जाता है जब उस व्यक्ति से देश की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा होता है. मुझे यह समझ में नहीं आया कि उन्होंने इसे मुझ पर कैसे थोपा.

सेडिशन एक्ट के बारे में आप क्या सोचते हैं?

मुझे लगता है कि एक देश स्वतंत्रता का वास्तविक स्वाद तभी ले सकता है, जब राजद्रोह कानून को खत्म कर दिया जाए. मुझे लगता है कि यह कानून है जो लोगों को सरकार के कामकाज को दिखाने से रोक रहा है. यह भयावह है कि हमारे व्यवस्था में एक कोलोनियल युग का कानून अभी भी मौजूद है. यह जानना दिलचस्प है कि सबसे पहले  कानून को आकार देने वाले ब्रिटिश लोगों ने इसे यूनाइटेड किंगडम में बंद कर दिया है. हम अब भी इसका पालन क्यों कर रहे हैं?

क्या आपको लगता है कि AFSPA मानव अधिकारों का उल्लंघन करता है?

मुझे लगता है कि AFSPA निश्चित रूप से देश के एक निर्दोष नागरिक को परेशान करता है. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शुरू AFSPA कानून की अब समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है. यह एक लंबे समय तक रहा है, और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. मुझे लगता है कि इसकी समीक्षा करना या इसमें संशोधन करना वास्तव में सरकार को अपने नागरिकों के साथ एक मजबूत संबंध बनाने में मदद करेगा. कानून में संशोधन करने से यह और अधिक मानवीय हो जाएगा.

अब आपकी क्या योजना है?

मेरी रिहाई के बाद, मुझे पहले ही राजनीति में शामिल होने के लिए कई ऑफर मिले हैं, लेकिन मैंने अभी इसके बारे में नहीं सोचा है. अभी मैं पत्रकार बना रहूंगा और बोलने की आजादी के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा. मैं अधिक मुखर रहूंगा और अधिक लेख या ब्लॉग लिखूंगा ताकि मेरी आवाज  सभी तक पहुंचे.

रंजीता जी पिछले चार महीने आपके लिए मुश्किल थे. क्या आप हमें बता सकते हैं कि आपने इसे कैसे मैनेज किया?

यह निश्चित रूप से सबसे कठिन समय था जिसका हम दोनों ने मिलकर सामना किया. जेल वे जेल में थे , तब मुझे अपने पति को न्याय दिलाने में मदद करने के लिए लोगों के बीच जाना पड़ा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि परिवार की गरिमा को बहाल किया जाए और लोगों को एहसास दिलाया जाए कि वांगखेम ने कुछ भी गलत नहीं किया है. उन्हे गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया था. मुझे न्यायपालिका में हमेशा आशा थी. उनकी रिहाई में देरी हुई लेकिन न्याय  मिला.

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