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फैक्ट चेक : क्या राहुल गांधी की शैक्षिक योग्यता संदिग्ध है जैसा जेटली और सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दावा किया गया है ?

Kumar Vibhanshu

Image Credits: Jansatta/Money Control

April 18, 2019

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जब कांग्रेस स्मृति ईरानी को लगातार बदलती डिग्री और शैक्षिक योग्यता के बारे में बताने में व्यस्त थी, अरुण जेटली ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में राहुल गांधी पर कटाक्ष किया और लिखा, “एक दिन भाजपा प्रत्याशी की शैक्षणिक योग्यता पर ध्यान दे रहे हैं, और दूसरी तरफ यह भूल गए कि राहुल गांधी की डिग्री का भी जवाब देना पड़ सकता है. आखिरकार, उन्होंने मास्टर्स डिग्री के बिना एम.फिल किया है.”

वास्तव में, राहुल गांधी की अकादमिक क्रेडेंटिअल्स का सार्वजनिक ऑडिट कितने सवाल खड़े करता  है? जो भी एक साधारण तथ्य की जाँच करेगा, वह यह सीखेगा कि ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज को एम.फिल हासिल करने के लिए मास्टर्स  डिग्री होना अनिवार्य नहीं है.

अरुण जेटली द्वारा फेसबुक पर अपना लेख पोस्ट करने के कुछ घंटों बाद, कांग्रेस के ट्विटर हैंडल ने उन्हें जवाब दिया:

 

 

सुब्रमण्यम स्वामी ने भी राहुल गांधी के कैम्ब्रिज सर्टिफिकेट को ट्वीट किया.

 

स्वामी द्वारा पोस्ट किए गए प्रमाण पत्र के अनुसार, राहुल गांधी ने 2004-05 में डेवलपमेंट स्टडीज में एमफिल किया है. हालांकि, 2014 के चुनावों के दौरान गांधी द्वारा दाखिल नामांकन पत्र के अनुसार, उन्होंने 1995 में कोर्स किया, 2004 में नहीं, जैसा कि कथित तौर पर लल्लनटॉप ने बताया है.

इसके अतिरिक्त, ‘रेड बुक’ के अनुसार, जिसमें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से जुड़े सभी लोगों के नाम हैं, ने राहुल गांधी के नाम को “VINCI, राहुल T MPHIL95” के रूप में सूचीबद्ध किया है, जहां T ट्रिनिटी कॉलेज को संदर्भित करता है.

कथित तौर पर, 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद, विभिन्न सुरक्षा मुद्दों के मद्देनजर, राहुल गांधी की सरनेम बदल दी गई थी. 2014 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एलिसन रिचर्ड ने पुष्टि की कि गांधी को वास्तव में 1995 में एमफिल की डिग्री से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा, ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक साथी डॉ अनिल सील ने कहा था, “हां, गुप्त रूप से दा विंची के नाम से राहुल को ट्रिनिटी में लाने में मेरी भूमिका थी, लेकिन मैंने डेवलपमेंट स्टडीज़ नहीं पढ़ाया. ”

 


क्या होगा यदि उम्मीदवार शिक्षा योग्यता के बारे में झूठ बोल रहा है?

हालांकि, कोई भी उम्मीदवार जो चुनाव में चुने जाने के इरादे से एक गलत एफिडेविट दायर करता है, तो  वह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125 ए (धारा 33 ए के साथ पढ़ें) के तहत अपराध का दोषी होगा.
राहुल गांधी पहले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें अपनी शैक्षिक योग्यता साबित करने के लिए कहा गया है, 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी पर AAP द्वारा अपना डिग्री प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए दबाव डाला गया था, जिसे बाद में सार्वजनिक रूप से भाजपा ने किया. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष, सोनिया गांधी पर सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा चुनाव आयोग को एक गलत एफिडेविट दायर करने का आरोप लगाया गया था, लेकिन SC ने उनकी याचिका खारिज कर दी. AAP के पूर्व मंत्री, जितेंद्र सिंह तोमर अपनी फेक डिग्री बनाने के लिए टीका का सामना करना पड़ा था. स्मृति ईरानी वर्तमान में अपनी शैक्षिक योग्यता में लगातार बदलाव के लिए दबाव में है .

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