ख़बरें

जन औषधि: एक असफल योजना को मोदी सरकार द्वारा पुनर्जीवित किया गया

तर्कसंगत

Image Credits: Elets Online

April 18, 2019

SHARES

स्वास्थ्य एक बुनियादी मानव अधिकार है और यह हर सरकार का ध्येय होना चाहिए कि वह अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं को सभी के लिए सुलभ बना सके. ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि चूंकि स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण कारक है, क्यूकी इससे देश के आर्थिक विकास के कुल स्तर को भी प्रभाव पड़ता है.

ऑक्सफेम रिपोर्ट में कहा गया है, “चूंकि विकास अच्छे स्वास्थ्य का परिणाम है, यहां तक ​​कि सबसे गरीब विकासशील देशों को भी स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए”.

देश में स्वास्थ्य सेवाओ की छवि को बेहतर बनाने के लिए, वर्तमान सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधी परियोजना केंद्र (PMBJPK) की शुरुआत की.

इसने PMBJPK के माध्यम से आम जनता को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएँ उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है. इन केंद्रों को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किया गया है. वह कम दरों पर उपलब्ध हैं लेकिन गुणवत्ता में महंगी दवाओं के बराबर हैं.

 

PMBJPK योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में, अधिकांश लोग प्राइवेट सेक्टर से दवाइयाँ खरीदते हैं, जो कि स्वास्थ्य-संबंधी खर्च का एक बड़ा हिस्सा है.

स्वास्थ्य देखभाल की लागत के बोझ को कम करने के लिए, सरकार इस योजना के साथ आई और जेनेरिक और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और सामर्थ्य को संभव बनाया.

उल्लेखनीय रूप से, यह 2008 में था जब सरकार जन औषधि योजना (JAS) के नाम से लोगों को जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने की योजना के साथ आई थी, हालाँकि, जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावकारिता के बारे में अनभिज्ञता के कारण, यह योजना सफल नहीं रही थी.

2015 में सरकार ने JAS योजना के उचित कार्यान्वयन की दिशा में काम करने का फैसला किया और नवंबर 2016 में, JAS का नाम बदलकर प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधी परियोजना रखा गया.

 

वर्तमान स्थिति क्या है?

बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनऔषधी केंद्र ने देश के नागरिकों को 1,668 करोड़ रुपये बचाने में मदद की है.

सड़क परिवहन और राजमार्ग, शिपिंग और रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री, मनसुख एल मंडाविया ने राज्यसभा को सूचित किया कि 31 दिसंबर, 2018 तक, देश के 35 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में 4677 PMBJPK कार्यात्मक हैं.

शुरुआत से लेकर दिसंबर 2018 के अंत तक 417 करोड़ रुपये (MRP) की अनब्रांडेड जेनेरिक दवाएं इन केंद्रों के माध्यम से बेची गई. यह बिक्री ब्रांडेड दवाओं के 2,085 करोड़ रुपये की बिक्री के बराबर है.

सरकार के अनुसार, जेनेरिक दवा की मांग बढ़ रही है और जनऔषधी केंद्र देश भर में प्रतिदिन 10-15 लाख लोगों की सेवा कर रहे हैं.

वर्ष 2020 तक, देश में कम से कम 2,500 और जनऔषधी स्टोर खोले जाएंगे. सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर कम से कम एक स्टोर ऐसा हो.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...