मेरी कहानी

मेरी कहानी : “पूरा देश सचिन तेंदुलकर का इंतजार करता है, लेकिन सचिन राम भंडारी के बनाये बैट का इंतजार करते हैं”

तर्कसंगत

Image Credits: Faces Of Bengaluru (Facebook)

April 18, 2019

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“मैं गांधीनगर में एक इमारत में रखरखाव का काम करता था, मैंने 1985 से वहां काम करना शुरू कर दिया था और मुझे इमारत में रोजमर्रा के कामों का ध्यान रखना पड़ता था. मुझे नहीं पता था कि मेरे खाली समय के दौरान क्या करना है, इमारत के पास ‘Players Choice’ की दूकान थी, मैंने उनसे बात की और उनके लिए क्रिकेट बैट मरम्मत करने का फैसला किया। जब मैंने पहली बैट की मरम्मत की तो मुझे 30 रुपये दिए गए थे, राहुल द्रविड़ जब अपने कॉलेज में थे, तब से वो मुझे अपने बैट बनाने को दे रहे हैं. मैंने 1996 से बैट की मरम्मत शुरू कर दी थी और अब यह 20 साल का अद्भुत अनुभव है और मेरे पास कोई गिनती नहीं है कि मैंने कितने बैट बनाए हैं” श्री राम भंडारी कहते हैं.

“मेरे पिता सेना में थे और वह एक स्वर्ण पदक विजेता थे, लेकिन उनके पैर में गोली लगी और इसलिए उन्हें वीआर (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेनी पड़ी. मैं 10 वीं कक्षा में फेल हो गया और इस वजह से गाँव वालों ने बात करना बंद कर दिया और मुझे यह कहते हुए ताने देने लगे कि ‘यार बच्चा बिगड़ गया है ये तो पढ़ा नहीं और दूसरे बच्चों को भी नहीं पढ़ने देगा. मैं उनसे नाराज़ था और इसलिए मैंने अपना गाँव गोरखपुर में काम करने के लिए छोड़ दिया था, वहाँ से पुनाघाट और वहाँ से मैं दिल्ली चला गया, मैंने वहाँ जो किया वह पसंद नहीं आया. वहाँ से मैं मद्रास आया और मैंने खुद से सोचा, मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ? मुझे बॉलीवुड का एक गीत याद आया जिसने मुझे बॉम्बे की याद दिला दी, मैं हमेशा से बॉम्बे जाना चाहता था और मैं मद्रास के बाद वहाँ गया. मुझे नहीं पता कि मुझे बंबई में माहौल पसंद क्यों नहीं आया, इसलिए मैं वहां से पुणे चला गया. मैं पुणे रेलवे स्टेशन के एक प्लेटफार्म पर खड़ा था और मैंने बैंगलोर शहर का नाम देखा. जब मैं बैंगलोर आया था वह 1979 या 1980 का समय रहा होगा”

“जब मैं बैट बनाता हूं, तो खिलाड़ी उस बैट का उपयोग कर बहुत अच्छा स्कोर करते हैं और जब वे वापस आते हैं या मुझे याद करते हुए एक संदेश भेजते हैं कि  “धन्यवाद भंडारी सर”, ये मेरे लिए खुशी की बात है. मैं कोई पैसा नहीं माँगता हूँ या जो बैट बनाता हूँ उसकी कोई कीमत तय नहीं करता हूँ, सामने वाले को जो समझ में आये वह उसकी वो कीमत दे देता है.

“बैट बनाना एक कला है, हर खिलाड़ी की अलग क्षमता होती है और हर एक खिलाड़ी के पास विशेष रूप से उसके लिए एक बल्ला होना चाहिए. मुझे याद है एक बार जब श्री सचिन तेंदुलकर ने मुझे 2007 के दौरान 3 बैट बनाने को दिए थे, उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि ‘भंडारी, मैं आपका इंतज़ार करूँगा आप ज़रूर आना’ उन्होनें तब तक मेरा इंतजार किया जब तक मैं उनका बैट लेकर नहीं पहुंचा. वह चिन्नास्वामी स्टेडियम की लॉबी में मेरा इंतज़ार कर रहे थे, पूरी टीम होटल वापस जा चुकी थी, लेकिन वह वहां मेरा इंतज़ार कर रह थे. मुझे एक बार किसी ने कहा था, “पूरा देश सचिन तेंदुलकर का इंतजार करता है, लेकिन सचिन राम भंडारी के बनाये बैट का इंतजार करते हैं”

 

“I used to be the maintenance man at a building in Gandhinagar, I started working there from 1985 and I had to take care…

Posted by Faces of Bengaluru on Thursday, 31 August 2017

 

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