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हैदराबाद की एक NGO गरीब बच्चों को हर सप्ताह जिंदगी के नये तरीके सिखाती है

तर्कसंगत

April 21, 2019

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हैदराबाद के बांडीमेट गवर्नमेंट हाई स्कूल के छात्रों की आँखें भर आयी जब अपने संगीतमय अभिनय के बाद उन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट सुनी. उन्होंने बिजली के उपकरण से सुरक्षा उपायों के महत्व पर ध्यान आकर्षित करने के लिये एक नाटक को चित्रित, निर्देशित और कोरियोग्राफ करके प्रदर्शित किया जिसे उन्होंने अपने दोस्त की याद में बनाया था जिसकी बिजली के झटके के कारण जान चली गयी थी.

दस से बारह साल के सरकारी स्कूली छात्रों से ऐसे नाटक की किसी को उम्मीद नहीं थी. ऐसी ही छिपी हुई प्रतिभाओ और क्षमताओं को बाहर लाने और युवाओं में जोश भरने का उद्देश्य “Camp Diaries” रखती है जिसके पीछे मिलिंद चंदवानी का दिमाग है. इस अद्भुत नाटक को भी ‘कैम्प डायरीज’ के लोगों ने प्रशिक्षित और प्रेरित किया था.

कैम्प डायरी(Camp Diaries)

युवाओं के एक समूह द्वारा संचालित यह NGO सरकारी और कम आय वाले निजी स्कूलों में शिविरों का आयोजन करता है जहाँ बच्चों को संगीत, वाद्ययंत्र, नृत्य, नाटक, कला और विज्ञान प्रयोगों जैसी विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराया जाता है. बच्चों को यह चुनने की आजादी दी जाती है जो उनके अनुकूल हो और जिसे वो पसंद करते हों. पांच सप्ताह के भीतर उन्हें उनकी पसंद की गतिविधियों में प्रशिक्षित किया जाता है. बच्चों को अपने कौशल का सम्मान करने में मदद की जाती है और शो का आयोजन करके उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया जाता है जो जनता के लिये खुला हैं और जिसके YouTube चैनलों को खुद बच्चे चलाते हैं.

 

कैम्प डायरी के पीछे की कहानी

एक IT की नौकरी से शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता बने मिलिंद चंदवानी ने एक ऐसी स्थिति का सामना किया जहां उनके पढ़ाये दो छात्रों को ‘टीच फॉर इंडिया’ के माध्यम से एक सरकारी शिविर में प्रशिक्षण के लिये चुना गया जबकि जो बच्चे विशेष रुचि रखते थे वे पीछे रह गये थे.

मिलिंद बताते हैं “आज की दुनिया के सपनों की एक कीमत होती है और सरकारी स्कूल के बच्चे के लिये कीमत चुकाना संभव नहीं है.” यह तब था जब इसने मिलिंद ने समझा कि ये बच्चे सीखने के लिये अलग-अलग जगहों पर नहीं जा सकते हैं लेकिन उस सीख को उनके स्कूलों में लाया जा सकता है. उनकी सोच ने अखिल भारतीय संगठन “कैम्प डायरीज” की शुरुआत की.

हैदराबाद में मिलिंद, उनके चार अन्य दोस्तों और थोड़े जिज्ञासु बच्चों के साथ शुरू हुआ ‘कैंप डायरीज’ आज 1000 से ज्यादा स्वयंसेवकों के साथ चार प्रमुख शहरों में लगभग 3000 बच्चों की सहायता करता है.

कैंप डायरीज, हैदराबाद की प्रमुख ‘संस्कृति’ मानती हैं “बच्चों को केवल मुख्यधारा की शिक्षा तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिये.” 21 वर्षीय अग्रदूत बताते हैं “हमें विभिन्न कौशल सीखने का अवसर और आर्थिक क्षमता मिली है इसलिये हमारा यह कर्तव्य है कि हम उसे लोगों के साथ साझा करें.”

तर्कसंगत के साथ बात करते हुये मिलिंद ने एक उत्साही छात्र, इमरान को याद करते हुये बताया “वह अपने सहपाठियों में सबसे बड़ा था. जब वे उससे पहली बार मिले थे तो वह स्वयं के प्रति अजागरूक और अनिश्चित था. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और इमरान ने कैंप डायरीज में नृत्य का प्रशिक्षण लिया, वह अपने साथियों के बीच एक भरोसेमंद नेता के रूप में परिवर्तित हो गया. जिसके बाद उसने अपनी कला को स्कूल के प्राथमिक छात्रों को सिखाने के लिये “चिल्ड्रन कैंप डायरीज” नामक अपना एक प्रोजेक्ट शुरू किया.

संस्थापक बताते हैं “जो बदलाव वे देखना चाहते थे वही बदलाव आज इन बच्चों में देखकर मुझे गर्व महसूस होता हैं और ये बच्चे ही मुझे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं.”

कैम्प डायरी वर्तमान में हैदराबाद, बैंगलोर, चेन्नई और अहमदाबाद में चल रही है जो अपने शहरों के भीतर संगठन के मामलों का प्रबंधन करती है. संगठन के लिये उनकी भविष्य की योजनाओं के बारे में हमारे सवाल के जवाब में संस्थापक का कहना है कि वह ग्रामीण इलाके तक पहुंचना चाहते हैं जहाँ अवसर और संसाधन कम हैं लेकिन प्रतिभाओं  बहुत ज्यादा हैं.

 

तर्कसंगत के विचार

कैंप डायरीज की इस शुरुआत के माध्यम से कमजोर और आर्थिक वर्ग के बच्चों के लिये नया रास्ता खुला है जिन्होंने शायद कभी कला की दुनिया को देखने का सोचा होगा.

यह सराहनीय है कि एक ऐसी दुनिया में जहां युवा अपनी शिक्षा, करियर और सामाजिक जीवन का प्रबंधन करने के लिए कम समय लेते हैं, कैंप डायरीज़ के गतिशील स्वयंसेवक, युवा पीढ़ी को बेहतर कौशल सेट बनाने और उन्हें कैरियर के विकल्प देने के लिये अपना समय दे रहे हैं. तर्कसंगत इस संगठन के प्रयासों की सराहना करता है.

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