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मिलिए कर्नाटक के उस शख्स से, जो घड़ी बनाने से कैदियों को सुधारने और नदियों को पुनर्जीवित करने का काम कर रहे हैं

तर्कसंगत

Image Credits: The Art Of Living/Facebook

April 22, 2019

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31 वर्षीय ए.वी. प्रवीण, मांड्या के अरेकेरा ग्राम से, एक वांटेड अपराधी और बेंगलुरु के लगभग सभी पुलिस स्टेशनों में कुख्यात था, जिस पर डकैती के 14 मामले और 15 चेन-स्नैचिंग के मामले दर्ज थे. आज, हालांकि, वह एक परियोजना के प्रमुख समन्वयकों (कोऑर्डिनेटर) में से एक है, जो वेदावाथी नदी और उसके क्षेत्र को जीवन देने का काम कर रहे है. विशेषज्ञ की सहयता के साथ, अब वह चिकमगलूर के घने जंगलों से जाते/गुजरते हुए आपको यह दिखा सकते हैं कि भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए यह परियोजना की एक सफलता की कुंजी है.

हालांकि, यह कहानी प्रवीण के बारे में नहीं है. यह कहानी उस आदमी के बारे में है जिसने प्रवीण को उस आदमी के रूप में बदल दिया जो वह आज है. एक कार्यशाला में अपराधियों के लिए, प्रवीण नागराज गंगोली नाम के एक व्यक्ति से मिले, और उस मुलाकात ने उनके जीवन को अच्छे कार्य के लिये बदल दिया.

 

नागराज गंगोली, आर्ट ऑफ लिविंग में फुल-टाइम प्रशिक्षक है

एचएमटी रिस्टवॉच(हाथ में पहनने वाली घडी) को अस्सेम्ब्ल(जोड़ने) करने से लेकर कैदियों को सुधारने और सुंदर चादरे बनाने वाले किसानों के साथ काम करके उन्हें एक अच्छा जीवन स्तर प्रदान करने के लिए, नागराज गंगौली एक युद्ध जैसी जंग लड़ रहे हैं ताकि सभी तरह से उनके जीवन को बेहतर बनाया जा सके. किसानों की मदद करने के उनके प्रयास ने कर्नाटक में दो नदियों को पुनर्जीवित करने का काम किया: वेदवती और कुमुदवती, जो भविष्य में बैंगलोर के पानी की कमी को हल करने का वादा करता हैं.

15 साल की उम्र में, हरिजन के साथ घूमने के कारण नागराज को अपने परिवार के क्रोध का सामना करना पड़ा. लेकिन इससे उनका जीवन के प्रति दृष्टिकोण नहीं बदला.

नागराज एक समय HMT रिस्टवॉच को अस्सेम्ब्ल करने वाले व्यक्ति थे, उसके बाद वह आत्मविश्वास और दृढ़ता के साथ जीवन के दृष्टिकोण को समझते हुए उस पर कार्यरत हो गये. आज, वह दृढ़विश्वास के साथ कहते है कि कर्नाटक में नदियों के पुर्नजीवन में उनके काम ने तमिलनाडु के साथ सदियों पुरानी कावेरी जल विवाद सुलझाया और अब से दो साल बाद यह विवाद पूरी तरह से खत्म हो जायेगा ऐसी संभावना है.

हालाँकि, 2004 तक, नागराज द आर्ट ऑफ़ लिविंग में एक फुल-टाइम प्रशिक्षक थे, जो विभिन्न लोगों और समुदायों के लिए एक खुश और तनाव मुक्त रहने के लिए ध्यान और जीवन साधना सिखाते थे – जिसमे दलित समुदायों से लेकर पुलिस तक, यहां तक ​​कि बड़े अपराधियों से लेकर और राज्य के ब्यूरोक्रेट्स जो अपने काम से खुश नहीं थे, और उन्होंने शुरू में इस तरह के कार्य करने वालो के साथ जुड़ने से भी इनकार कर दिया था. झुग्गियों, जेलों और गाँवों में नागराज द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की बदौलत, हजारों लोगों ने अपने जीवन को नए सिरे से आत्मसम्मान, गरिमा और ईमानदारी के साथ पुनर्जीवित किया है. उदाहरण के लिए, प्रवीण अपने व्यवहार में सुधार के लिये अब एक सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं और उन्होंने पुलिसकर्मियों से भी काफी प्रशंसा अर्जित की है, जिनमें पुलिस महानिरीक्षक (IGP) आलोक कुमार शामिल हैं.

 

 

अपनी परियोजनाओं के लिए धन प्राप्त करने में काफी कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (नरेगा) योजना के बारे में पता लगाया, जो सरकार के लिए महत्वपूर्ण और स्थानीय रूप से प्रासंगिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक विधायी जनादेश है. अधिनियम के तहत, सरकार स्थानीय लोगों को रोजगार की गारंटी भी प्रदान करती है.

लेकिन उनका टर्निंग पॉइंट, वस्तुतः और आलंकारिक रूप से, 2011 में आया जब उन्होंने अपने जिले के लक्ष्मीपुरा गांव में 100 छोटी-मोटी खेती वाले कृषक परिवारों की मदद के लिए एक छोटे से प्रोजेक्ट पर काम किया, जिससे भूजल स्तर में बहुत बड़ा सुधार हुआ, उसमे 350 फीट के जल स्तर से 80 फीट तक आ गया. उन्होंने देखा था कि पानी की कमी की चुनौती को सिर्फ़ वैज्ञानिक दृष्टिकोण में बदलने से यह समस्या हमेशा के लिये स्थायी रूप से कैसे हल की जा सकती है. बाद में उन्हें पता चला कि जब मानसून अच्छी बारिश देने में विफल रहता है, तब भी पानी की कमी का समाधान इस तरह से किया जा सकता है. यह सबक तीन साल बाद आया जब उन्होंने आर्ट ऑफ़ लिविंग के नदी पुनर्जीवन परियोजना के तहत वेदावाथी बेसिन परियोजना पर काम शुरू किया. उस वर्ष नियमित मानसून की लगभग एक तिहाई बारिश के साथ, जिन हिस्सों में इन परियोजनाओ को लागू किया गया था, वहां के भूजल में 700-1200 फुट से 100-150 फुट तक वृद्धि देखी गई. इस सफलता के साथ, उन्होंने परियोजना के दूसरे चरण पर काम करना शुरू कर दिया. अब 1,097 गांव, 24 ग्राम पंचायत और 25 लाख लोग शामिल हैं.

 

 

नदियों के पुनर्जीवन के लिए नागराज का प्रयास

कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों से अपनी यात्रा के दौरान, नागराज ने देखा कि गांवों में पानी के संकट की समान कहानी थी. 3000-4000 मिमी की अच्छी बारिश के बावजूद, हर जगह पानी की भारी कमी थी. नदियाँ, तालाब और बोरवेल सूख गए थे.

जब उन्होंने पाया कि चिकमगलूर में पानी में फ्लोराइड की मात्रा बहुत अधिक है और पीने के लायक नहीं है, तो नागराज ने गाँव के प्रधान और युवाओं के साथ बैठक की, जिन्होंने गाँव के तालाबों की सफाई करने और बारिश के पानी को स्टोर करने के लिए आस-पास के क्षेत्र में रैलियां की. इस साफ पानी को पाइपों के माध्यम से छिद्रित गड्ढों तक पहुंचाया गया. 20 नए तालाब बनाए गए, जिसके परिणामस्वरूप भूजल स्तर स्वाभाविक रूप से ऊपर आया. रोजाना बर्बाद होने वाले लगभग 8,000 लीटर पानी का उपयोग अब भूजल पुनर्जीवित करने और पानी के स्तर को ऊंचा रखने के लिए किया जाता है.

लोगों और शासित व्यक्तियों (ग्राम पंचायत और ग्राम सभा) द्वारा सामुदायिक भागीदारी ने न केवल जटिल समस्याओं का एक आसान समाधान प्रदान किया है, बल्कि ग्रामीणों को भी सशक्त बनाया है. परियोजना की सफलता ने सरकारी अधिकारियों को कास्ट इफेक्टिव तकनीक को सीखने और चिकमंगलूर के अन्य हिस्सों में इसे लागू करने के लिए प्रेरित किया है.

 

 

वर्तमान में, नागराज कुमुदवाथी नदी बेसिन में आर्ट ऑफ लिविंग के वालंटियर्स, कुछ पर्यावरण विशेषज्ञ, जल संचरण विशेषज्ञों, ग्रामीणों की मदद से इस विशाल नदी के पुनर्जीवन परियोजना के लिये व्यस्त है. कुमुदवती नदी जो कभी बेंगलूरु शहर के 276 गांवों और एक बड़े हिस्से को पानी की आपूर्ति करती थी, बड़े पैमाने पर वनों की कटाई, नीलगिरी/युकलिप्टस के रोपण, रेत खनन और तेजी से शहरीकरण के अन्य दुष्प्रभावों के कारण धीरे-धीरे ख़त्म हो रही है.

अपने गुरु श्री श्री रविशंकर के आध्यात्मिक ज्ञान का साथ होने की वजह से, नागराज को आगे बढ़ते रहने की शक्ति और दृढ़ता मिली है. नागराज ने तर्कसंगत के साथ बातचीत में कहा, “मैं श्री श्री द्वारा सिखाई गई तीन बातों को अपने दिल में रखता हूँ. सबसे पहले, शरीर को दूसरों की सेवा करने के लिए ईश्वरीय साधन के रूप में देखें. मैंने पहले ही अपने अंगों को अस्पताल में दान कर दिया है. दूसरा, किसी से कोई उम्मीद नहीं करे, और तीसरा, लोगों और स्थितियों को वैसे ही स्वीकार करें जैसा कि वह हैं”.

नदी के पुनर्जीवन कार्य के रूप में, नागराज वर्तमान में मालाप्रभा और तुंगभद्रा जलग्रहण क्षेत्रों में सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रहे है, जो गडग जिले में 122 पंचायतों और 317 गांवों को कवर करता है.

तर्कसंगत नागराज गंगौली की सराहना करता हैं कि उन्होंने समाज को बेहतर बनाने के लिये अथिक ईमानदार प्रयास किये.

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