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रिपोर्ट: अंतर्राष्ट्रीय भाव के उतारचढ़ाव के बावजूद चुनाव से पहले पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने बंद हो जाते हैं

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Image Credits: Dainik Bhaskar

April 22, 2019

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लोकसभा चुनाव के दो चरण पूर्ण हो चुके हैं और लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए नित नए तरीके आजमा रही हैं. ऐसे में अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर बरबस अपनी ओर ध्यान खीचती है. रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले साल यानि मार्च 2018 से अप्रैल 2019 तक डीजल पेट्रोल के मूल्य में मामूली बढ़त हुई लेकिन अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में औसतन 9 फ़ीसद की बढ़ोतरी हो चुकी है.

यह असामान्य इसलिए है क्योंकि सरकार और मुख्य पेट्रोलियम कंपनियां अक्सर मूल्य बढ़ने पर बाज़ार पर शासकीय नियंत्रण ना होने की बात करती हैं. सभी को यह याद दिलाया जाता है कि भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य, बाज़ार आधारित है अतएव उन पर किसी भी प्रकार का उतार चढ़ाव करना व्यापार की मूल भावना के विरुद्ध होगा.

हिंदुस्तान टाइम्स, पिछले वर्ष के ऐसे कुल चार उदाहरणों को उल्लेखित करते हुए बताता है कि कैसे चुनाव करीब होने पर अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के मूल्य में बढ़त होने पर भी, भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य लगभग स्थिर रहते हैं. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय अप्रैल से मई 2018 के दौरान जहां अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के मूल्य में 11% की बढ़ोतरी हुई वहीं भारत में पेट्रोल उत्पादों पर मात्र 1% बढ़ोतरी दर्ज़ की गई.

इससे पहले गुजरात चुनाव से पहले, जो दिसंबर 2017 में संपन्न हुए, अक्टूबर नवम्बर में अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के मूल्य में 10% की बढ़ोतरी हुई वहीं भारत में औसतन 1% बढ़ोतरी हुई. समान व्यवस्था को लागू करते हुए, सितंबर से अक्टूबर 2018 के बीच अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार के 8% बढ़त के मुकाबले, घरेलू तेल बाज़ार की 2% की बढ़त देखी गई. हालांकि इसी समय, अक्टूबर 2018 के पहले हफ्ते में सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी पर 2.5 रुपए प्रति लीटर कटौती की घोषणा भी की थी जो संभवतः इस दौरान मूल्य ना बढ़ने का भी कारण हो सकता है.

अब यहां काबिल – ए – गौर बात यह है कि तेल उत्पादों के बाज़ार अधीन होने पर भी, जो मूल्य बढ़ने पर अप्रत्यक्ष रोक लगा दी गई है उस नुक़सान की भरपाई किसी राजनीतिक पार्टी के चुनावी चंदे या इलेक्ट्रोल बॉन्ड से नहीं होने वाली. ऐसे में चुनावी प्रक्रिया संपन्न होते ही अगर पेट्रोल डीजल की कीमत फ़िर आसमान छूने लगे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

लेखक: आयरा अविशि

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