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कश्मीर: फोन पर डॉक्टर के निर्देशों को सुनकर, सीआरपीएफ जवान ने पोल ऑफिसर की जान बचायी

तर्कसंगत

Image Credits: Hindustan Times

April 23, 2019

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कश्मीर में 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान एक सीआरपीएफ जवान एक कश्मीरी मतदान अधिकारी के लिए एक जीवन रक्षक परी बन गया. गुरुवार को चुनाव अधिकारी को दिल का दौरा पड़ा और मौके पर एक सीआरपीएफ जवान ने सीपीआर प्रदान करके अधिकारी की जान बचाई (Cardiopulmonary Resuscitation).

28 बटालियन के सीआरपीएफ कर्मी सुरिंदर कुमार बुचपोरा के सरकारी गर्ल्स स्कूल में बूथ पर तैनात थे. उन्होंने सीआरपीएफ डॉक्टर सुनीम को डायल किया, जब उन्होंने देखा कि पीठासीन अधिकारी अहसन-उल-हक अस्वस्थ महसूस कर रहे थे. शुरुआत में उन्हें प्राथमिक चिकित्सा दी गई, लेकिन वह एक मिनट के भीतर बेहोश हो गए और रात 9 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा.

 

जवान को रेड क्रॉस द्वारा प्रशिक्षित किया गया था

जवान कुमार उन 50 CRPF जवानों में से हैं, जिन्हें जरूरत के समय में चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा प्रशिक्षित किया गया था. उन्होंने 100, 102 और 108 नंबर को कॉल किया, लेकिन तत्काल मदद संभव नहीं थी, इसलिए उन्होंने कश्मीर में अपने डॉक्टर सुनीम खान को फोन किया.

 

डॉक्टर ने फोन पर निर्देश दिए

डॉक्टर खान ने तुरंत पता लगाया कि मरीज को दिल का दौरा पड़ रहा था और उन्होनें फोन पर कुमार को निर्देश दिया कि वह सीपीआर और मुंह से मुंह में कृत्रिम सांस दे, जो उसने एंबुलेंस के आने तक 50 मिनट तक किया. उन्होंने डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार 30 चेस्ट कंप्रेशन और तीन बार मुंह से सांसें उनके फेफड़ों में भरी थी.

एम्बुलेंस को पहुंचने में लगभग एक घंटा लग गया और हक को SKIMS (शेर – आई – कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) में ले जाया गया, वहां के डॉक्टरों ने कहा कि सीपीआर देकर सीआरपीएफ जवान के ने मरीज की जान बचाई थी.

खान ने टीओआई से कहा, ” सुरिंदर ने संकट के दौरान बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और सभी निर्देशों का सही ढंग से पालन किया. उन्होंने यह भी कहा कि यह चौथी बार है जब उन्होनें फोन पर निर्देश देकर जान बचाया था.

पानीपत के सुरिंदर कुमार (36) पहले लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में काम कर चुके थे और कश्मीर में अपनी दूसरी पोस्टिंग पर थे. उन्होंने टीओआई से कहा, “मैं इसका सबसे अधिक श्रेय अपने माता-पिता को देता हूं, जिन्होंने इन मूल्यों को विकसित किया है, और मैंने जो कुछ भी किया है, वह मेरी मौलिक परवरिश का परिणाम है.”

 

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