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श्रीलंकाई सरकार ने बताया कि घातक बम धमाकों के पीछे नेशनल तौहीद जमात का हाथ है, धमाके में 290 लोगों की जान गयी

तर्कसंगत

Image Credits: Indian Express

April 23, 2019

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21 अप्रैल की सुबह एक शांतिपूर्ण ईस्टर रविवार की सुबह लग रही थी तभी अचानक कोलंबो के सेंट एंथनी चर्च में पहला बम धमाका हुआ और फिर एक के बाद एक आठ बम विस्फोटों की विनाशकारी श्रृंखला ने श्रीलंका को हिला कर रखा दिया.

पहला बम विस्फोट सुबह लगभग 8:45 बजे रोमन कैथोलिक चर्च में हुआ और इसके बाद कोलंबो के सेंट एंथनीज श्राइन, नेगोमबो में सेंट सेबेस्टियन चर्च, बटियाकोल में सियोन चर्च, कोलंबो में तीन 5-सितारा होटलों शांगरी-ला, सिनमोन ग्रांड और किंग्सबरी में धमाके हुये. धमाकों ने पूजा करने वाले और होटल के मेहमानों की जान ले ली और कई छतें, चोटियों और खिड़कियों को टूटा छोड़ दिया. CNN से बात करते हुये कोलंबो के आर्चडिओसेस सामाजिक संचार निदेशक, फादर एडमंड टिलकेरत्ने ने बताया “आप दीवारों पर, गर्भगृह में और चर्च के बाहर गिरे हुये मांस के टुकड़ों को देख सकते हैं.” देहिवाला चिड़ियाघर के सामने देहिवाला-माउंट लाविनिया होटल में भी दिन में धमाका हुआ.

अंतिम धमाका डेमाटागोडा में महावीर गार्डन के एक घर में हुआ, जिसमें तीन पुलिस अधिकारी की जान चली गयी. अधिकारी लोग हमलों के सिलसिले में एक घर में मौजूद लोगों से पूछताछ कर रहे थे तभी दो धमाकों में एक उप-निरीक्षक और दो पुलिस के सिपाही की जान चली गयी.

ऐसे घातक धमाकों के बाद सोमवार सुबह तक पूरे देश में कर्फ्यू लागू कर दिया गया था. अल जज़ीरा के अनुसार, 10 साल पहले गृह युद्ध के बाद से ये सबसे खतरनाक हमले थे. हमलों से देश में ईसाई अल्पसंख्यक के खिलाफ हिंसा को बढ़ा दिया है. श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय के सचिव, हेमासिरी फर्नांडो ने कहा कि आज से 10 साल पहले उन्होंने ऐसा हमला देखा था.

रिपोर्टों के अनुसार, ईस्टर पर श्रीलंका में हुये धमाकों को 7 आत्मघाती हमलावरों का कारनामा माना जा रहा है. हालांकि, किसी भी आतंकवादी संगठन ने अभी तक हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने नेशनल तौहीद जमात को दोषी ठहराया है.

 

पुलिस ने 24 संदिग्धों को किया गिरफ्तार

श्रीलंका में इन घातक हमलों की किसी भी आतंकी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन अभी तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. श्रीलंका के रक्षा मंत्री, रुवेन विज्वर्दिन ने बताया कि अपराधी धार्मिक चरमपंथी थे. सोमवार को एक समाचार सम्मेलन में, स्वास्थ्य मंत्री राजिता सेनारत्ने ने कहा “सभी आत्मघाती हमलावर श्रीलंकाई मूल के थे, लेकिन अधिकारियों को विदेशी संबंधों पर होने पर संदेह है.”

 

पीड़ित लोग

ईस्टर के दिन रविवार को श्रीलंका में हुये बम धमाकों में 290 से अधिक लोग मारे गये हैं और सैकड़ों लोग घायल हुये हैं. अल जज़ीरा के अनुसार, मारे जाने वाले लोगों में ज्यादातर श्रीलंकाई थे. हालांकि अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में कम से कम 35 विदेशी भी शामिल हैं. श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पीड़ितों में तीन भारतीय, दो तुर्की नागरिक, तीन ब्रिटिश नागरिक, एक पुर्तगाली अन्य शामिल हैं.

 

सोशल मीडिया को किया बंद

श्रीलंका में ऐसे भीषण हमले के बाद, देश के सभी सोशल मीडिया साइटों को राष्ट्रव्यापी रूप से ब्लॉक कर दिया गया था. सरकार ने बताया कि ‘खबरों के पीछे झूठी खबरों को ऑनलाइन प्रसारित किया जा रहा था.’ फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और वाइबर को सरकार ने बंद कर दिया था. हालाँकि ट्विटर को बंद नहीं किया गया था क्योंकि कुछ सरकारी मंत्री इसके माध्यम से जानकारी ट्वीट कर रहे हैं.

 

विश्वव्यापी निंदा

दुनिया भर के नेताओं ने ईस्टर के दिन रविवार को श्रीलंका में हुये भीषण धमाकों पर दुःख और निंदा व्यक्त की है जिसमें 250 से अधिक लोग मारे गये और सैकड़ों अन्य घायल हुये हैं. दुःख व्यक्त करने वालों में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे, अमेरिका के प्रसिडेंट श्री डोलैंड ट्रम्प और श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे शामिल हैं.

 

 

मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिये Eiffle Tower की लाइट्स को देर मध्यरात्रि बंद कर दिया गया था. 

पिलर रहोला, जस्टिन सेबेस्टियन सहित कई हस्तियों ने इस हमले पर अपना दुःख व्यक्त किया.

 

कोलंबो एयरपोर्ट के पास मिले श्रृंखलित ज़िंदा बम

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबो हवाई अड्डे के पास श्रृंखलित पाइप बम मिले जिसे श्रीलंका वायु सेना ने डिफ्यूज कर दिया था. एक पुलिस सूत्र के अनुसार “यह एक घर का बना पाइप बम था जिसमें विस्फोटक एक पाइप में रखा गया था जो छह फुट का था और सड़क के किनारे पाया गया, जिसे वायु सेना ने सुरक्षित रूप से डिफ्यूज कर दिया है.”

 

श्रीलंका चेतावनी के बावजूद सावधानी बरतने में विफल

द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों के एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने 10 दिन पहले एक कट्टरपंथी इस्लामवादी समूह, नेशनल तौहीद जमात, का चर्चों के लिये खतरे के बारे में अलर्ट किया था. हालांकि, श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्हें इसके बारे में सूचित नहीं किया गया था.

भारत ने संभावित हमले के बारे में श्रीलंका को विशेष खुफिया जानकारी भी दी थी. समाचार 18 की रिपोर्ट के अनुसार, इस घातक आतंकी हमले को रोकने के लिये श्रीलंका सरकार ने कोई पर्याप्त सावधानी नहीं बरती.

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