मेरी कहानी

मेरी कहानी : मैं आज अगर उनके बच्चों के साथ यह सब करूं, तो उन्हें कैसा लगेगा?

तर्कसंगत

Image Credits: Your Tango

April 24, 2019

SHARES

मैं अंशुमान (बदला हुआ नाम), आज आपको मेरी ज़िन्दगी के कुछ ऐसे पहलु बताने जा रहा हूँ, जो बहुत ही दर्दनाक शर्मिदगी वाले हैं. जिसकी वजह से आज, मैं मन ही मन में घुटन शर्मिदगी महसूस करता हूँ. सोचता हूँ, क्या करू? ख़ुद से नफरत हो जाती हैं. एक तरफ़ यह भी सोचता हूँ, कि हमें शिक्षा, दिक्षा बड़ो से मिलती हैं. हम छोटे होते हैं, तो कुछ पता नहीं होता सही क्या हैं? और गलत क्या हैं? धीरेधीरे बड़े होते हैं, तो समझ आती हैं. फिर पता चलता हैं, कि यह तो बहुत ग़लत हुआ था, या फिर अच्छा हैं. उम्र के साथ एक अहसास महसूस होता हैं.  

मैंने कक्षा ग्यारहवीं तक की पढ़ाई, मेरे ननिहाल में पूरी की, फिर मैं जोधपुर गया, और मेरे परिवार वालों के साथ रहने लगा. यह साल 2016, जो मेरे लिए सबसे खराब रहा. जब मैंने बी.. करना शुरू किया था, तब से मुझे मेरा बचपन याद आने लगा हैं. यह सभी को याद आता हैं, कि हम बचपन में कैसे थे? क्या करते थे? या हमारे साथ क्या हुआ, सब कुछ. कुछ लोगो का बचपन अच्छा होता हैं, और कुछ लोगो का बुरा. ऐसा ही एक वाक्या मेरे साथ भी हुआ हैं, जिसका पता मुझे तीन साल पहले ही चल गया था.

मैं छोटा था, नासमझ था. इस समय में तेरहचौदह साल का था. उस समय में ननिहाल में रहता था. ननिहाल से स्कुल की छुट्टियों में, मैं मेरे गाँव आता था. घर आता था, तो अड़ोसपड़ोस में भी जाता था. जैसेदादा जी के घर; काका जी के घर; एक और अंकल हैं, जिनका नाम बच्चन सिंह हैं उनके घर भी जाता था. वो कैसे हैं? मुझे आज पता चला हैं. यह सब उन्हें भी याद दिलाने की कोशिश कर रहा हूँ. मुझे सेक्सुअल एब्यूज किया गया. मेरे अंकल, जो उम्र में मुझसे बड़े हैं. जब भी मैं इनके घर जाता था, वह मुझे अपने घर रोक लेते थे. वहाँ हम रात में छत के उपर सोते थे. मुझे आज भी सब कुछ याद हैं. गर्मियों में, हम खुद के घर में नही सोते थे, क्योंकि मेरे पिताजी घर पर नही होते थे, और घर रोड के नजदीक था, तो गर्मियों की अंधेरों में चोरों के डर से, हम अंकल के वहाँ सोने जाते थे. वहाँ जाने के बाद, मुझे अंकल ने बोला हम उपर सोते हैं, तो मैं उनके साथ उपर चला गया. मैं सो गया था, पर नींद नहीं आई थी. अंकल अचानक से मेरे पास आये और गलत जगह छूने लगे, गाल भी खाने लगे, छोटे बच्चें की तरह मुझे किस भी करने लगे. मैंने कहा, ऐसे मत करो, पर वो नहीं समझे, ऐसे करते हुए, उन्होंने मेरी पेंट भी उतार दी. मैं क्या करता, उनसे डर लग रहा था, फिर उन्होंने मुझे उल्टा कर दिया, और वो उपर सोने लगे, मुझे बहुत ही गलत करने को कह रहे थे. वो मेरा बलात्कार करते थे. एक तरफ़ मुझे बहुत दर्द हो रहा था. मैं उन्हें बार बार मना भी कर रहा था, पर वो नहीं मान रहे थे. ऐसा लगातार दो बार हुआ.

एक बार फिर मुझे वहाँ सोने के लिए बुलाया. मैं वहाँ चला गया, पर सोने से मना कर दिया. अंकल बारबार वहीं सोने का कहने लगे, पर मैं घर जाने लगा, तो वो मेरे साथ में चलने लगे. उनके घर से मेरे घर की दुरी मात्र पाँच सौ मीटर हैं. रात को काफ़ी अँधेरा था. हम आधे रास्ते में आये, तो उन्होंने मुझे रुकने को बोला, और उन्होंने मुझे जबरदस्ती ह्स्तमुथैन करने को बोला. मैंने मना किया, तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और जबरदस्ती की. मुझे बहुत बुरा लगा, और मन में डर भी बैठ गया. अब मैं क्या करता. ऐसी गंदी बात घरवालों को कैसे बताता. एक तरफ़ अंकल का डर और एक तरफ़ घरवालों का. अगर घरवालों को बताता तो वो मेरी बात समझ पाते या नहीं. नासमझ था, मैं तो इतना समझता भी नहीं था. उस समय तो मैं यह सब भूल गया था, पर आज मुझे सब कुछ याद रहा हैं. मेरी उम्र भी आज काफ़ी हो गयी है. आज मैं 23 साल का हूँ.

क्या सोच रहे हो? कैसा लगा होगा, उस बच्चें को जिसके साथ ऐसा हुआ. मैं आज कुछ अच्छा करने की कोशिश करता हूँ, तो यह सब याद जाता हैं और बस सोच में पड़ जाता हूँ, कि मैं ऐसा क्यूँ हूँ, मुझे घरवालो को बताना चाहिए था. वो मेरे अंकल थे, उन्होंने एक पल भी नहीं सोचा, कि मैं क्या कर रहा हूँ. आज वो ही अंकल मेरे सामने आते है, तो उनका चेहरा देख कर मुझे कैसा लगता होगा? सुनो मैं जब भी यह सोचता हूँ तो, चेहरा शर्म से झुक जाता हैं. खुद पर घिन्न आती हैं, कि मेरे साथ क्याक्या हुआ हैं. मर जाने का मन करता हैं. रो देता हूँ, क्योंकि मैं अब बड़ा हो गया. मैं आगे की सोचु, तो यह दिमाग को खत्म कर देता हैं. पिता समान अंकल ने ऐसे किया, उन्हें शर्म नहीं आई, उन्होंने एक पल भी नहीं सोचा, कि कल यह बड़ा होगा, हम साथ रहेंगे, इस पर क्या बीतेगी?

बड़े हमेशा अच्छी बातें सिखाते हैं, और मेरे साथ यह सब हुआ. अगर मैं आज उनके बच्चों के साथ यह सब करूं, तो उन्हें कैसा लगेगा? सोचो यह सब मेरे साथ हुआ हैं, जिसकी वजह से आज मैं बहुत परेशान हूँ. इतनी बड़ी दुनिया में, मेरे जैसे कितने होंगे?

समाज, परिवार कहते हैं, कि बड़ो से कुछ सीखो, पर बड़े अगर ऐसे सिखाने लग जाये, तो क्या कहोगे? अपनी लाइफ में, वो बच्चा बड़ा होकर आगे बढ़ने की सोचता है, तो ऐसी घटनाएँ उसे याद आती हैं और उसे खुद से ही नफरत हो जाती हैं. जिन्दगी के आखरी पड़ाव में वो टूट जाता हैं. उसका मन मर जाता हैं. जिन्दगी में वैसे भी बहुत परेशान था, अब यह सब याद आते हैं, तो बहुत दुःख होता हैं.

मेरे साथ यह बहुत गलत हुआ. मैंने कभी नहीं सोचा था, कि मेरी ज़िन्दगी में ऐसा कुछ होगा. किसी के साथ अगर ऐसा होता हैं, तो फिर कैसे दोनों लोग आमने सामने आते हैं. पूरी ज़िंदगी को खराब कर दिया, ऐसे लोग किसी के नही होते.

आज मैं Sport for Social Change Disabilities; Education; Health & Hygine; Gender and Drug Addiction पर काम कर रह हूँ और मेरी पहली मीटिंग जो हम बच्चों के साथ कर रहे थे वो थी “Child Protection Policy” और “Child Sexual Abuse” तब जैसे जैसे मीटिंग चल रही थी, और मुझे मेरा बचपन याद आने लगा. वो सारी बातें जो मेरे साथ ग़लत हुई. इसके साथ ही हमने रीसर्च की तो पता चला ऐसा छोटे बच्चों के साथ अपने अड़ोस पड़ोस और स्कूल में बहुत ज़्यादा होता हैं, और वो बच्चे डर एवं बदनामी के कारण किसी को बता नहीं पाते हैं. बाद में समय गुज़र जाता हैं, तो उन्हें यह सब याद आता हैं, फिर उसे फ़ेस करना बहुत मुश्किल होता हैं.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...