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साध्वी प्रज्ञा : गौमूत्र से मैंने अपना स्तन कैंसर ठीक किया है; विज्ञान इस दावे से सहमत नहीं

तर्कसंगत

Image Credits: Amar Ujala

April 24, 2019

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यदि आप भारत में रह रहे हैं, तो आपको कई प्रकार के अंध्विश्वास से वाकिफ होंगे. उदाहरण के लिए, राह चलते बिल्ली की रास्ता काट जाना, या रात में नाखून काटने के बारे में, या लड़कियां दोपहर में अपने बालों को खोलकर बाहर निकलना, पीरियड्स के वक़्त महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित होना. अभी के समय में वोटों को बटोरने के लिए लोगों को गुमराह करना कोई नई बात नहीं है.

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, जिन्हें भोपाल से चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी का टिकट मिला है ने अपने आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे को अपशब्द कहने और बाबरी मस्जिद टिप्पणी को ध्वस्त करने की बात से सुर्खियाँ बटोर रही हैं. अब एक नए व्यक्तव्य से वह फिर से मीडिया का आकर्षण बन रहीं हैं. वह विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए गोमूत्र को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती हैं.

मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा ने मालेगांव विस्फोट मामले में जिसमें छह लोगों की जान गई और 100 से अधिक घायल हुए, उसमें उन्होनें स्तन कैंसर का हवाला देकर बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मांगी. हालाँकि, जस्टिस पी.वी. हरदास और ए एस गडकरी की डिवीजन बेंच ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उनकी याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पता चला कि उन्हें ट्यूमर है और कैंसर नहीं है.

 

हाल ही में एक साक्षात्कार में राहुल कंवल ने देश में गायों की स्थिति पर जोर दिया, और तब अपने दावों का दृढ़ता से समर्थन करते हुए उन्होंने इस तथ्य को दोहराया कि पंचगव्य (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही, और घी का मिश्रण) ने उनके कैंसर का इलाज करने में मदद की है.

 

उन्होनें आगे उल्लेख किया कि यह उपचार एक वैज्ञानिक पद्धति है क्योंकि वह इसका एक जीवित उदाहरण हैं. उन्होनें आगे दावा किया कि गाय की पीठ पीछे से गर्दन की तरफ सहलाने से व्यक्ति का रक्तचाप बनाए रखने में मदद मिलेगी. उन्होनें कहा कि गाय “प्रसन्न” होगी और यह ब्लड प्रेशर को ठीक कर देगी. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वह कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को हराने के बाद गोमूत्र को लोकप्रिय बनाएंगी.

 

उनके इस  साक्षात्कार को चैनल पर प्रसारित किया गया था, फिर जैसी उम्मीद थी लोगों ने उनके दावों पर मजाक उड़ाया.

कैंसर के इलाज में गोमूत्र की दक्षता पर कई शोध विफल रहे हैं. हालांकि, द क्विंट ने अपनी ताजा रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के एक अध्ययन का हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि गोमूत्र कैंसर सेल को मारता है और उन्हें कई गुना होने से रोकता है. अनुसंधान जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय में किया गया था जहां यह दावा किया गया था कि देसी गाय का मूत्र चार प्रकार के कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करता था मगर उसमें स्तन कैंसर शामिल नहीं था. इसने दावा किया कि जाफराबादी भैंस, जर्सी गाय और होल्स्टीन फ्रेज़ियन के मूत्र में कैंसर को मारने वाले गुण नहीं पाए गए. विश्वविद्यालय ने पूर्व में सोने की गिर गाय का मूत्र पाए जाने की घोषणा की थी. लेकिन वैज्ञानिक और ऑन्कोलॉजिस्ट इन्हें स्वीकार करने से बचते हैं और अध्ययन में इस्तेमाल की जाने वाली कार्यप्रणाली के बारे में सवाल करते हैं.

 

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