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निर्भया मामले की जांच करने वाली पुलिस अधिकारी जो Netflix के ‘दिल्ली क्राइम’ से मशहूर हो गयीं

तर्कसंगत

Image Credits: India Today

April 25, 2019

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इंटरनेट पर Netflix की नई सीरीज़ ‘दिल्ली क्राइम’ की लोगो की बहुत सराहना बटोरी है. रिची मेहता द्वारा लिखित और निर्देशित, दिल को छूने वाली और शानदार ढंग से बनाई गई वेब सीरीज 2012 में हुये निर्भया रेप केस की घटना पर की गयी पुलिस जांच पर आधारित है जिसे 7-भागों में दर्शाया गया है.

16 दिसंबर, 2012 की ठंडी रात में, दिल्ली में एक चलती बस के अंदर एक मेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसके दोस्त से साथ बेरहमी से मारपीट भी की गई.  इस घटना के दिनों बाद उस लड़की ने दम तोड़ दिया था.

ऐसे अपराधिक कृत्य ने पूरे देश को हिला दिया था और तुरंत कार्रवाई के लिये लोग सड़कों पर उतर आये थे.

हालांकि, प्रतिशोध लेना और त्वरित कार्रवाई की मांग करना आसान था लेकिन दिल्ली पुलिस के लिये बढ़ते दबाव से निपटना आसान नहीं था. आलोचना करना आसान है आलोचना से निपटना नहीं. लेकिन दिल्ली पुलिस की एक अत्यंत मेहनती टीम ने अपराधियों को पांच दिनों के भीतर पकड़ लिया जिसने लोगों के सवाल की कोई गुंजाइश छोड़ी.

 

निर्भया के लिये छाया शर्मा की लड़ाई

‘दिल्ली क्राइम’ में मुख्य भूमिका में अभिनेत्री शेफाली शाह हैं जिन्होंने दिल्ली पुलिस के दक्षिण जिला की DCP वर्तिका चतुर्वेदी के रूप में उनके असाधारण प्रदर्शन ने अपराध की जांच करने वाली 41 सदस्यीय टीम का नेतृत्व किया है जिसने बहुत प्रशंसा बटोरी है. उनका चरित्र दिल्ली पुलिस के पूर्व DCP (दक्षिण जिला) IPS छाया शर्मा से है जिनकी निर्भीकता और निर्भया के लिए लड़ने की दृढ़ इच्छा शक्ति उन्हें सच्चा हीरो बनाती है.

तर्कसंगत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक छाया शर्मा से इस जघन्य अपराध की जांच के बारे में बात की, जिसने आज तक हमारे दिमाग पर एक छाप छोड़ रखी है.

छाया, जो अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उप महानिरीक्षक (जांच) हैं, को उनके ऑपरेटर अनूप सिंह ने घटना की रात लगभग 2:10 बजे फोन किया था उन्होंने अपने संचालक को कहा कि यदि कोई महत्वपूर्ण PCR कॉल उनके ध्यान में आये तो उन्हें फोन करे. उन्हें खुद कोई जानकारी नहीं रखनी थी क्योंकि छाया स्वयं कार्रवाई का अंतिम स्वरुप तय करेंगी.

छाया ने तर्कसंगत को बताया “सफदरजंग अस्पताल में, जहां पीड़िता को भर्ती कराया गया था, मैं इस घटना और चोटों के परिणाम के बारे में जानकर स्तब्ध रह गयी थी. मुझे अपराधियों को पकड़ने के लिये इस बात ने बहुत प्रेरित किया था क्योंकि उन्होंने पीड़िता को बिना कपड़ों के छोड़ दिया था जिससे यह और भी जघन्य और खतरनाक हो गया था. यह घटना दिल्ली में एक अच्छी रोशनी वाली सड़क पर रत 9:30 – 10:30 बजे चलती बस में हुआ था. महिला की चोटें किसी भी अन्य बलात्कार की चोटों की तुलना में कहीं अधिक भीषण थीं. यह पूरी तरह से ब्लाइंड केस था – जहाँ पीड़ित और अपराधी एक दूसरे के लिये अज्ञात थे. सुराग और सबूत अस्पष्ट थे.”

 

निर्भया के माता-पिता से मिलने के बाद छाया को सहानुभूति महसूस हुई. अपराध की बर्बरता ने उन्हें इस मामले के अपराधियों को पकड़ने के लिये जोश बढ़ा दिया था.

उन्होंने बताया “मैं टीमों को काम नहीं सौंपती थी और ना ही छोड़ सकती थी क्योंकि मुझे लगा कि मैं किसी भी स्थिति में किसी सुराग को जाने नहीं दे सकती थी. एक महिला के रूप में, मैं उन चोटों की प्रकृति को समझ सकती थी. वह उस दर्द को झेल रही है जिसमें उसी कोई भी गलती नहीं थी.”

 

एक अच्छी टीम ने मामले को सुलझाया

अपराधियों का पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था. केवल सफेद बस का एक अस्पष्ट विवरण था जिसके अंदर अपराध हुआ था. विवरण का मिलान करने वाली बसों को मिलाया गया पर अभियुक्तों को ढूंढना आसान काम नहीं था. छाया ने बताया की यह केस ‘सूखी घास के ढेर में एक सुई ढूंढने जैसा था.” लेकिन छाया के साथ टीम ने दृढ़ संकल्प के साथ पांच दिन में सभी संदिग्धों को पकड़ लिया था. वास्तव में, उनमें से कुछ को घटना के 24 घंटे के भीतर पकड़ लिया था. आरोपियों में राम सिंह, उसका भाई मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर और एक किशोर शामिल था. राम सिंह को बाद में तिहाड़ जेल में मृत पाया गया था. किशोर को तीन साल के कारावास को पूरा करने के बाद 2016 में रिहा कर दिया गया था और चार अन्य वर्तमान में मौत की सजा पर हैं.

“अच्छी टीम के काम, सभी सबूतों पर सावधानीपूर्वक और मेहनतवर्ती कार्रवाई के कारण, मेरे अधिकारियों ने जो काम पहले किया, वह बहुत मुश्किल लग रहा था. घटना के 18 घंटे के भीतर बस को ढूंढ लिया गया जबकि बस और ड्राइवर के सत्यापन में लगभग दो से तीन घंटे लगे थे. टीम में सभी प्रकार के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ थे इन सभी ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और अभियुक्त को पकड़ने और मुकदमे का पालन करने के लिये पूरी निष्ठा से काम किया. जिनमें से राजिंदर, के.पी. मलिक, वेद, गगन, नीरज, नरेश, प्रतिभा और अनिल कुछ नाम हैं.”

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने भयानक अपराध करने वालों के साथ कैसा व्यवहार किया है तो उन्होंने बताया “कई बार, जब वे अतार्किक बातें कहते थे और झूठ बोलते थे तो मुझे निराशा होती थी. हालांकि, वर्षों के अनुभव ने हमें इन भावनाओं से निपटना सिखाया है चाहे वह क्रोध हो या कुछ और.”

“दिल्ली पुलिस ने घटना के बाद, धैर्यपूर्वक सभी विरोधों को संभाला. वसंत विहार पुलिस स्टेशन और सफदरजंग अस्पताल में और दक्षिण जिले में  संयम के साथ प्रदर्शनकारियों और मीडिया कर्मियों को भी संभाला.”

 

“मैं विश्वसनीयता और अखंडता में विश्वास रखती हूं”

दिल्ली क्राइम के बारे में बोलते हुये और वर्तिका चतुर्वेदी के चरित्र के बारे में उन्होंने बताया “आपको वास्तव में उन लोगों से पूछना चाहिये जो मुझे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं. वेब सीरीज ने कुछ वर्णों के समामेलन के बावजूद लड़की और उसके परिवार के लिये न्याय की लड़ाई को चित्रित करने में एक सराहनीय काम किया है. अधिकांश सदस्यों के बीच परस्पर क्रिया और बारीक पेचियों को कलाकारों द्वारा बहुत ही स्वाभाविक रूप से चित्रित किया गया है हालाँकि वो लोग गैर-पुलिस व्यक्ति हैं. मुझे कई फोन आये कि जब उन्होंने शेफाली को देखा, तो वे भूल गये कि वह अभिनय कर रही है क्यूंकि उनका व्यवहार और बारीकियों में मेरा करीबी प्रतिबिंब दिखा है.”

पुलिस अधिकारी स्वर्गदूत या सुपरपावर वाली संस्थाएं नहीं हैं. हम सभी की तरह, पुलिस भी सिर्फ इंसान है. एकमात्र अंतर यह है कि जब हम अपनी लड़ाई लड़ने में व्यस्त होते हैं तो वे दूसरों के लिए लड़ाई लड़ रहे होते हैं. हम हर बार अपराध करते हैं और उनकी आलोचना करते हैं लेकिन हममें से कितने लोग वास्तव में हमें न्याय दिलाने के लिए किये गये जबरदस्त प्रयास से वाकिफ हैं?

यह सच है कि अपराधियों को पकड़ना केवल एक लंबी लड़ाई की शुरुआत थी. पुलिस अधिकारियों के रूप में उनका काम नियत प्रक्रिया का पालन करना और अच्छी तरह से प्रक्रिया से अभियुक्तों को कानून के दायरे में लाना है. लेकिन लड़ाई शुरू करने के लिये वास्तव में प्रतिबद्ध टीम के प्रयास के बिना, इस दुनिया में न्याय की कोई उम्मीद नहीं होती है.

छाया शर्मा ने बताया “दो बातें जिन पर मुझे विश्वास है वो ‘दृढ़ता और अखंडता’ हैं.” छाया साहस,आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का प्रतीक हैं, उन्होनें हमें मानने के लिए राज़ी कर लिया कि चाहे कितनी भी चुनौतियाँ क्यों न आएं, एक दृढ़ निश्चय ही हमें आसमान छूने की शक्ति देता है. तर्कसंगत उन्हें सलाम करता है.

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