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बैंगलोर : अटेंडेंस कम होने पर कॉलेज के प्रोफेसर ने 2 लाख की रिश्वत मांगी, कॉलेज ने प्रोफेसर को निलंबित किया

तर्कसंगत

Image Credits: Nyamdel/Local Circles

April 25, 2019

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23 अप्रैल 2019 को बैंगलोर के दयानंद सागर इंस्टिट्यूट में एक बड़ी ही शर्मसार करने वाली घटना सामने आयी. सैकड़ों छात्रों ने कॉलेज के प्रोफेसर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, आरोप है कि उन्होनें अटेंडेंस में कमी वाले छात्रों से 2 लाख की रिश्वत की मांग की थी. प्रबंधन ने प्रोफेसर को निलंबित कर दिया है.

PROFESSOR CAUGHT TAKING BRIBE OF Rs 2 LAKH

PROFESSOR CAUGHT TAKING BRIBE OF Rs 2 LAKHA prestigious college in Bengaluru boasting of various courses and state of the art facilities, is witnessing a scandal. The reason for the scandal has risen due to attendance shortage rules. A professor was caught accepting bribe in return for giving hall ticket to a student with attendance shortage.

Geplaatst door NEWS9 op Dinsdag 23 april 2019

 

 

दयानंद सागर संस्थान, बैंगलोर के छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे 85% की न्यूनतम अटेंडेंस बनाए रखें, जिसमें विफल होने पर छात्रों को उनके हॉल टिकट नहीं दिए जाते.  कॉमर्स डिपार्टमेंट के एचओडी सुनील कुमार नाम के एक प्रोफेसर पर उन छात्रों से 2 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है, जिनकी उपस्थिति 85% से कम थी और उन्हें दो लाख का भुगतान करते ही उनके हॉल टिकट देने का वादा किया गया था.

इस बारे में जानने के बाद सैकड़ों छात्र उग्र हो गए और प्रोफेसर के खिलाफ प्रदर्शन किया. उन्होंने प्रबंधन पर भी सवाल उठाए. हालांकि, पुलिस के कॉलेज में आने और प्रबंधन से बात करने के बाद छात्र शांत हुए, कॉलेज के छात्रों ने तर्कसंगत को यह पूरा प्रकरण बताया. न्यूज 9 ने बताया कि प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया है. प्रशासन ने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया. एक छात्र से रिश्वत लेते हुए छात्रों ने प्रोफेसर को रंगे हाथ पकड़ने का भी दावा किया है.

 

तर्कसंगत का तर्क 

यह निराशाजनक है कि कैसे छात्रों को अप्रत्यक्ष रूप से कॉलेजों से भ्रष्टाचार सिखाया जा रहा है और कैसे शिक्षक और प्रोफेसर खुद को अपने छात्रों के लिए रोल मॉडल के रूप में स्थापित करने में असफल हो रहे हैं. इस तरह की घटनाएं छात्र और शिक्षण संकाय के बीच सभी भरोसे को ध्वस्त करती हैं. शिक्षकों और छात्रों के बीच विश्वास और सम्मान शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. कॉलेज आजकल सीखने के बजाय केवल डिग्री-जारी करने वाले संस्थान बन गए हैं. भ्रष्टाचार किसी लोकपाल, नोटबंदी से नहीं बंद होगी. जब तक हर आदमी इस के खिलाफ खुद को लालच और लोलुपता से ऊपर नहीं उठेगा यह हमारे आने वाली पीढ़ियों को अपने चंगुल में जकड़ती रहेगी.

 

 

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