मेरी कहानी

मेरी कहानी: कन्नड़ क्विज शो के मशहूर एंकर कहते है, “मेरी आखिरी सांस तक, यह शो चलता रहेगा”

तर्कसंगत

Image Credits: Facebook/Faces Of Bengaluru

April 25, 2019

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“थाट अन्था हेली” कन्नड़ क्विज प्रतियोगिता है जहां विभिन्न प्रतियोगियों को पुरस्कार जीतने के लिए सामान्य ज्ञान पर आधारित प्रश्नों की एक श्रृंखला का उत्तर देने की आवश्यकता होती है. इस शो की मेजबानी सोमेश्वर नरप्पा करते है, जो सप्ताह के पांच दिनों में डॉक्टर के रूप में काम करते है, और वीकेंड्स में एक क्विज़मास्टर के रूप में तब्दील हो जाते है. नरप्पा का यह शो 15 वर्षों से अधिक समय से लोगों का दिल जीतने में कामयाब रहा है. “थाट अन्था हेली” 3,250 एपिसोड और 35,000 प्रश्न की श्रृंखला पूरी कर चुका हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह इसके लिए न के बराबर पैसे लेते हैं.

“एक फोनिंग शो को संभालने से लेकर एक क्विज़ शो की मेजबानी करने तक, जहां लोग मुझे कॉल कर सकते हैं और किसी भी स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में जानकारी ले सकते हैं, इसके अलावा हमने किताबों और उससे मिलने वाले ज्ञान को निशुल्क रूप में लोगों तक पहुँचाया है, तो अब मैं कह सकता हूँ कि मैंने एक लंबा सफर तय किया है. तो “थाट अन्था हेली” (say it instantly)  2002 में लॉन्च किया गया था और यह आज भी उसी मजबूती के साथ चल रहा है. मैंने कल ही एक शूट ख़त्म किया है.”

 

“क्विज़िंग कैसे और कब शुरू हुआ?”

उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “बचपन में, मैं एक रेडियो भी नहीं खरीद सकता था. इसलिए मैंने शिवाजीनगर की एक दुकान से एक एग्जाम पैड, टूटे हुए ट्रांजिस्टर और बहुत सारे कबाड़ की मदद से अपना रेडियो बनाया. मैंने यह सब इसलिए किया, ताकि मैं विविध भारती पर बोर्नविटा क्विज़ सुन सकूं. एकलौता अंग्रेजी रेडियो शो फिर वापस आया. मैं 70 के दशक की शुरुआत की बात कर रहा हूं. क्विज़िंग के साथ यह उनका पहला अनुभव था और वह कहते हैं, कि पहला प्यार हमेशा के लिए होता है.”

 

“आपके शो ने लिमका बुक में सबसे लंबे समय तक चलने वाले भारतीय टीवी शो की केटेगरी में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. आप इसे कब तक जारी रखने की योजना बना रहे हैं?”

उन्होंने अपनी मुस्कान में एक गर्व महसूस करते हुए कहा, “जब तक मेरी आखिरी सांस और जब तक दूरदर्शन यह कार्यक्रम जारी रखना पसंद करेगा, तब तक यह शो चलेगा”.

 

“शो में आपके द्वारा किए गए सबसे अच्छे मुकाबलों में से कौन सा हैं?”

“यह शो पैसे के लिए नहीं है. मैं इस शो को पूरे सच्चे दिल से प्यार करता हूँ, जिस वजह से मैंने इस शो को समय के साथ विकसित किया है. जब मैं जनता के बीच होता हूँ, तो 80 वर्ष से अधिक आयु वालो से लेकर एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी, मुझे पहचानते हैं और वह सभी मुझे बताते हैं कि वह मेरे शो को कितना पसंद करते हैं. मैं और मेरी पत्नी एक बार हुबली में एक रेस्टोरेंट में दोपहर का भोजन करने गए थे. हमने दोपहर का भोजन समाप्त किया और बिल का भुगतान करने के लिए चले गए और कैशियर ने कहा, सर आपका बिल किसी ने चुका दिया है. हमें पता नहीं था कि वह व्यक्ति कौन था और मुझे पता है कि 50 या 60 रुपए कोई बड़ी बात नहीं है. लेकिन यह मेरे लिए या मेरे शो के लिए उनका प्यार है. और इस तरह वह मुझे अपना प्यार जताते हैं और मैं हमेशा इसके लिए उनका आभारी रहूँगा. इस तरह की बहुत सी छोटी-छोटी कहानियां हैं”.

 

“आपका बचपन कैसा था?”

“जब मैं एक बच्चा था, तभी मैंने अपने पिता को खो दिया था. मेरी मां ने मुझे पाला और उन्होंने मुझे 10वीं तक की शिक्षा दी. उसके बाद उनके पास मुझे शिक्षित करने के लिए पैसे नहीं थे. तो उन्होंने मुझे बुलाया और कहा, देखो, मुझे पता है तुम पढ़ाई में बहुत अच्छा कर रहे हो, लेकिन हमारी मौजूदा वित्तीय स्थिति में, हम या तो हम दोनों के लिए भोजन का खर्च या तुम्हारी शिक्षा का खर्च उठा सकते हैं. तुम चुनों तुम्हे क्या चाहिये’. मुझे यकीन है कि यह उनके लिए सबसे मुश्किल पल रहा होगा. हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है. इसलिए मैंने अपनी शिक्षा का ध्यान रखने का फैसला किया. मैं पॉकेट स्केच बनाने में अच्छा था.

इसलिए मैं वर्तमान घटनाओं पर पॉकेट स्केच बनाता था और मल्लेस्वरम से एमजी रोड तक पैदल जाता था और इन स्केच को देने के लिए कन्नड़ प्रभा, प्रजा वाणी, संयुक्ता कर्नाटक जैसे सभी प्रकाशकों के पास जाता था. वह मुझे एक स्केच के लिए 3 रुपये का भुगतान करते थे. इस तरह से मैंने अपने खाली समय में थोड़ा सा पैसा कमाया और अपना PUC समाप्त किया. लेकिन इसके अलावा, मैं किताबें भी पढ़ता था. मैंने उन पर अपना विश्वास और भरोसा बनाये रखा और पब्लिक लाइब्रेरी को मैंने अपना दूसरा घर बनाया. उस गरीबी ने मुझे एक समर्पित आदमी बनने में मदद की जो कि मैं आज हूं.

मैं एक औद्योगिक चिकित्सक के रूप में सप्ताह के दिनों में 9-5 की नौकरी करता हूं और मेरे साप्ताहिक छुट्टी के दिन “थाट अन्था हेली” की शूटिंग के लिए समर्पित हैं. और न ही मेरे बेटे नचिकेत और न ही मेरी पत्नी रुक्मावती ने कभी भी इसके लिये शिकायत की है. पिछले 16 सालों में एक बार भी उन्होंने मुझे मिस नहीं किया. मैं उनकी गर्मियों की छुट्टियों या किसी पारिवारिक समारोह के लिए भी उनके साथ नहीं रह पाया हूं. लेकिन मैं इन पुस्तकों के माध्यम से व्यापक और दूर की यात्रा करने में कामयाब रहा हूं”. वह अपनी मेज पर पुस्तकों के ढेर की ओर इशारा करते हुए मुस्कुराकर बोले.

 

"From handling a phoning show where people could call me and find out about any health issues, to hosting a quiz show…

Geplaatst door Faces of Bengaluru op Woensdag 7 juni 2017

 

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