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इस तरह अधिकारियों ने स्वतंत्र भारत के प्रथम मतदाता, 102-वर्षीय श्याम शरण नेगी को किस तरह ढूंढ निकाला

तर्कसंगत

Image Credits: In Himachal

April 26, 2019

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जब भारत लोकतंत्र का त्योहार मना रहा है, वही पर हिमाचल प्रदेश में एक व्यक्ति को एक जिम्मेदार नागरिक का एक अतभुत उदाहरण देते हुए देखा गया. 102 वर्षीय श्याम शरण नेगी न केवल भारत के सबसे बुजुर्ग मतदाता हैं, बल्कि वह स्वतंत्र भारत के 1951 में पहले मतदाता की श्रेणी में भी आते हैं. तब से लेकर अब तक नेगी जी ने कभी भी एक चुनाव भी बिना वोट डाले नहीं जाने दिया.

100 वर्षीय वृद्ध, लोकतन्त्र में कट्टर विश्वास रखते है और जैसा कि उन्होंने 2019 के आम चुनावों के दौरान मतदान करने की तैयारी की है, उन्होंने दूसरों से भी ऐसा करने का आग्रह किया है. आज नेगी एक तरह की स्थानीय हस्ती बन गए हैं क्योंकि वह जहां भी वोट देने जाते हैं, मीडिया की चकाचौंध का विषय होते है. नेगी हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के निवासी है.

 

उन्हें कैसे ढूढा गया?

हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया कि नेगी 2007 तक सिर्फ एक बुजुर्ग मतदाता थे, जब भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी मनीषा नंदा, अब हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त मुख्य सचिव (सार्वजनिक निर्माण विभाग) ने पहली बार नेगी को एक फोटो मतदाता सूची में देखा. नंदा ने दैनिक से कहा, “मुझे किन्नौर में बहुत रुचि थी क्योंकि मुझे पता था कि देश में अन्य स्थानों से पहले बर्फीले क्षेत्र में मतदान होता है”. वह मतदाता सूची में फोटो को देख रही थी, जिसमें 90 साल के उम्र के मतदाता थे. जैसे ही नेगी की फोटो पर उनकी नजर पड़ी, नंदा ने चुनाव विभाग के अधिकारियों को नेगी से मिलने भेजा, जो उस समय 92 वर्ष के थे.

तत्कालीन किन्नौर के डिप्टी कमिश्नर, IAS अधिकारी एम सुधा देवी नेगी से मिलने गयी, जो कल्पा के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से थे.

नेगी ने बताया कि वह स्वतंत्र भारत के पहले मतदाता है और वह तब से अब तक एक भी चुनाव में मतदान करने से नहीं चूके हैं. यह एक सच्ची बात थी, क्योंकि देश के बाकी हिस्सों को छोड़कर, बर्फबारी के कारण कन्नूर जिले में मतदान पहले हुआ था. नेगी का जन्म 1 जुलाई 1917 को हुआ था और वह एक सरकारी स्कूल के शिक्षक थे. नेगी के 53 वर्षीय बेटे, चंदर प्रकाश ने सूचित किया था कि उनके पिता, जिन्हें स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव में चुनाव ड्यूटी सौंपी गई थी, उन्होंने अनुरोध किया था कि उन्हें पहले अपना वोट डालने की अनुमति दी जाए और उसके बाद अपने मतदान केंद्र में चले जायेंगे जहाँ के लिये उन्हें कर्तव्य सौंपा गया हैं. चंदर प्रकाश ने आगे कहा कि उनके पिता के अनुरोध को संबंधित अधिकारी ने स्वीकार कर लिया और इस तरह वह देश के पहले मतदाता बन गए.

इस तरह के दावों को सुनने के बाद मतदान अधिकारियों ने मामले पर शोध करना शुरू किया. चार महीनों की खोज के बाद, नई दिल्ली में अपने मुख्यालय में, नंदा ने पहले मतदाता होने का पता लगाया. उन्होंने कहा कि यह मामले पर पीएचडी खत्म करने जैसा था.

 

एक स्थानीय हस्ती

नेगी को चुनाव आयोग द्वारा सिस्टेमेटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (SVEEP) अभियान का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है. 2010 में, तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला ने उन्हें चुनाव आयोग की डायमंड जुबली समारोह में सम्मानित किया. 2014 के चुनावों के दौरान, Google ने अपने प्लेज टू वोट कैंपेन के लिए नेगी को दर्शाते हुए एक वीडियो बनाया, जिसने सभी से अपार समर्थन प्राप्त किया.

श्याम शरण नेगी ने आईएएनएस को बताया, “मैं सभी मतदाताओं, खासकर युवा पीढ़ी से अपील कर रहा हूं कि वह समय को फालतू/बेकार ना जाने दे और एक ईमानदार व्यक्ति का चुनाव करें जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा सके”.

चुनावी मौसम में मतदान करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार और जिम्मेदारी है. तर्कसंगत नेगी जी के प्रयासों की सराहना करता है और इस उम्र में भी मतदान जारी रखने के लिए उनकी इच्छाशक्ति को भी सलाम करता है. साथ ही, युवा मतदाताओं से मतदान के लिए बाहर जाने और लोकतंत्र के त्योहार में भाग लेने का आग्रह करता है, यह समाज को बेहतर बनाने के लिए आगे बढ़ने का एक रास्ता है.

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