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जयंत परब ई – वेस्ट से ऐसे कम्प्यूटर्स बना रहे हैं, जो हर किसी के पहुँच में हो

तर्कसंगत

Image Credits: Paisa Wapas

April 26, 2019

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हमारे आस पास ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे जो हमारी शिक्षा व्यवस्था की हिस्सा बने बगैर खुद को उसके बराबर उसके समय से पहले खड़ा किया है.

ऐसी ही एक उदाहरण हैं मु्ंबई के घाटकाेपर में रहने वाले जयंत जिन्होनें कबाड़ से कंप्यूटर बनाकर कई लोगों को आश्चर्य चकित कर दिया है. उनकी पढ़ाई में कोई खासा रूचि नहीं है, लेकिन वह एक ऐसा कंप्यूटर बनाना चाहता है.जो हर किसी की पहुंच में हो. अपनी कक्षा 9 की परीक्षा में असफल होने के बाद जयंत को स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, अब वह कॉरेस्पोंडेंस के माध्यम से कक्षा 10 के लिए पढ़ाई कर रहे है. वह कंप्यूटर कोर्स  में भाग लेना जारी रखना चाहते है और हाल ही में, हार्डवेयर नेटवर्किंग में एक कोर्स पूरा किया है.

 

 

जयंत ने अपनी ज़िन्दगी में कम्यूटर क्लास 3 में देखा था तब वह नहीं जानते थे कि उस समय की छोटी सी रूचि उन्हें इतनी दूर ले जाएगी. कंप्यूटर में रूचि आने के बाद उन्होनें अपने पिता से क्लास 5 में मोहल्ले के कंप्यूटर क्लास में दाखिला लेने की इच्छा ज़ाहिर की पिता भी खुश हुए. दाखिला हो गया कंप्यूटर स्कूल में देखा था मगर उस पर पकड़ मिली कोचिंग सेंटर में ही.

रविंद्र स्कूल, कॉलेज और ऑफिस से ई-वेस्ट कबाड़ एकत्रित करने का काम करते हैं, वह कहते हैं कि वह अपने बेटे के जन्म के समय एक ऑटो चालक थे. जयंत ने उन्हें स्क्रैप डीलिंग के कारोबार में उतरने के लिए प्रेरित किया. क्लास के बाद जयंत उन्हीं कबाड़ में अपना समय गुज़ारते, उससे उन्हें यह जानकारी मिली कि कौन सा पुर्ज़ा सही या ख़राब है, पिता ने बेटे को शौक को देख कर घर में सेकंड हैंड कंप्यूटर ला दिया. और उस पर इंटरनेट से उन्हें काफी मदद मिली.

 

  

2016 में, जयंत के स्कूल में बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट नाम का एग्जीबिशन था जिसमें उन्होंने एक मिनी-कंप्यूटर बनाया, जिसकी कीमत लगभग 2,500 रुपये है और जिसका वजन केवल 1.5 किलोग्राम है. जिसमें ईसीजी मशीन की 9-इंच की एलसीडी स्क्रीन का उपयोग किया जाता है और उनका मानना है कि इस कंप्यूटर का उपयोग संगठनों में किया जा सकता है क्योंकि इसमें कॉर्पोरेट उपयोगिता के लिए उपयुक्त सुविधाएँ हैं. 

इसके पहले भी जब वो  8 वीं कक्षा में था, तो उन्होनें अपने बड़े भाई की मदद से अपने तकनीकी कौशल का उपयोग करते हुए तीन कंप्यूटर बनाए. इस कंप्यूटर में, विंडोज एक्सपी, 7, और 10 जैसे विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जा सकता है. इन-बिल्ट वाईफाई, ब्लूटूथ और स्पीकर लगाए गए हैं. चूंकि यह कंप्यूटर ई-वेस्ट से बनाया गया है, इसलिए उसके काम में आने वाले पुर्ज़ों को कबाड़ से खोजने और मिलने में समय लगा.

 

 

 

जयंत कार्यालयों, स्कूलों, हाउसिंग सोसाइटियों और व्यक्तियों से ई-कचरा लेते हैं क्योंकि वे पुरानी मशीनों के जगह नए खरीदते हैं. वह अभी अपने पिता और भाई के साथ काम कर रहे हैं और उन्होनें पिछले कुछ वर्षों में ई-कचरे से लगभग 70 कंप्यूटर बनाए हैं. वो कंप्यूटर उनके पिता की दुकान में बेचे जाते हैं. इसके अलावा, वो रिफर्बिश्ड कंप्यूटर को बेचने के लिए लोगों और दोस्तों के संदर्भ का भी उपयोग करते हैं.

 

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