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बेंगलुरु: अपने शरीर को हिलाने में असमर्थ, इस छात्र ने बिस्तर से परीक्षा लिखने के बाद 72% स्कोर किया

तर्कसंगत

Image Credits: Times Of India

April 26, 2019

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शिक्षा हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और कर्नाटक के बेंगलुरु के निवासी कन्हैया एम इसे अच्छी तरह से जानते हैं.  द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वह मसल रिलेटेड बीमारी के कारण हिल तक नहीं सकते है, लेकिन यह उन्हें कठिन अध्ययन करने और 72% II PU परीक्षा में स्कोर करने से कोई रोक नहीं पाया.



बीमारी क्या है?

कन्हैया, जिसने एक राइटर की मदद से परीक्षा लिखी, ने बहुत अच्छे से परीक्षा पास की.  वह बीईएस पीयू कॉलेज, मल्लेश्वरम में एक छात्र है. कन्हैया को सात साल की उम्र में जेनेटिक डिसऑर्डर का पता चला था.  मस्कुलर डिस्ट्रोफी, रोगों का एक संचय है जो प्रगतिशील कमजोरी और मांसपेशियों के नुकसान की ओर ले जाता है. इस डिस्ट्रोफी में, सिस्टम में मौजूद असामान्य जीन प्रोटीन के उत्पादन को रोकता है जो स्वस्थ मांसपेशियों के निर्माण के लिए जरुरी है.


इतनी कम उम्र में एक गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद, कन्हैया ने कभी भी शिक्षा से मुंह नहीं मोड़ा.  उन्होंने स्कूल जाना जारी रखा. वह एक ग्लास स्क्रीन पर उलटा एक किताब रखता था और लेटते समय किताब पढ़ने के लिए अपना सिर ऊपर कर लेता था . उन्होंने पेज बदलने के लिए हर बार अपनी मां को फोन किया.



उनकी बिगड़ती हालत के बारे में उसकी माँ को चिंता है

उनकी मां, श्री लक्ष्मी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बताया कि वह नहीं चाहती थीं कि वह इस साल परीक्षा दें क्योंकि वह पूरी तरह से पेरेलायज्ड हो गए थे और उनकी आवाज मांसपेशियों की मजबूती की कमी के कारण अब सुनना संभव नहीं था.   उनकी मां ने आगे कहा कि उन्होंने एक दिन में केवल एक लेक्चर में भाग लेना शुरू किया क्योंकि वह लंबे समय तक व्हीलचेयर पर नहीं बैठ पाता था. उनकी हालत बिगड़ते ही कॉलेज में जाना उनके लिए बुरा सपना बन गया. उन्होने आगे कहा कि उसने बिस्तर पर परीक्षा दी और राइटर को जवाब दिया.  उन्होंने कहा, “जब वह ताकत खो रहे थे, तो वह हर विषय में सभी 100 अंकों के लिए सवाल का जवाब नहीं दे सकते थे.”



तर्कसंगत की शुभकामनाएं 

तर्कसंगत शिक्षा के प्रति कन्हैया के समर्पण की सराहना करता है.  हम चाहते हैं कि हमारे पाठक उनसे प्रेरणा लें. वह बस अपनी बीमारी का हवाला देकर परीक्षा देने से बच सकते थे, लेकिन उन्होनें ऐसा नहीं किया.  कन्हैया के जल्द ही बी कॉम कोर्स में शामिल होने की संभावना है. रमेश.के, जो कॉलेज के प्रिंसिपल हैं, उन्हें कन्हैया की उपलब्धि पर गर्व है.

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