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सैनिटरी नैपकिन के बुरे अनुभव के कारण, इन्होनें दोबारा उपयोग करने लायक सस्ते कपड़े के पैड बनाना शुरू किया

तर्कसंगत

April 29, 2019

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अभिरामी प्रकाश ने बताया, जब मैंने लगभग चार साल पहले कपड़े के पैड को उपयोग करना शुरू किया, तो मुझे आराम और उपयोगिता में अंतर महसूस हुआ. हालाँकि, मैं अपने परिवार और दोस्तों के साथ इस पर चर्चा करने में झिझक रही थी, क्योंकि मैं पीरियड्स के दौरान कपड़े को इस्तेमाल में लेने के एक पारंपरिक तरीके को उपयोग में ले रही थी”.

उन्होंने आगे कहा, लेकिन एक बार जब मैंने अपनी पसंद के बारे में बात करना शुरू की, तो मुझे सभी से अभूतपूर्व समर्थन मिला, क्योंकि उन सभी को मार्केट में उपलब्ध पैड के साथ परेशानी हो रही थी. वह किसी भी संतोषजनक विकल्प से अनजान थे.”

अधिक महिलाओं को कपड़े के पैड से लाभों को समझाने के लिए, अभिरामी प्रकाश ने जुलाई 2018 में पिराई की शुरूआत की, जो उच्च गुणवत्ता वाले, हाथ से बने हुए और कम लागत वाले कपड़े के पैड बनाती है.

तर्कसंगत के साथ बात करते हुए वह नियमित सैनिटरी नैपकिन के प्रतिकूल प्रभाव को साझा करती है और बताती है कि स्थायी मासिक धर्म के समय इसकी आवश्यकता क्यों है?

 

मासिक धर्म की शिक्षा का समर्थन करना

तमिलनाडु में एक 12 वर्षीय लड़की की स्कूल में पीरियड से शर्मसार होने के बाद आत्महत्या करने की खबर ने अभिराम प्रकाश को हिला दिया. प्रकाश ने बताया, “उसने अपने सुसाइड नोट पर, एक सवाल पूछा कि इस तरह के बर्ताव के लिए उसकी गलती क्या थी. जैसा कि मैंने बताया था, कि मैंने सभी महिलाओं के बीच मासिक धर्म के प्रति जागरूकता पैदा करने और सदियों पुराने अस्वीकारित विचारों और उसके अप्रासंगिक/अनौपचारिक कलंक को उखाड़ने के लिए का संकल्प लिया था.

 

 

मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में नेचुरोपैथी चिकित्सक के रूप में काम करते हुए, प्रकाश अक्सर ग्रामीण महिलाओं और युवा लड़कियों के लिए गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर जागरूकता अभियान चलाती थी. उन्होने पाया कि दूरदराज के गांवों की महिलाओं को सामान्य मासिक धर्म के बारे में बहुत कम जानकारी थी. वह बताती हैं, “मैंने समझा कि बीमारियों के बारे में बात करने से पहले, महिलाओं को सामान्य शारीरिक प्रक्रियाओं, शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तनों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए जो एक महिला अपने पूरे जीवनकाल में गुजरती हैं.”

 

कपड़े के पैड पर स्विच करना

केरल में, कचरा उठाने वाले आपसे पूछेंगे कि क्या आपके कचरे में सैनिटरी नैपकिन है. यदि हाँ, तो वह निश्चित रूप से इसे ले जाने से मना कर देंगे. हर महीने, उन कुछ दिनों में आपके लिए उपयोग किए गए पैड को निपटाने के नए तरीके खोजने के लिए एक अतिरिक्त परेशानी हो सकती है. क्या आप हर जगह डंप यार्ड/कूड़ाघर की तलाश में है या पैड को जलाने के लिए सोच रही है, ताकि उसे धुआं में उड़ाकर दूसरों से छुपाया जा सके, जो एक महिला के रूप में आपकी गरिमा को चोटित कर रहा है. भले ही हम उन्हें अपने स्वयं के यार्ड/कूड़ाघर के किसी कोने में दफनाते हैं, लेकिन इन कमर्शियल पैडों को सड़ने में लगभग 500 से 800 साल लगते हैं. वर्षा जल उनके माध्यम से रिसता है और भूजल को प्रदूषित करता है. हममें से बहुत कम लोग इस बारे में जानते हैं.

स्कूलों और ग्रामीण इलाकों में व्यापक अभियानों का आयोजन करते हुए, प्रकाश ने नियमित पैड के बारे में कई कम ज्ञात तथ्यों का खुलासा किया, जिनका हम सभी उपयोग करने के आदी हैं. प्रकाश बताती हैं, कमर्शियल नैपकिन के साथ मेरे अप्रिय व्यक्तिगत अनुभव के अलावा, मैंने सीखा कि एक महिला अपने जीवनकाल में मासिक धर्म के पैड्स से लगभग 130 किलोग्राम अपशिष्ट का उत्पादन करती है, जिसमें से अधिकांश प्लास्टिक की तरह नॉन-बायोडिग्रेडेबल है. कमर्शियल सैनिटरी नैपकिन में अधिक से अधिक रसायनों को शामिल किए जाने के साथ, यह प्रजनन अंगों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा रहा है.

 

बेदाग सफेद पैड्स का सच

चमकदार सफेद पैड को डाईआक्सिन के साथ ब्लीच किया जाता है, जो एक अत्यधिक विषैले पर्यावरणीय प्रदूषक है. अध्ययनों से पता चला है कि डाईआक्सिन योनि के स्वस्थ माइक्रोफ्लोरा और पीएच संतुलन को बदल देता है, और जिससे अत्यधिक पेट दर्द होता है, सूजन, हार्मोनल असंतुलन और यहां तक ​​कि एंडोमेट्रियोसिस को जन्म देता है. नियमित पैड के काले सच पर अधिक जानकारी के लिए, यहां पढ़ें.

 

कपड़े के पैड बेहतर क्यों हैं

पिरई में, साफ मुलायम कपड़े को हाथ से एक साथ तीन अलग-अलग आकार, लंबाई और बनावट में कपड़े के पैड बनाने के लिए उपयोगकर्ता के प्रवाह के स्तर के अनुसार तैयार किया जाता है. रसायनों से पूरी तरह से मुक्त, पैड में बायोडिग्रेडेबल पॉलीयुरेथेन की अंडरलाइनिंग होती है जो इसे रिसाव मुक्त बनाती है. पैड को बटन की मदद से लॉक किया जाता है, Pirai(पिराई) कपड़ा पैड नियमित पैड की तुलना में अधिक आरामदायक अनुभव देता हैं, जैसा कि प्रकाश आश्वासन देती है.

एक कपड़े वाले पैड को आसानी से धोया जा सकता है और दो साल तक पुन: उपयोग में लिया जा सकता है. यही नहीं, 2 साल के लिए कपड़े के पैड का एक सेट पिराई में लगभग 1200 रुपये में बेचा जाता है; जबकि नियमित रूप से सैनिटरी नैपकिन के लिए औसत खर्च दो साल में न्यूनतम 5000 रुपये होगा.

 

कपड़े वाले पैड के बारे में प्रश्नों और गलत धारणाओं को दूर करना

वह साझा करती है, पहली बार जब मैंने एक ग्रामीण शिविर में कपड़े के पैड के बारे में बात की थी, तो महिलाएँ मुझसे बहुत ज्यादा सवाल पूछ रही थीं. उनमें से ज्यादातर ने सोचा था कि कपड़े के पैड उतने ही अनहाइजीनिक होंगे जितने गंदे कपड़े के टुकड़े वह शुरू में इस्तेमाल करती थी.”

प्रकाश ने पूछा, हमारे संयमित रवैया से हमें लगता है कि मासिक धर्म का रक्त अशुद्ध है. मैं हमेशा सभी से इस पर जोर देती रहती हूं कि कैसे रक्त लार, बलगम या आंसू जैसे यह भी एक और शारीरिक तरल पदार्थ है. अगर आपको लगता है कि पीरियड्स में खून सिर्फ इसलिए गंदा आता है क्योंकि यह योनि से निकलता है, तो क्या आप एक नवजात शिशु को अपवित्र मानते हैं?

लोकप्रिय धारणा के विपरीत, कपड़े के पैड को धोना काफी आसान होता हैं. इस्तेमाल किए गए पैड को 10-15 मिनट के लिए साबुन के पानी में भिगोएँ, फिर निचोड़कर, धूप में सुखा दे. हालांकि, इसे धुलने के लिए गर्म पानी का उपयोग कभी न करें.

 

 

कैसे महिलाओं ने कपड़े के पैड प्राप्त किए

भारत में स्थायी मासिक धर्म को बड़े पैमाने पर मीडिया के माध्यम से लोकप्रिय बनाया जाना बाकी है. अभिरामी प्रकाश सभी उम्र की महिलाओं को कपड़े के पैड को उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है. उनके अपने अनुभव में, युवा लड़कियां बहुत ग्रहणशील थी और यहां तक ​​कि अपनी माताओं से भी कपड़े के पैड को उपयोग में लेने का आग्रह किया. मेनोपौजुल महिलाओं के लिए भी, कपड़े का पैड एक आराम का वरदान साबित हुआ है, क्योंकि उन्हें अप्रत्याशित(कभी भी) रक्तस्राव का सामना करना पड़ता है और लगभग हर समय उन्हें पैड का उपयोग करने की आवश्यकता होती है.

प्रकाश ने साझा करते हुए कहा, हालांकि, 25 से 35 वर्ष की युवा महिलाएं कपड़े के पैड का उपयोग करने के लिए काफी अनिच्छुक हैं क्योंकि वह इनकी प्रभावशीलता पर संदेह करती हैं, क्युकी वह मानती है कि यह उनकी व्यस्त जीवन शैली के अनुकूल नहीं है. मेरे पास अभी भी उन्हें मनाने के लिए एक लंबा सफ़र तय करना है”.

 

भविष्य की चुनौतियां

कमर्शियल सैनिटरी नैपकिन के साथ प्रतिस्पर्धा/कम्पटीशन करने के लिए सही सामग्री का पता लगाना अभिरामी प्रकाश के लिए पहली चुनौती थी. सही बनावट को सफलतापूर्वक हासिल करने के बाद, अबिरामी ने पेशेवर दर्जी के बजाय इन पैड बनाने के लिए स्थानीय महिलाओं को नियुक्त करने का फैसला किया. मेरा मुख्य उद्देश्य अधिक जागरूकता फैलाना था. कपड़ा मजदूरों की कला और विज्ञान को पूर्ण करने के लिए अकुशल श्रमिकों को प्रशिक्षित करना मेरे लिए एक और बड़ी चुनौती थी.

सभी के लिए संदेश

मासिक धर्म जागरूकता पीरियड्स पर होने वाली हर चर्चा का पहला और आखिरी बिंदु है. अभिराम प्रकाश पर जोर देता है, हमें एक सामान्य जैविक प्रक्रिया के कलंक को दूर करना होगा, और महिलाएं इसे अकेले नहीं कर सकती हैं. विपरीत लिंग वाले अक्सर इस विषय से दूर रहते है, वह इसे केवल महिला पर केंद्रित मुद्दा मानते है. जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है. तार्किक विचारधारा वाले पुरुषों को इसकी अधिक जागरूकता को प्रोत्साहित करने के लिए आगे आना होगा”.

 

अधिक जानकारी के लिए कृपया [email protected] पर लिखें या 9791501445 पर कॉल करें

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