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IRS अधिकारी जिन्होनें बनाया भारत का पहला वर्टिकल गार्डन रेलवे स्टेशन

तर्कसंगत

April 29, 2019

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 भारत का लुधियाना रेलवे स्टेशन देश का वर्टीकल गार्डन वाला पहला रेलवे स्टेशन बन गया है. हालांकि, यह पंजाब की एकमात्र जगह नहीं है जहां प्लास्टिक की बोतलों रीसायकल करके हरे रंग की एक दीवार खड़ी की जा रही है.

एक भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी, रोहित मेहरा के प्रयासों से, लुधियाना रेलवे स्टेशन, पंजाब के अन्य शहरों के उन स्थानों में से एक है जहां हरे भरे पौधों के साथ वर्टीकल गार्डन देखे जा सकते हैं. लुधियाना के आयकर विभाग के साथ भारतीय रेलवे के फिरोजपुर डिवीजन ने रेलवे स्टेशन पर वर्टीकल गार्डन का उद्घाटन आयकर दिवस के दिन किया गया. इस समारोह में कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया, जिनमें से आयकर आयुक्त (CCIT-लुधियाना) बिनय के झा भी थे जिन्होंने वर्टीकल गार्डन का उद्घाटन किया.

 

 

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इस मौके पर बिनय बताते हैं “रेलवे स्टेशन पर वर्टीकल गार्डन हमारे लिए एक विशेष परियोजना है. कुछ साल पहले आयकर दिवस 2017 में हमने एक हरे रंग का प्लास्टिक अभियान शुरू किया था. ऋषि नगर में हमारे कार्यालय से, बेकार प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग करके पहला वर्टीकल गार्डन बनाने का काम शुरू किया और उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.” रोहित मेहरा के साथ, बिनय झा भी लुधियाना में वर्टीकल गार्डन की आवश्यकता का पता लगाने में सहायक रहे हैं.

परियोजना में राज्य में कई अन्य लोगों ने और रेलवे विभाग ने भी रोहित मेहरा का सहयोग किया था. तर्कसंगत  ने 40 वर्षीय व्यक्ति से अपनी यात्रा के बारे में और वर्टीकल गार्डन के निर्माण में बात की.

 

सिंगापुर की प्रथाओं से मिली प्रेरणा

रोहित मेहरा को इस तरीके से पेड़ लगाने की रुचि पहली बार तब जगी जब वो सिंगापुर गए थे. हरे रंग की पट्टियों में ढँकी छतों और दीवारों ने उन्हें उत्साहित किया था. रोहित ने बताया कि सिंगापुर में लोग पौधे रोपने के लिए महंगे कंटेनरों का उपयोग करते हैं. वह पहले अपने घर में उस तकनीक को लागू करना चाहते थे. जिसके बाद उन्होंने और उनकी पत्नी गीतांजलि ने शहर के अन्य हिस्सों में भी इस पहल का विस्तार किया.

 

 

महंगे कंटेनरों के बजाय, उन्होंने 1.5 लीटर और 2 लीटर प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल किया जिसे पूरी तरह से विघटित होने में सैकड़ों साल लगते हैं. एक घरेलू प्रयोग के रूप में शुरू सोच का अब भटिंडा, चंडीगढ़, लुधियाना, मोहाली और अमृतसर में कई स्थानों तक विस्तारित हो चुका है.

 

अन्य जगहों पर विस्तार

अपने घर में वर्टीकल गार्डन की सफलता के बाद, रोहित ने अपने कार्यालय में भी इसे लगाने का फैसला किया. आज उनके कार्यालय परिसर के कुछ हिस्सों को पौधों की 18,000 प्लास्टिक की बोतलों से ढक दिया है. जिसके बाद से ही, रोहित ने शहर भर में ज्यादा से ज्यादा वर्टीकल गार्डन बनाने के लिए आगे कदम बढ़ाया.

 

 

उन्होंने बताया “मुझे वर्टीकल गार्डन बनाने में मदद करने के लिए धार्मिक संस्थानों, स्कूलों, कॉर्पोरेट कार्यालयों और यहां तक ​​कि निजी घरों तक ने संपर्क किया था.” मेहरा के वर्टीकल गार्डन स्थापित करने वाले कुछ स्थानों में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय जैसे प्रीमियम होटल, जिला अदालतें, स्कूल और कॉलेज शामिल हैं. लुधियाना में गुरुद्वारा दुक्ख निवारन साहिब में प्लास्टिक की बोतलों में कुल 37,000 पौधे हैं.

पिछले दो वर्षों में, उनकी पहल पंजाब में एक प्रकार की लहर बन गई है. ऊर्ध्वाधर उद्यान में रुचि रखने वाले लोग परामर्श के लिए रोहित से मिलते हैं. प्लास्टिक की बोतलों की कीमत भी बढ़ गई है जिस पर रोहित ने बताया “जब मैंने शुरुआत की थी तब मैं 40 पैसे की एक बोतल खरीदता था लेकिन अब वही बोतल 6 या 7 रुपये हो गई है.”

 

फायदे

रोहित ने बताया कि दिल्ली और पंजाब जैसे क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या बहुत ज्यादा है यहां बच्चों को गर्मी, सर्दी और प्रदूषण की छुट्टियां मिलती हैं. वर्टीकल गार्डन से वायु और प्लास्टिक दोनों प्रदूषण की समस्या का समाधान हो सकता है.

बागान को स्थापित करने के कई लाभ हैं. रोहित ने बताया कि पिछले साल लुधियाना में वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में पाया गया कि शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 274 था जबकि रोहित के कार्यालय में सिर्फ 78 था.

रोहित ने बताया कि अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि वर्टीकल गार्डन एक तरह से छत्रछाया प्रदान करता है जो तापमान को 5º C से 7.5º C तक कम रखता है. ये पौधों दीवारों को प्रदूषण, वर्षा, हवा और सूरज की किरणों से दीवार को होने वाले नुकसान से भी बचाते हैं. रोहित ने पाया  कि वर्टीकल दीवारें विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को भी आकर्षित करती हैं, जो पहले केवल जंगल में ही देखी जाती थीं.

यह कैसे करते हैं?

वर्टीकल गार्डन की स्थापना के बारे में रोहित ने बताया कि एक सीधा उद्यान बनाने के लिए एक पेच और प्लास्टिक की बोतलों की आवश्यकता होती है जहां एक ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग करके 92% पानी को संरक्षित किया जाता है. पौधे रोपण के लिए कोको पीट, वर्मीकम्पोस्ट और कोयला राख के मिश्रण का उपयोग किया जाता है.

रोहित ने आगे बताया कि जो पौधे वे उपयोग करते हैं वे देशी पौधे हैं जो ज्यादा समय के लिए स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के ज्यादा अनुकूल हैं. अब तक, उन्होंने 35 विभिन्न प्रकार के पौधों का उपयोग किया है. इस तकनीक की सफलता के बारे में बताते हुए रोहित ने बताया कि उनके सभी पौधों का 99.2% भाग समृद्ध हुआ है.

 

 

जब रोहित ने यह पहल शुरू की, तो वह अपने जीवनकाल में एक लाख पौधे लगाना चाहते थे लेकिन समय से पूर्व ही रोहित ने अब तक पंजाब में 1.85 लाख पौधे लगाए हैं जिसे रोकने की उनकी कोई इच्छा नहीं है. राज्य में वर्टीकल बागानों की मांग लगातार बढ़ रही है. रोहित बताते हैं कि वह और उनकी टीम औसतन तीन या चार दिनों में एक वर्टीकल गार्डन बनाते हैं. रोहित ने पंजाब में अब तक 75 बगीचे बनाए हैं.

 

तर्कसंगत के विचार

जहाँ एक ओर हमारी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए संघर्ष कर रही है, हरियाली तेजी से कम हो रही है वही दूसरी ओर ऐसे प्रयासों ने एक मिसाल कायम की है. तर्कसंगत रोहित मेहरा को वर्टीकल गार्डन बनाकर पर्यावरण की रक्षा में उनके प्रयासों की सराहना करता है.

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