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ये कम्युनिटी फ्रिज बेंगलुरु, चेन्नई में भूख और खाने की बर्बादी की समस्या को सुलझा रहा है

तर्कसंगत

May 2, 2019

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जैसा कि लोग भूख की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए प्रयास कर रहे हैं, चेन्नई की डॉ. इस्सा फातिमा जैस्मीन ने एक समाधान ढूंढा है जो भोजन की बर्बादी और भूख दोनों के मुद्दे को कुछ हद तक दूर करने का प्रयास करता है. अगस्त 2017 में, 35 वर्षीय ऑर्थोडॉन्टिस्ट ने ‘अय्यमितु उन’ नाम से पहला सार्वजनिक फ्रिज खोला. कुछ ही महीनों में, चेन्नई के तीन अन्य स्थानों और बेंगलुरु में एक ने इन सामुदायिक फ्रिजों को स्पोर्ट किया, जो दैनिक आधार पर कम से कम 400 जरूरतमंद लोगों को मुफ्त भोजन प्रदान कर रहा है.  न केवल भोजन, बल्कि शहर भर के लोग इन फ्रिज में किताबें, कपड़े और अन्य स्टेशनरी सामान रख सकते हैं. इससे प्रेरणा लेते हुए, बेंगलुरु के एक व्यक्ति ने भी शहर में इसी तरह की पहल शुरू की है.



बेंगलूरु में सामुदायिक फ्रिज लाना

डॉ. जैस्मीन के प्रयासों को सुनकर, बेंगलुरु के बीटीएम लेआउट के निवासी हरीश कुमार ने उनसे संपर्क किया. हरीश ने तर्कसंगत से बात करते हुए कहा, “हर दिन, जब मैं अपनी बेटी को स्कूल ले जाता था, मैंने कचरे के ट्रक को बचे हुए भोजन को उठाते हुए देखा.” जब से सामुदायिक फ्रिज के विचार ने हरीश की कल्पना में आया उन्होंने इस्सा फातिमा जैस्मीन से संपर्क किया और  बेंगलुरु में एक समान फ्रिज स्थापित करने की उनकी इच्छा व्यक्त की.

 


 

हरीश ने कहा, “उनके मार्गदर्शन में, मैंने फ्रिज स्थापित किया.” बेंगलुरु में कम्युनिटी फ्रिज नवंबर 2017 में स्थापित किया गया था और डॉ. इस्सा द्वारा संचालित संगठन “द पब्लिक फाउंडेशन” के तहत चलाया जाता है.  हरीश शहर में अन्य स्थानों पर भी विस्तार करने की योजना बना रहे है और जिम्मेदार स्वयंसेवकों की तलाश में है, जो इस परियोजना को अपनाएंगे और सामुदायिक फ्रिजों की गुणवत्ता को बनाए रखेंगे.

हालांकि, बीटीएम में पब्लिक फाउंडेशन का समुदाय फ्रिज शहर में पहला नहीं है. कथित तौर पर, इंदिरानगर में बाइब्लोस जैसे रेस्टोरेंट ने रोटरी क्लब ऑफ़ बेंगलुरु के नेतृत्व में एक 180-लीटर सामुदायिक फ्रिज स्थापित किया था.  इसी तरह, ब्रुकफील्ड के निवासियों ने खाद्य अपव्यय को रोकने के लिए जनवरी 2018 में एक सामुदायिक फ्रिज का उद्घाटन किया था.



कम्युनिटी फ्रिज का विचार

इस्सा फातिमा जैस्मीन “द पब्लिक फाउंडेशन” की मैनेजिंग ट्रस्टी हैं जो दोनों शहरों में इन फ्रिजों को चलाती है. तर्कसंगत से बात करते हुए कहा, “मैने फरवरी 2017 में इस विचार के बारे में सोचा. हालांकि, मुझे स्थानीय निगम निकाय से बात करने और आधिकारिक रूप से अपनी पहल शुरू करने में छह महीने लगे.” वह पहले निजी संपत्तियों को फ्रिज इनस्टॉल करने के लिए देख रही थी. हालांकि, वह काम नहीं किया जैसा कि उसने उम्मीद की थी.


उन्होंने महसूस किया कि किसी व्यक्ति के लिए इस तरह की एक परियोजना को अपने दम पर शुरू करना मुश्किल था और इसलिए, इस्सा ने उसे स्थान प्रदान करने वाले निगम की सहायता ली.  यह इस्सा के दिमाग की उपज है जिसका उद्देश्य भूख से निपटना और भोजन की बर्बादी को रोकना है. उन्होंने कहा, “कई बार हम अपना दोपहर का भोजन या पैक किया हुआ भोजन खाना भूल जाते हैं जो बर्बाद हो जाता है.  इसके अलावा, घरों में अधिक मात्रा में पकाया जाने वाला भोजन अक्सर बर्बाद हो जाता है.” कम्युनिटी फ्रिज का मंच लोगों को उनकी भावनाओं या गरिमा को ठेस पहुंचाए बिना जरूरतमंदों को भोजन दान करने में सक्षम बनाता है.

ये सामुदायिक फ्रिज ज्यादातर रिहायशी इलाकों में स्थित होते हैं जहाँ डोनरों को खाद्य पदार्थों का दान करने से पहले विशिष्ट दिशानिर्देशों का पालन करना पड़ता है.  इस्सा ने कहा, “हम नहीं चाहते हैं कि लोग बासी भोजन खाएं और इसलिए हमारे डोनर से इसे बड़े अच्छे से पैक करने के लिए कहते है.” ये फ्रिज सुरक्षा गार्डों द्वारा देखे जाते हैं, जो रेफ्रिजरेटर में छोड़े गए भोजन के गुणवत्ता  को सुनिश्चित करते हैं. इनमें से प्रत्येक रेफ्रिजरेटर सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक खुला है और इसमें 400 पैकेट भोजन स्टोर करने की क्षमता है.

 


तर्कसंगत का तर्क 

हम अक्सर कचरे में अतिरिक्त भोजन डंप करते हैं, न जाने क्या-क्या.  हालाँकि, सामुदायिक फ्रिज तक पहुँच इस समस्या को हल कर सकती है. तर्कसंगत श्री हरीश और डॉ. इस्सा फातिमा जैस्मीन द्वारा की देश में भूख की समस्या को कम करने के प्रयासों के लिए उनकी सराहना करता है.

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