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भारत में निर्माण मज़दूरों की दुर्दशा, अपने अधिकार को तरसते मज़दूर

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Image Credits: Asia News

May 3, 2019

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भारत जैसे देश में जँहा संविधान हर नागरिक को आर्थिक व समाजिक समानता निश्चित करता है वहां देश के मज़दूर के बुनियादी अधिकार अनदेखे किये जा रहें हैं और यह देश के हर राज्य व हर शहर की गाथा है। निमार्ण मज़दूरों का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है इस तरह से इस योगदान को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार द्वारा 1996 से अबतक मज़दूर कल्याण के नाम पर 36,685 करोड़ जमा किये गए लेकिन सिर्फ एक चौथाई 9,967 करोड़ ही खर्च किये गए। पिछ्ले 23 सालों से इन पैसों से किसी का भला ना हुआ। अधिकतर मज़दूर बदहाल स्तिथियों में ही रहते हैं। साफ पानी,बिजली,उचित स्वच्छता सबसे अछूते हैं व टिन की छत में गुज़ारा करते हैं। हाल ही में सुना गया की हरियाणा सरकार मज़दूर वेल्फेयर के पैसों से सिलाई मशीन दे रही है और इसके ज़रिये पैसों का बदर्बांट होता है।

 

कौंन हैं निर्माण मज़दूर? 

निर्माण मजदूरों की दुर्दशा समझने के लिये हमे समझना होगा की निर्माण मज़दूर/कंस्ट्रक्शन वर्कर  कौंन होते हैं? वो मज़दूर जो भवन निर्माण मरम्मत करने सड़क/पुल,रेल्वे बिजली का उत्पादन इत्यादि जैसे कार्यों से जुड़े होते हैं वे निर्माण मज़दूर कहलाते हैं.

 

‘निर्माण श्रमिक अधिनियम’

1996 में निर्माण श्रमिक अधिनियम कानून का बना जिसके तहत मज़दूरों के कल्याण हेतू एक हर राज्य में एक बोर्ड का गठन किया जाना था।लेकिन यह ठीक तरीके से लागू नही हो पाया यहाँ तक की राजधानी दिल्ली में ही 2003 में बोर्ड का गठन हुआ।और इस कानून से खास सुधार ना आ पाया।बल्कि बोर्ड में भ्रष्टाचार अधिक स्तर पर बढ़ गया।सरकार मज़दूरों के कल्याण के नाम पर सेस भी वसूलती है जिसके तहत मज़दूरों को आर्थिक व सामाजिक लाभ मिलना चाहिए जैसे लोन,शिक्षा,इलाज खर्च,शादी के लिये पैसे,मत्र्तव लाभ आदि।इस सेस से राज्यों ने काफी धन एकत्रित किया लेकिन इसे वे सकारात्मक प्रयोग में न ला पाए।

 

रजिस्टर करने में दिक्कत

मज़दूर बोर्ड की सुविधाएँ ऑनलाइन होने के कारण मजदूरों की दिक्कतें बढ़ गईं हैं क्योंकि की अधिकतर मज़दूर पढ़े लिखे नही हैं और अपने अधिकार को पाने हेतु यह रेजिसट्रेशन ज़रूरी है।और इसे लेकर भवन निर्माण कामगार युनियन की राज्य कमेटी ने हरियाणा के सभी मुख्यालयों में धरना प्रदर्शन भी किया।

 

क्या है सरकार की मंशा?

वर्तमान भाजपा सरकार ने सोशल सिक्यूरिटी ऐण्ड वेल्फेयर बिल में नये लेबर कोड्स प्रस्तावित किये हैं जिसमे 20 से अधिक श्रम क़ानूनों को एक करने का करने की कोशिश है जिसका मज़दूर संगठन ने कड़ा विरोध किया है उनका कहना है इस तरह कल्याणकारी स्कीमों के तहत लाभ मुश्किल हो जायेंगे। इसी के साथ उन्होने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाया है और कहा कि सरकार इस बोर्ड के तहत एकत्रित धन को कब्ज़े में लेना चाहती है।

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