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इस वकील को धन्यवाद, जिसकी वजह से अब आप आरटीआई के तहत 2 रुपये ­प्रति पेज में उत्तर पुस्तिका प्राप्त कर सकते हैं

तर्कसंगत

Image Credits: Patrika/Paras Jain/Facebook

May 8, 2019

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छात्र अपने परिणाम के डर से, परीक्षा के परिणाम का इन्तेजार करते हैं. परीक्षा को काफी शानदार भी बनाया जाता है. छात्र इन परीक्षाओं को पूरा करने के लिए अपना पूरा समय देते हैं. हालांकि, कई बार वह अपनी अपेक्षाओं से कम अंक प्राप्त करते हैं. स्वाभाविक रूप से, इस कारण वह अपनी उत्तर-पुस्तिकाएँ भी देखना चाहते हैं.

2011 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, “उत्तर-पत्रक सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत एक सूचना है”. (CBSE & Anr. Vs. Aditya Bandopadhyay & Ors., Civil Appeal No. 6454/2011)

इस निर्णय के बावजूद, 2012 में कंपनी सेक्रेटरी के छात्र पारस जैन को उनके संस्थान-इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) द्वारा उत्तर पुस्तिका के लिए 500 / – रुपये का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा था. उन्होंने इस फैसले को चुनौती दी और दिल्ली उच्च न्यायालय और भारत के सर्वोच्च न्यायालय दोनों में कानूनी मामला जीता. जैन अब सभी सरकारी प्राधिकरण (विश्वविद्यालय, बोर्ड, व्यावसायिक निकाय आदि) जो परीक्षा आयोजित कर रहे हैं, उनसे अब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिकाएँ उपलब्ध करा रहे हैं.

 

उत्तर पुस्तिका मात्र 2 रुपये प्रति पृष्ठ पर उपलब्ध कराई जाएगी     

2012 में, जब जैन इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (ICSI) में एक छात्र के रूप में अध्ययन कर रहे थे, तो उन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिका की एक कॉपी की मांग की थी. आरटीआई नियम, 2012 के बावजूद, ICSI ने प्रति पृष्ठ 2 रुपये प्रति देने से इनकार कर दिया और इसके बदले प्रति विषय 500 रुपये की मांग की.

जब संस्थान ने आरटीआई नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में मामला दायर किया. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने बिना किसी वकील के अकेले अपना केस लड़ा. जैन की इस दलील पर ध्यान देते हुए कि बहुत से पिछड़े वर्ग से आने वाले छात्र कभी भी अधिक शुल्क के कारण सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएंगे.

19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने भी जैन के पक्ष में फैसला दिया. तर्कसंगत से बात करते हुए, जैन, जो अब एक वकील के रूप में काम करते हैं, ने कहा, “यदि कोई छात्र आरटीआई अधिनियम के तहत उत्तर-पत्र की अपनी प्रतियां मांगता है, तो परीक्षा के संस्थान को निर्धारित शुल्क के अनुसार इस तरह की प्रतियां प्रदान करनी होंगी जो की आरटीआई नियम के अनुसार 2 रु प्रति पेज है. उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियाँ प्राप्त करने के लिए छात्रों को अब 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक के भारी शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है.

 

Whistle for Public Interest (WHIP)

जैन ने कुमार शानू के साथ मिलकर Whistle for Public Interest की स्थापना की. WHIP कानून के छात्रों और युवा वकीलों के लिए एक मंच है जो भारत में सार्वजनिक प्राधिकरणों के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए एवं सार्वजनिक मुद्दों को हल करने के लिए है. 2016 में, यह WHIP के ज्ञान में आया कि CBSE से उत्तर-पुस्तिकाओं की प्रतियाँ प्राप्त करने के लिए 1200 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा था और आरटीआई अधिनियम के तहत मूल्यांकित की गई उत्तर-पुस्तिकाओं की मांग से इनकार कर रहा था.

यह न केवल हर साल लाखों छात्रों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन था, बल्कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय की भी अवमानना ​​थी. 2016 में लॉ स्कूल में रहते हुए भी, WHIP के कोफाउंडर्स ने CBSE के चेयरमैन, के खिलाफ अवमानना की ​​याचिका दायर कर दी. नतीजतन, सुप्रीम कोर्ट की एक डिवीजन बेंच जिसमें श्री रंजन गोगोई जे और श्री. पी.सी. पंत जे. ने CBSE के चेयरमैन को आदित्य बंदोपाध्याय के मामले में जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का बारीकी से निरीक्षण करने और आरटीआई अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार मूल्यांकन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्रदान करने का निर्देश दिया.

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