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सात साल से लकवाग्रस्त, यह प्रिंसिपल टेक्नोलॉजी की मदद से स्कूल चलाती है

तर्कसंगत

May 8, 2019

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किसी भी शिक्षक के लिए अपनी सेवानिवृत्ति के बाद या किन्हीं कारणों से अपना स्कूल छोड़ना बहुत ही कठिन होता है. उसी रवैये और उसकी लगन ने मेरठ की निवासी उमा शर्मा को लकवाग्रस्त होने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ने के लिए प्रेरित किया. सभी बाधाओं के खिलाफ लड़ते हुए, वह एक स्कूल प्रिंसिपल के रूप में अपनी स्थिति में जारी है, वह भी पूरी तरह से लकवाग्रस्त शारीरिक स्थिति में.

पिछले सात वर्षों से, नेशनल पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल उमा शर्मा पूरी तरह से गर्दन से नीचे तक लकवाग्रस्त हैं. लेकिन उनकी इच्छाशक्ति और जुनून उन्हे अद्वितीय बनाता है. नवीनतम तकनीक की मदद से, उमा को लकवाग्रस्त होने के बाद भी स्कूल का संचालन करती हैं. वह सिर्फ अपने सिर और हाथ को हिला सकती है, उनके शरीर के बाकी हिस्से हिलते नहीं है.

“जब मैं पूरी तरह से लकवाग्रस्त हो गई तो मैंने तय किया कि मैं चीजों को छोड़ना नहीं चाहती और जो मुझे अच्छा लगता है वो करती रहूँगी , जैसे दैनिक आधार पर स्कूल का संचालन करना. सबसे पहले हमने स्कूल और मेरे निवास पर डिश एंटेना स्थापित किया था ताकि लाइव ऑडियो और वीडियो फीड प्रसारित किए जा सकें, ”उमा ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया.

डिश एंटेना की स्थापना के बाद, स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, जिनमें कक्षाओं, स्टाफ रूम और खेल का मैदान शामिल हैं. उमा अपने बेड पर से स्कूल की सभी गतिविधियों पर नज़र रखती है. स्टाफ और छात्र उनकी मदद के लिए हमेशा मौजूद रहते हैं. वह छात्रों और स्टाफ के साथ संवाद करने के लिए अपने इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट का उपयोग भी करती है.

“कई मौकों पर, मैं समूहों और अन्य स्टाफ सदस्यों को शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बुलाती हूँ. मैं मेधावी छात्रों को एक चैट के लिए आमंत्रित करती हूं और कमजोर बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हूं, ”उमा ने कहा.

जीवन कभी उमा पर मेहरबान नहीं हुआ. उनके इकलौते बेटे राजीव (21) का 2001 में निधन हो गया. इससे पहले 1991 में उन्होंने अपने पति को खो दिया था. 2010 में उनकी छोटी बहन की मौत, उनके लिए एक और झटका था. भले ही उनके उदास होने की पर्याप्त परिस्थितियां थीं, उन्होने चीजों को नहीं छोड़ने का फैसला किया. उनके पति की मृत्यु के अगले वर्ष उमा ने स्कूल की स्थापना की जिसे वह चला रही है.

उमा कई अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा के रूप में खड़ी हैं, जो परिस्थितियों को विकास में बाधा के रूप में दोषी ठहराते हैं.

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