सप्रेक

भारत के लिए गर्व की बात : IIT मद्रास की टीम SpaceX Hyperloop Pod-2019 के लिए हुई चयनित

तर्कसंगत

May 13, 2019

SHARES

एलोन मस्क की SpaceX परियोजना को भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए एक नये कदम के रूप में चिह्नित किया गया है. मस्क के प्रयास, समय और परिवहन की उन संभावनाओं का पता लगाने के लिए आगे आए हैं जो प्रौद्योगिकी से जुड़े हुए हैं. इस तरह की चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में से एक, जो आने वाले समय में परिवहन के अगले मोड का पता लगाएगी, SpaceX द्वारा शुरू की गई है. ‘हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता’ की घोषणा 2015 में दुनिया भर के छात्रों के कार्यात्मक परिवहन वाहनों के प्रोटोटाइप को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी. अब तक प्रतियोगिता के तीन संस्करणों को सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है और चौथा संस्करण जुलाई 2019 में कैलिफोर्निया में आयोजित होने को तैयार है. सैकड़ों टीमों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करते हुए, IIT मद्रास के टीम ‘अविष्कार हाइपरलूप’ ने अंतिम दौर के लिए चयनित होकर देश को गौरवान्वित किया है. पिछले साल वे फाइनल में जाने में असफल रहे थे लेकिन अब हाइपरलूप कोड को क्रैक करके जीत के करीब आ गए हैं.

 

टीम – अविष्कार हाइपरलूप

परिवहन के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले एलोन मस्क के सपने से प्रेरित होकर, इस टीम की स्थापना IIT मद्रास में M.Tech अंतिम वर्ष के छात्र सुयश सिंह ने की थी जिसमें अंकित कुकड़िया और विनीत शर्मा ने उनका सहयोग किया. वैश्विक प्रतियोगिता में अपने संस्थान का प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से उन्होंने तीस लोगो की एक टीम बनाई जिसमें ग्रेजुएट और रिसर्च स्कॉलर के छात्र शामिल हैं. संस्थान में Center For Innovation (CFI) के साथ काम करते हुए यह टीम आने वाली प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए, पूरी तरह से स्वचालित हाइपरलूप पॉड बनाने पर काम कर रही है जिसकी गति 800 किमी / घंटा है और मुंबई से चेन्नई की दूरी मात्र एक घंटे में पूरी की जा सकती है. फाइनल में टीमों को सबसे तेज गति बढ़ाने और सबसे जल्दी गति कम करने के आधार पर आंका जायेगा.

तर्कसंगत से बात करते हुए सुयश ने बताया “टीम के सदस्य हाइपरलूप पॉड में शामिल डिजाइन को बेहतर बनाने के लिए महीनों से कड़ी मेहनत कर रहे हैं. इस प्रतियोगिता के लिए, हम एक व्हील-आधारित मॉडल बना रहे हैं. हमारी पॉड पहियों पर चलेगी, जिसे मोटर्स और बैटरी पैक से पावर मिलेगी. Carbon Fiber Reinforced Polymer (CFRP) से बने ढांचे (Chassis) की लंबाई लगभग 2.7 मीटर है. हम एक वैक्यूम ट्यूब में 1.5 किमी की दूरी में 300-350 किमी / घंटा की गति को लक्षित कर रहे हैं. हम जून के मध्य तक अपने हाइपरलूप पॉड की असेंबली को पूरा करके प्रतियोगिता के फाइनल के लिए इसे कैलिफोर्निया में भेजने की योजना बना रहे हैं. इस नवीनतम तकनीक को विकसित करने और इस प्रतियोगिता में शामिल होना हमारी पूरी टीम के लिए सबसे बड़ा अनुभव रहा है.”

 

हाइपरलूप

परिवहन के पांचवें मोड के रूप में, हाइपर लूप में चुंबकीय उत्तोलन (Megnetic Levitation) और रैखिक प्रेरण मॉडल (Linear Induction Models-LIM) जैसी प्रौद्योगिकियों के साथ उच्च गति पर यात्रा करने के लिए वैक्यूम ट्यूबों की एक प्रणाली का उपयोग किया जाता है. वायु प्रतिरोध कम होने पर, ट्यूब के अंदर कैप्सूल 1000 किमी / घंटा की गति तक पहुंच सकता है. यह निर्वात के कारण एयर ड्रैग और घर्षण के कारण यांत्रिक ड्रैग को कम करता है. अभी के लिए उन्होंने किसी भी पेलोड को डिज़ाइन नहीं किया गया है. आगे आने वाली प्रतियोगिताओं में, टीम का उद्देश्य एक प्रोटोटाइप डिजाइन करना है जो हाइपरलूप पॉड के पेलोड को पूरी तरह संभल सके. वे अन्य शोध परियोजनाओं पर भी काम कर रहे हैं जिससे वे अपने मॉडल में नई तकनीकों को लागू कर सकें.

“हमारा एक मात्रा उद्देशय अधिकतम गति प्राप्त करना था जिसमें हमारी टीम को वजन, आयाम, उपकरणों के नियंत्रण पर बहुत कठिनाइयों और असफलताओं का सामना करना पड़ा. यह जरुरी था कि उच्च गति प्राप्त करने के लिए पोड का वजन कम रखा जाये. साथ ही निर्वात की स्थिति के कारण हमारी पोड को नियंत्रित और क्रियान्वयन रखना भी एक चुनौती था. टीम के सलाहकार डॉ. एस.आर.चक्रवर्ती, डॉ. बॉबी जॉर्ज और संस्थान के पूर्व छात्रों के सहयोग, उनकी सलाह और प्रेरणा ने हमारे लिए आगे बढ़ाने का मार्ग बनाया है” सुयश ने तर्कसंगत से बताया.

 

भारत में हाइपरलूप

इन सभी चुनौतियों के अलावा, प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ी समस्या पैसे की थी. वे पैसे जुटाने के लिए Ketto पर एक अभियान चला रहे हैं. इसके अलावा उनके संभावित प्रोजेक्ट के लिए उद्योग प्रायोजकों के साथ वे ऐसे तरीकों की तलाश कर रहे हैं जिनके माध्यम से पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित कर सकें. पहले से अधिक तेजी से हो रहे बदलाव के साथ, वे भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था में हाइपर लूप के बारे में आशावादी हैं. महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही मुंबई और पुणे के बीच हाइपर लूप बनाने के लिए वर्जिन हाइपरलूप वन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं जिसका वर्तमान में परीक्षण चल रहा है. हालांकि टीम ‘अविष्कार’ अभी अपने प्रोजेक्ट का व्यवसायीकरण नहीं कर रहे है, अभी वे केवल प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

IIT मद्रास की ‘अविष्कार हाइपरलूप’ डिजाइन टीम के सुयश ने निष्कर्ष में तर्कसंगत को बताया “हम भारत में हाइपरलूप लागू होने की बहुत संभावना देखते हैं. हमारे जैसे देश में, जिसमें बड़ी आबादी है और लोग अपनी जिंदगी में काफी व्यस्त रहते हैं, हाइपरलूप जल्दी और आसान यात्रा के लिए मार्ग प्रशस्त करने में सहायक होगा. साथ ही, वर्तमान पर्यावरणीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमें परिवहन के एक पर्यावरण-अनुकूल तरीके की जरुरत है और हाइपरलूप ऐसे समय में उपयोगी होगा. हाइपरलूप के पूंजी निवेश के लिए आवश्यक प्रारंभिक लागत अधिक हो सकती है लेकिन बाद में विभिन्न शहरों में होने वाली लागत वास्तव में कम होगी क्योंकि लंबे समय में इसे संचालित करना आसान होगा.”

 

तर्कसंगत  ‘अविष्कार हाइपरलूप’ को SpaceX Hyperloop Competition के फाइनल में चयनित होने और राष्ट्र को विश्व स्तर पर चमकाने के लिए बधाई देता है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...